नई दिल्ली: बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड ने गुरुग्राम में मिलकर बनाए गए 'गोदरेज एयर' प्रोजेक्ट से जुड़े अपने विवाद को सुलझा लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर और एक अन्य याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया, क्योंकि दोनों पक्षों ने अपने विवाद सुलझा लिए थे और एक समझौता किया था।
जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने हाल ही में दिए एक आदेश में मुंबई के विक्रोली पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR और उससे जुड़ी आगे की सभी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया।हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द होने के बाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी 'लुक आउट सर्कुलर' (LOC) को भी रद्द कर दिया जाए।हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने कोर्ट को सूचित किया था कि उनके विवाद सुलझ गए हैं और उनके बीच समझौता पक्का हो गया है। मूल शिकायतकर्ता ने भी FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
इससे पहले, 25 अगस्त को हाई कोर्ट ने ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर के अमित गुप्ता को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने का निर्देश दिया था, जो उस समय हिरासत में थे। कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की बातचीत को देखते हुए उनकी रिमांड रद्द कर दी थी।27 अगस्त को कोर्ट ने दर्ज किया कि दोनों पक्षों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और अपने विवाद सुलझा लिए हैं। इसके बाद, अंतिम आदेश पारित होने से पहले बाकी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए मामले की सुनवाई टाल दी गई थी।
याचिका को स्वीकार करते हुए, हाई कोर्ट ने उन मामलों पर भी टिप्पणी की जिनमें निजी समझौतों के बाद आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की जाती है।कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल निजी समझौतों के लिए मोल-भाव करने के साधन के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब जांच और अदालती कार्यवाही में सरकारी संसाधन और कोर्ट का समय खर्च हो चुका हो।
कोर्ट ने गौर किया कि एक बार आपराधिक कार्यवाही शुरू होने पर पुलिस और कोर्ट उस मामले में समय और संसाधन लगाते हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द करने की मांग पर विचार करते समय इस पहलू को ध्यान में रखा जा सकता है।
हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों का भी जिक्र किया जहां कमर्शियल या वैवाहिक विवादों में समझौते के लिए दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने के मकसद से आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर अलग-अलग विचार किया जाना चाहिए और बिना सोचे-समझे जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए। इस मामले में, याचिकाकर्ताओं और मूल शिकायतकर्ता ने अपनी मर्ज़ी से 1-1 लाख रुपये का चैरिटेबल योगदान देने पर सहमति जताई। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि कुल 2 लाख रुपये का योगदान एक हफ़्ते के भीतर चुनिंदा चैरिटेबल संस्थाओं को दिया जाए।
चैरिटेबल योगदान से जुड़े निर्देशों के पालन के लिए यह मामला 24 सितंबर को लिस्ट किया गया है।
ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर के बयान के अनुसार, यह समझौता गुरुग्राम में गोदरेज एयर प्रोजेक्ट को लेकर गोदरेज प्रॉपर्टीज़ के साथ हुए विवाद से जुड़ा है। कंपनी ने कहा कि वह इस समझौते को मामले के सौहार्दपूर्ण समाधान के तौर पर देखती है।
हाई कोर्ट के आदेश में याचिकाकर्ताओं और मूल शिकायतकर्ता के बीच हुए समझौते और उसके परिणामस्वरूप FIR रद्द किए जाने का ज़िक्र है। ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अपने सार्वजनिक बयान में गोदरेज एयर प्रोजेक्ट और उससे जुड़े कमर्शियल विवाद के बारे में अलग से जानकारी दी है।