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विदेशी चंदा बिल पर विपक्ष का विरोध, रणनीति सोमवार को तय

Kavita2
7 Aug 2026 4:11 PM IST
विदेशी चंदा बिल पर विपक्ष का विरोध, रणनीति सोमवार को तय
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नई दिल्ली। विदेशी चंदे को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों में बदलाव की केंद्र सरकार की प्रस्तावित पहल को लेकर विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ने विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन से जुड़े दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि, संसद में प्रस्तावित विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष किस तरीके से अपनी भागीदारी दर्ज कराएगा, इस पर अंतिम फैसला सोमवार को होने वाली गठबंधन नेताओं की बैठक में लिया जाएगा।

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल विदेशी योगदान विनियमन कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार से कई सवाल पूछने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में किसी भी संशोधन से पहले सरकार को इसकी आवश्यकता, उद्देश्य और संभावित प्रभावों को स्पष्ट करना चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार कानूनों में बदलाव के जरिए नागरिक संगठनों, संस्थाओं और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े वित्तीय मामलों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, सरकार की ओर से अभी तक प्रस्तावित बदलावों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

संसद में बहस को लेकर विपक्ष में दो राय

सूत्रों के अनुसार, I.N.D.I.A. गठबंधन के भीतर इस बात को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है कि संसद में इस मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ा जाए। विपक्ष के कुछ नेताओं का मानना है कि विधेयक पर किसी भी चर्चा से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में सरकार का पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

इस धड़े का तर्क है कि विदेशी चंदे से संबंधित कानून गृह मंत्रालय के दायरे में आते हैं, इसलिए सरकार की मंशा और प्रस्तावित बदलावों को लेकर गृह मंत्री का बयान जरूरी है। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट जवाब के विधेयक पर चर्चा करना उचित नहीं होगा।

वहीं, विपक्ष के एक अन्य वर्ग का मत है कि संसद की बहस में शामिल होकर सरकार से सवाल पूछना अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है। इस राय के समर्थक नेताओं का मानना है कि सदन में मौजूद रहकर विपक्ष को विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करनी चाहिए और उससे जुड़े व्यापक मुद्दों को उठाना चाहिए।

RSS की फंडिंग और रजिस्ट्रेशन का मुद्दा उठाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, कुछ विपक्षी नेता बहस के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन और उसकी फंडिंग से जुड़े मुद्दों को भी उठाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि यदि विदेशी चंदे और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर नए नियम बनाए जा रहे हैं, तो सभी संगठनों और संस्थाओं पर समान मानदंड लागू होने चाहिए।

हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्ष की रणनीति और बहस का स्वरूप सोमवार की बैठक के बाद ही स्पष्ट होने की संभावना है।

सरकार ने बिल को लेकर नहीं दी विस्तृत जानकारी

सूत्रों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ने अभी तक अगले सप्ताह संसद में ‘फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पेश किए जाने को लेकर विपक्षी दलों को कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसी भी महत्वपूर्ण विधायी बदलाव को लेकर पहले पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि सांसद प्रभावी तरीके से चर्चा की तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यापक विचार-विमर्श पर आधारित होनी चाहिए।

विदेशी चंदे से जुड़े कानून पर पहले भी होती रही है बहस

भारत में विदेशी योगदान से जुड़े नियम लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। सरकारें समय-समय पर इन कानूनों में बदलाव करती रही हैं, जिनका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बनाए रखना और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाना बताया जाता है।

वहीं, कई गैर-सरकारी संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर यह चिंता जताई जाती रही है कि कड़े नियमों का असर सामाजिक संगठनों और जनहित के कार्यों पर पड़ सकता है।

सोमवार की बैठक पर नजर

अब सभी की नजर I.N.D.I.A. गठबंधन की सोमवार को होने वाली बैठक पर है। इसी बैठक में यह तय किया जाएगा कि विपक्ष संसद में प्रस्तावित विधेयक का किस तरह विरोध करेगा और बहस में उसकी भूमिका क्या होगी।

यदि विपक्ष चर्चा में भाग लेने का फैसला करता है, तो संसद में विदेशी फंडिंग, कानून की जरूरत, पारदर्शिता, राजनीतिक जवाबदेही और संस्थाओं की वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि विपक्ष बहिष्कार या किसी अन्य रणनीति का रास्ता अपनाता है, तो संसद की कार्यवाही पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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