नई दिल्ली। कॉस्मेटिक्स, दवाओं और मेडिकल डिवाइस के आयात को लेकर सरकार ने कस्टम जांच प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने इन उत्पादों के इंपोर्ट कंसाइनमेंट की जांच और क्लियरेंस के लिए एक स्टैंडर्ड चेकलिस्ट जारी की है। अब कस्टम अधिकारियों को संबंधित कंसाइनमेंट को मंजूरी देने से पहले निर्धारित बिंदुओं के आधार पर जरूरी दस्तावेजों और नियामकीय अनुपालनों की जांच करनी होगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य आयात किए जा रहे कॉस्मेटिक्स, दवाओं और मेडिकल डिवाइस के संबंध में जरूरी कानूनी और नियामकीय शर्तों का पालन सुनिश्चित करना है। इन उत्पादों का सीधा संबंध उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से है। ऐसे में इनके आयात के दौरान लाइसेंस, अनुमति और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। CBIC की ओर से जारी चेकलिस्ट के बाद कस्टम अधिकारियों के लिए जांच की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और एकरूप होने की उम्मीद है।
इन उत्पादों के आयात पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा इसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधान लागू होते हैं। आयातकों को संबंधित उत्पाद की प्रकृति और श्रेणी के अनुसार आवश्यक लाइसेंस, परमिशन और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने होते हैं। कंसाइनमेंट की कस्टम क्लियरेंस प्रक्रिया के दौरान इन आवश्यकताओं की जांच की जाती है। नई स्टैंडर्ड चेकलिस्ट इसी प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने में मदद करेगी।
चेकलिस्ट तैयार करने में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से संबंधित नियामकीय प्रावधानों को भी ध्यान में रखा गया है। CDSCO देश में दवाओं, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइस से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियामकीय कार्यों की निगरानी करता है। इसलिए आयात के स्तर पर कस्टम जांच को संबंधित ड्रग रेगुलेटरी व्यवस्था से जोड़ना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।