नई दिल्ली: दिल्ली-नोएडा रूट पर चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले की जांच में अब फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट को बेहद अहम माना जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि वैज्ञानिक जांच से आरोपियों के खिलाफ सबूतों को और मजबूत किया जा सकेगा। जांच के दौरान फोरेंसिक टीम ने बस से कई अहम नमूने और साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस के सामने इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती घटनाक्रम की पूरी कड़ी को वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए जोड़ना है। बस में लगे सीसीटीवी कैमरे घटना के समय काम नहीं कर रहे थे, इसलिए जांचकर्ताओं के लिए फोरेंसिक सबूतों की भूमिका और बढ़ गई है। पुलिस ने बस की तलाशी लेकर कई संभावित साक्ष्य सुरक्षित किए हैं। जांच में फिंगरप्रिंट से भी अहम सुराग मिला है। पुलिस के मुताबिक, फिंगरप्रिंट साक्ष्यों से दोनों आरोपियों की बस में मौजूदगी की पुष्टि हुई है। हालांकि, डीएनए रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों का आरोपियों से कोई संबंध है या नहीं।

DNA रिपोर्ट पर टिकी नजर
जांच एजेंसियां मेडिकल जांच और फोरेंसिक नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं। डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए पुलिस आरोपियों और घटनास्थल से मिले नमूनों के बीच संभावित संबंध की जांच करेगी। ऐसे मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य जांच की दिशा तय करने के साथ अदालत में आरोपों को साबित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस ने मामले में उपलब्ध दूसरे साक्ष्यों को भी जुटाना शुरू कर दिया है। बस के रूट, यात्रियों और घटनास्थल से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। इसके अलावा घटनाक्रम से पहले और बाद में बस की गतिविधियों को समझने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
NHRC ने भी लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों को नोटिस जारी कर जांच की प्रगति और पीड़िता को दी गई सहायता तथा मुआवजे से जुड़ी जानकारी मांगी है। दोनों अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
NHRC का हस्तक्षेप मामले की गंभीरता को दर्शाता है। आयोग की ओर से जांच की प्रगति और पीड़िता के अधिकारों से जुड़े पहलुओं पर रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पुलिस पर जांच को तेजी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। फिलहाल पुलिस की नजर फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट पर है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ फिंगरप्रिंट, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य डिजिटल सबूतों को जोड़कर घटना की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सकेगी। रिपोर्ट आने के बाद जांच में आगे की कार्रवाई और आरोपों को मजबूत करने की दिशा और स्पष्ट होने की संभावना है।
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