नई दिल्ली। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। नई ड्राफ्ट सूची में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम बाहर होने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद करीब एक-तिहाई मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए हैं। मतदाताओं की संख्या में सबसे ज्यादा कमी उन विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिली है जहां बड़ी आबादी किराए के मकानों, अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी-बस्तियों में रहती है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाते हुए प्रवासी मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने का आरोप लगाया है।

तुगलकाबाद, महरौली, ओखला और बदरपुर समेत दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्रों में ड्राफ्ट मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी की बात सामने आने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। इन इलाकों की एक बड़ी आबादी ऐसी है जो रोजगार और कारोबार के सिलसिले में दिल्ली आकर किराए के मकानों में रहती है। इसके अलावा अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों की संख्या भी काफी अधिक है।

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण और उनके निवास से संबंधित जानकारी की जांच की गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना होता है जो संबंधित पते पर नहीं रहते या अन्य कारणों से मतदाता सूची में बने रहने के पात्र नहीं हैं। हालांकि बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के बाद अब प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा उन विधानसभा क्षेत्रों की हो रही है जहां मतदाताओं की संख्या में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट सामने आई है। तुगलकाबाद, महरौली, ओखला और बदरपुर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जिनका स्थायी निवास दिल्ली से बाहर है लेकिन वे लंबे समय से राजधानी में काम कर रहे हैं। किराएदारों के बार-बार मकान बदलने के कारण मतदाता सूची में दर्ज पते और वास्तविक निवास में अंतर होने की संभावना भी बनी रहती है।

इसी तरह झुग्गी-बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए पते से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं।

आम आदमी पार्टी ने इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण के नाम पर प्रवासी मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में दूसरे राज्यों से आकर रहने वाले लाखों लोग राजधानी की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

AAP का आरोप है कि किराएदारों और प्रवासी आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट संदेह पैदा करती है। पार्टी ने मांग की है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं उन्हें अपनी पात्रता साबित करने और नाम दोबारा शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए।

ड्राफ्ट मतदाता सूची अंतिम सूची नहीं होती है। इसके प्रकाशन के बाद मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने का अवसर मिलता है। जिन पात्र मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा कर सकते हैं। इसी तरह गलत तरीके से शामिल नामों पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है। दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।

ऐसे में जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं उनके लिए संबंधित निर्वाचन कार्यालय या उपलब्ध आधिकारिक माध्यमों के जरिए अपने मतदाता पंजीकरण की स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। पात्रता पूरी करने वाले मतदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

दिल्ली जैसे महानगर में मतदाता सूची को अपडेट करना कई मायनों में चुनौतीपूर्ण है। यहां बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से आते हैं। इनमें से बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है और समय-समय पर अपना निवास स्थान बदलती रहती है। इस कारण मतदाता सूची में पते को अपडेट रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

राजनीतिक रूप से भी मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव का खास महत्व है। किसी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी या बढ़ोतरी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखते हैं।

AAP के आरोपों के बाद अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। पार्टी प्रवासी और किराएदार मतदाताओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है। वहीं पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से अंतिम सूची से बाहर न रहे।

फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियों का है। अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। ऐसे में ड्राफ्ट सूची में करीब एक-तिहाई मतदाताओं के बाहर होने से पैदा हुआ विवाद अंतिम सूची जारी होने तक दिल्ली की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

Tags: