दिव्यांगता प्रतिभा की राह में बाधा नहीं, कम उम्र से सशक्तिकरण जरूरी: योगी आदित्यनाथ
दिव्यांगजन पेंशन
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि शारीरिक दिव्यांगता प्रतिभाशाली युवाओं की सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों और युवाओं को कम उम्र से ही सही संसाधन, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन की राशि में और बढ़ोतरी करेगी। गोरखपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और HURL गोरखपुर के संयुक्त आयोजन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने 509 दिव्यांगजनों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन पहले 300 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 500 रुपये किया गया और बाद में 1,000 रुपये किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में इस राशि को और बढ़ाएगी। हालांकि, नई पेंशन राशि और उसके लागू होने की तारीख की घोषणा उन्होंने इस कार्यक्रम में नहीं की। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी राज्य की प्रगति का आकलन केवल बड़े भवनों या विकास परियोजनाओं से नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक प्रगति इस बात से दिखाई देती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक कितनी आसानी से पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की प्रतिभा को रोक नहीं सकतीं। मुख्यमंत्री ने प्रतिभा के लिए अवसर और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि अपनी क्षमता साबित करने के लिए उचित अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने ऋषि अष्टावक्र, सूरदास, रविंद्र जैन और अरुणिमा सिन्हा जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उपलब्धियां केवल शारीरिक क्षमता के आधार पर हासिल नहीं होतीं। उन्होंने पैरालंपिक खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास को महत्वपूर्ण बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर आयोजित कर दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान को मजबूत किया गया है और उन्हें पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने दिव्यांग बच्चों के शुरुआती विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही दिव्यांगता की पहचान, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने बताया कि 3 से 7 वर्ष की आयु के श्रवण, दृष्टि और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए ‘बचपन डे-केयर सेंटर’ का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 25 डे-केयर सेंटर संचालित हैं, जबकि 28 नए केंद्र खोले जाने की योजना है। कार्यक्रम में दिव्यांग विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। सरकार का जोर प्रारंभिक स्तर से शिक्षा, उपचार, तकनीकी सहायता और सरकारी योजनाओं से जोड़कर दिव्यांगजनों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर है।