भारत जोड़ो यात्रा के चार साल कांग्रेस ने बताया राजनीति का निर्णायक मोड़
नई दिल्ली। कांग्रेस ने सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली गई 'भारत जोड़ो यात्रा' की चौथी वर्षगांठ पर इसे पार्टी और देश की राजनीति के लिए एक 'निर्णायक मोड़' बताया। कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि इस यात्रा ने लोगों के बीच नई उम्मीद पैदा की और इसका उद्देश्य अपनी बात सुनाना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी चिंताओं और समस्याओं को सुनना था।
जयराम रमेश ने कहा कि चार साल पहले राहुल गांधी के नेतृत्व में ऐतिहासिक भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत हुई थी। यात्रा शुरू करने से पहले राहुल गांधी कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचे थे। इसके बाद कन्याकुमारी से यात्रा का औपचारिक आगाज किया गया था।
कांग्रेस ने वर्षगांठ के मौके पर यात्रा से जुड़ी यादों को साझा करते हुए इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को रेखांकित किया।
कांग्रेस ने यात्रा को बताया निर्णायक मोड़
जयराम रमेश ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अभियान से कहीं अधिक थी। उनके मुताबिक इसने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा किया और विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधे संवाद का अवसर दिया।
कांग्रेस नेता ने यात्रा को एक ऐसा अभियान बताया, जिसमें राहुल गांधी ने लगातार लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। पार्टी का दावा है कि इस दौरान बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक सद्भाव, आर्थिक असमानता और किसानों से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए।
जयराम रमेश ने कहा कि यात्रा का मकसद लोगों को केवल राजनीतिक संदेश देना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि आम नागरिक किन समस्याओं और चिंताओं का सामना कर रहे हैं।
'मन की बात नहीं जनता की चिंता सुनना था'
कांग्रेस ने यात्रा की वर्षगांठ पर अपने पुराने राजनीतिक संदेश को एक बार फिर दोहराया। पार्टी ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का उद्देश्य 'मन की बात' सुनाना नहीं, बल्कि 'जनता की चिंता' सुनना था।
इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस लंबे समय से दावा करती रही है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने समाज के अलग-अलग वर्गों से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी।
यात्रा में किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, छात्रों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी।
कन्याकुमारी से हुई थी शुरुआत
राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी। यात्रा की शुरुआत से पहले उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल का दौरा किया था।
कन्याकुमारी से शुरू हुआ यह अभियान देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर तक पहुंचा। इस दौरान राहुल गांधी और उनके साथ चल रहे कांग्रेस नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने हजारों किलोमीटर की दूरी तय की।
यात्रा के दौरान अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इसमें शामिल हुए। कांग्रेस ने इसे देश को जोड़ने और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाला अभियान बताया था।
राहुल गांधी की राजनीतिक छवि पर पड़ा असर
भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में बदलाव को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। लंबे समय तक पैदल यात्रा, आम लोगों से मुलाकात और रास्ते में होने वाले संवादों को कांग्रेस ने उनकी राजनीति के नए स्वरूप के रूप में पेश किया।
पार्टी नेताओं का मानना है कि यात्रा ने राहुल गांधी को लोगों से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। कई स्थानों पर उनकी किसानों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों के साथ बातचीत की तस्वीरें और वीडियो भी चर्चा में रहे।
कांग्रेस ने यात्रा को राहुल गांधी की जनसंपर्क राजनीति का महत्वपूर्ण अध्याय बताया है।
महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस ने महंगाई और बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाया था। राहुल गांधी ने कई सभाओं और संवाद कार्यक्रमों में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए थे।
इसके अलावा सामाजिक ध्रुवीकरण और आर्थिक असमानता जैसे विषयों को भी यात्रा में प्रमुखता दी गई। कांग्रेस का दावा था कि देश में नफरत और विभाजन की राजनीति के खिलाफ एकजुटता का संदेश देना यात्रा का केंद्रीय उद्देश्य था।
भाजपा ने उस समय कांग्रेस के इन आरोपों और यात्रा से जुड़े राजनीतिक दावों का विरोध किया था। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के रूप में पेश किया था।
यात्रा के बाद भी जारी रखा अभियान
पहली भारत जोड़ो यात्रा समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' भी निकाली। इसके जरिए पार्टी ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से जुड़े मुद्दों को सामने रखने की कोशिश की।
इस तरह भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस की आगे की राजनीतिक रणनीति का भी आधार बनी। पार्टी ने जनसंपर्क और सीधे संवाद के इस मॉडल को बाद के अभियानों में जारी रखा।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पहली यात्रा ने संगठन और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा पैदा करने के साथ पार्टी को अपने राजनीतिक मुद्दे जनता के बीच ले जाने का अवसर दिया।
चौथी वर्षगांठ पर पुराने संदेश को किया याद
यात्रा की चौथी वर्षगांठ पर कांग्रेस ने एक बार फिर उसके मूल संदेश को सामने रखा है। जयराम रमेश ने इसे नई उम्मीद पैदा करने वाला निर्णायक मोड़ बताया और कहा कि अभियान का केंद्र जनता की आवाज सुनना था।
पार्टी ने वर्षगांठ के बहाने राहुल गांधी की उस राजनीतिक रणनीति को भी रेखांकित किया, जिसमें बड़े मंचों की तुलना में सड़क पर लोगों से सीधे संवाद को महत्व दिया गया।
चार साल बाद भी कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा को अपनी हालिया राजनीतिक यात्रा के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि कन्याकुमारी से शुरू हुए उस अभियान ने केवल संगठन को सक्रिय नहीं किया, बल्कि राजनीति में संवाद और जनता से सीधे संपर्क को नए तरीके से सामने रखा।