सत्य निकेतन हादसे की होगी मजिस्ट्रेट जांच, CM ने घटनास्थल और AIIMS का किया दौरा
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के पांच छात्रों की मौत के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। रविवार को मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर हालात का जायजा लिया और इसके बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की। करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट (PG) आवास के रूप में किया जा रहा था। हादसे के बाद इमारत की स्थिति, उसमें चल रहे कार्य और सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से पूरे हादसे की जानकारी ली। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों और इमारत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी हासिल की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेट जांच कराने का आदेश दिया, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी तथा किराये के कमरों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे में छात्रों की मौत ने इलाके में संचालित पुरानी इमारतों और पीजी आवासों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे का शिकार हुई इमारत लगभग 30 साल पुरानी थी। पांच मंजिला इस इमारत में पेइंग गेस्ट सुविधा संचालित की जा रही थी। हादसे के समय इमारत में कई लोगों के मौजूद होने की बात सामने आई। इमारत अचानक गिरने के बाद लोग मलबे में दब गए और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। घायलों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एम्स ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 मरीजों को लाया गया था। इनमें से चार लोगों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित किया गया। एक अन्य घायल ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में पांच छात्रों की मौत की जानकारी सामने आई है।
बाकी घायलों का अस्पताल में उपचार किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य तथा इलाज के बारे में जानकारी ली। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
मजिस्ट्रेट जांच में अब कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल होने की उम्मीद है। सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि इमारत गिरने का वास्तविक कारण क्या था। इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी और क्या इसमें किसी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिस इमारत का इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा था, उसके पास सभी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा संबंधी मंजूरियां थीं या नहीं। इमारत में रहने वाले छात्रों की संख्या और उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों की भी जांच की जा सकती है।
हादसे ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा युवा किराये पर रहते हैं, मकानों को पीजी में बदलकर इस्तेमाल किया जाता है। कई बार एक इमारत में क्षमता से अधिक लोगों को ठहराए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रहते हैं। साउथ कैंपस के पास होने के कारण यह क्षेत्र छात्रों के लिए पसंदीदा आवासीय इलाकों में शामिल है। यहां पीजी, हॉस्टल और किराये के कमरों की बड़ी संख्या है। ऐसे में हादसे के बाद अन्य पीजी इमारतों की सुरक्षा जांच की मांग भी उठ सकती है।
मजिस्ट्रेट जांच से यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमारत के संबंध में पहले किसी विभाग को शिकायत मिली थी या नहीं। यदि इमारत की स्थिति खराब थी तो संबंधित एजेंसियों ने क्या कदम उठाए थे, इसकी भी पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।
मुख्यमंत्री की ओर से जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब संबंधित विभागों से रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। इमारत का नक्शा, निर्माण से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृतियां और पीजी संचालन से संबंधित रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच भी चिंता का माहौल है। आसपास रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलाके में ऐसी कितनी इमारतें हैं जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में छात्रों को ठहराने के लिए किया जा रहा है और क्या वे संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हैं।
दिल्ली जैसे महानगर में पीजी आवास की मांग लगातार बनी रहती है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास हजारों विद्यार्थी निजी पीजी में रहते हैं। ऐसे में भवन सुरक्षा से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है। सत्य निकेतन की घटना ने इस जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
प्रशासन के सामने अब हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की चुनौती भी है। यदि जांच में भवन संबंधी नियमों या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
मृत छात्रों के परिवारों के लिए यह घटना गहरा सदमा लेकर आई है। पढ़ाई के लिए राजधानी आए युवाओं की इस तरह जान चले जाने से दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों में भी शोक और नाराजगी है। हादसे के बाद सुरक्षित छात्र आवास का मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के साथ मजिस्ट्रेट जांच का आदेश देकर मामले की विस्तृत पड़ताल का रास्ता साफ कर दिया है। अब जांच रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत आखिर क्यों गिरी और इस हादसे के लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान घायलों के इलाज और हादसे से जुड़े तथ्यों को जुटाने पर है। पांच छात्रों की मौत के बाद सत्य निकेतन हादसा राजधानी में भवन और पीजी सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी बन गया है। मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों पर अब मृतकों के परिवारों के साथ छात्रों और स्थानीय लोगों की भी नजर रहेगी।