हल्द्वानी में कांग्रेस रैली के बाद शुद्धिकरण अनुष्ठान पर राज्यसभा में हंगामा, जेपी नड्डा बोले जांच कराएंगे
नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का मुद्दा गुरुवार को राज्यसभा में उठाया गया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना को लेकर सवाल खड़े किए और पूछा कि क्या इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र और संविधान की भावना के अनुरूप है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिना किसी धर्म या समुदाय का नाम लिए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद इस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है तो यह चिंता का विषय है। खरगे ने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों और लोकतांत्रिक मंचों को लेकर इस तरह की सोच संविधान की रक्षा करती है।
खरगे ने सदन में कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी तरह के भेदभाव या असहिष्णुता की जगह नहीं होनी चाहिए।
इस मुद्दे पर जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कहा कि जो कुछ भी हुआ वह दुखद है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना केवल किसी एक व्यक्ति या दल के लिए नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है। नड्डा ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जेपी नड्डा ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सभी को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की ऐसी घटना, जिससे समाज में गलत संदेश जाए, उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सरकार मामले की जानकारी जुटाकर उचित कदम उठाएगी।
दरअसल, आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक राजनीतिक रैली आयोजित की गई थी। रैली के बाद कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर मैदान में ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी नेता या राजनीतिक कार्यक्रम के बाद इस तरह की प्रतिक्रिया समाज में विभाजन का संदेश देती है।
वहीं, इस मामले को लेकर सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि किसी भी घटना की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। सरकार ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
राज्यसभा में यह मुद्दा ऐसे समय उठा जब संसद में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक विषयों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है। विपक्ष लगातार सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सभी मामलों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, हल्द्वानी की यह घटना अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष इसे संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार ने जांच का भरोसा देकर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।
फिलहाल इस मामले में सभी की नजर जांच पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शुद्धिकरण अनुष्ठान किस उद्देश्य से किया गया था और इसमें शामिल लोगों की मंशा क्या थी। सरकार की ओर से मिले जांच के आश्वासन के बाद अब आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।