नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सदस्य तरुण चुग ने खनन और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि देश की भूमिगत खनिज संपदा किसी एक सरकार या राज्य की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि पूरे राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों की साझी अमानत है।

तरुण चुग ने कहा कि खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, स्थिरता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस तरह होना चाहिए, जिससे देश के विकास के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के हितों की भी रक्षा हो सके।

राज्यसभा सदस्य ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्यों के अधिकारों को खत्म करना नहीं है, बल्कि खनिज क्षेत्र में एक समान और अनुशासित व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में स्पष्ट नियम और स्थिर नीतियां होने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों को भी बेहतर माहौल मिलेगा।

चुग ने विधेयक में प्रस्तावित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिज युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य प्रकार की लेवी लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय शर्तों का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से खनन क्षेत्र में अनिश्चितता कम होगी। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम और शुल्क व्यवस्था होने से कई बार निवेशकों और उद्योगों के सामने चुनौतियां आती हैं। एक समान नीति से खनन गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

भाजपा नेता ने कहा कि खनिज संसाधन देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा और अन्य खनिजों का उपयोग उद्योगों, ऊर्जा उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास में होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में प्रभावी नियमन जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा का इस्तेमाल केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके संरक्षण और संतुलित उपयोग पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

तरुण चुग ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मजबूत नियामक व्यवस्था से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और अवैध खनन जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। खनिज आधारित उद्योगों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।

चुग ने कहा कि सरकार का लक्ष्य खनिज क्षेत्र को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक हितों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधेयक को अधिकारों के टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य व्यवस्था को सरल बनाना और खनिज क्षेत्र में स्पष्टता लाना है।

भाजपा नेता ने कहा कि देश के विकास के लिए खनिज संसाधनों का सही उपयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था से राज्यों, केंद्र और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, खनन क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता निवेश के लिए महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक चलने वाली खनन परियोजनाओं के लिए स्पष्ट नियम और शुल्क व्यवस्था जरूरी होती है।

तरुण चुग ने दोहराया कि खनिज संपदा केवल आर्थिक संसाधन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय संपत्ति है। इसलिए इसके उपयोग में जिम्मेदारी और दूरदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खनन और खनिज क्षेत्र में सुधारों का उद्देश्य देश के विकास को गति देना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

Tags: