नई दिल्ली : संसद के मौजूदा सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सहयोगी दलों और हाल ही में एनडीए में शामिल हुए सांसदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दिया कि गठबंधन में शामिल सभी सांसदों को पूरा सम्मान और सहयोग मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से उन सांसदों को भरोसा दिलाया जो हाल के दिनों में विपक्षी दलों को छोड़कर एनडीए का हिस्सा बने हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके बारे में जो भी राजनीतिक चर्चाएं या आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि केंद्र सरकार और एनडीए नेतृत्व उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
बैठक में विभिन्न राज्यों से आए करीब 45 सांसद शामिल हुए। इनमें पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर एनडीए में शामिल हुए सांसद भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने इन सभी का स्वागत करते हुए कहा कि गठबंधन केवल राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि विकास और जनसेवा के साझा संकल्प का मंच है। उन्होंने सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्रों में सक्रिय रहने और जनता से लगातार संवाद बनाए रखने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और यह विश्वास तभी मजबूत होता है जब जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करें। उन्होंने सांसदों से गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के बीच अधिक समय बिताने का आग्रह किया ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से जुड़े सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य का विकास पूरे देश के विकास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि बंगाल प्रगति करेगा तो पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने सांसदों से कहा कि यदि किसी विकास परियोजना में केंद्र सरकार की सहायता की आवश्यकता हो तो वे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करें और योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएं।
प्रधानमंत्री ने सांसदों को सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम आज जनता से जुड़ने का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है। सांसदों को अपने कार्यों, योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचानी चाहिए ताकि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद मजबूत हो सके।
संसद की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने नए सांसदों से सदन की बहसों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और यहां होने वाली चर्चाएं देश की दिशा तय करती हैं। उन्होंने सांसदों को संसद के इतिहास, पुरानी बहसों और संसदीय परंपराओं का अध्ययन करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे उनकी संसदीय क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी चिंता जताई कि सदन में लगातार होने वाले हंगामे और व्यवधान के कारण कई नए सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में सार्थक बहस और रचनात्मक चर्चा जरूरी है तथा सांसदों को तथ्यों और तैयारी के साथ सदन में अपनी बात रखनी चाहिए।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए को एक मजबूत और समावेशी परिवार बताते हुए कहा कि गठबंधन में शामिल प्रत्येक दल और प्रत्येक सांसद का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि गठबंधन की ताकत आपसी विश्वास, सहयोग और साझा विकास के लक्ष्य में निहित है। उनका कहना था कि किसी भी सांसद को स्वयं को अकेला महसूस करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पूरा एनडीए परिवार उसके साथ खड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र और आगामी चुनावी तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री की यह बैठक गठबंधन को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। हाल के समय में विपक्षी दलों से आए सांसदों को सार्वजनिक रूप से समर्थन देकर भाजपा नेतृत्व ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि एनडीए में शामिल होने वाले नेताओं को संगठन और सरकार दोनों का पूरा सहयोग मिलेगा। साथ ही, सांसदों को विकास, जनसंपर्क और संसदीय कार्यों पर अधिक ध्यान देने का संदेश देकर गठबंधन ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अपनी रणनीति भी स्पष्ट कर दी है।
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