AIMIM को बड़ा झटका राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार कांग्रेस में शामिल
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बुधवार को राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही वकार ने AIMIM और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी सार्वजनिक मंचों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से हटाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका राजनीतिक रुख इससे अलग दिखाई देता है।
सैयद आसिम वकार ने नई दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कार्यालय में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के AICC प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और AICC अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी मौजूद रहे।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद वकार ने AIMIM की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी जुबानी तौर पर BJP को हटाने की बात करती है, लेकिन वास्तविकता में वह उन्हीं राजनीतिक ताकतों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरती है जो BJP को सत्ता से बाहर करने की कोशिश कर रही हैं।
वकार का यह बयान आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AIMIM लंबे समय से विभिन्न राज्यों में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चुनाव लड़ती रही है। दूसरी ओर कांग्रेस विपक्षी दलों को एकजुट कर BJP के खिलाफ अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
वकार ने कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को अपनी राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए संकेत दिया कि वह BJP के खिलाफ मजबूत राजनीतिक लड़ाई के लिए कांग्रेस को बेहतर विकल्प के रूप में देखते हैं। उनके कांग्रेस में आने को पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के अवसर के तौर पर भी देख सकती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। देश के सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य में कांग्रेस लगातार अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की नजर परंपरागत सामाजिक और राजनीतिक समर्थन को वापस हासिल करने पर भी है। ऐसे में AIMIM के राष्ट्रीय स्तर के प्रवक्ता का कांग्रेस में शामिल होना राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
AIMIM और कांग्रेस के बीच पहले भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। कांग्रेस के कई नेता AIMIM पर विपक्षी वोटों के बंटवारे का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं AIMIM नेतृत्व इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा करता रहा है कि पार्टी स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में चुनाव लड़ती है और खासकर अल्पसंख्यक तथा वंचित वर्गों के मुद्दों को उठाती है।
अब सैयद आसिम वकार ने भी AIMIM की इसी चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि एक तरफ BJP को हटाने की बात की जाती है और दूसरी तरफ चुनावी मैदान में उन दलों के खिलाफ उम्मीदवार उतारे जाते हैं जो BJP को चुनौती दे रहे हैं। वकार के इस बयान से दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पार्टी अलग-अलग जिलों में संगठन को मजबूत करने के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
सैयद आसिम वकार अपनी मुखर राजनीतिक बयानबाजी और टीवी बहसों में AIMIM का पक्ष रखने के लिए जाने जाते रहे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में उन्होंने लंबे समय तक पार्टी की नीतियों और राजनीतिक रुख को सार्वजनिक मंचों पर सामने रखा। ऐसे में उनका AIMIM छोड़कर कांग्रेस में जाना केवल एक सामान्य दल-बदल के बजाय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कांग्रेस में शामिल होने के दौरान वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी इस घटनाक्रम की अहमियत को दर्शाती है। राजेंद्र पाल गौतम उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि अजय राय प्रदेश संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन हैं।
आने वाले समय में कांग्रेस सैयद आसिम वकार को किस तरह की संगठनात्मक या राजनीतिक जिम्मेदारी देती है, इस पर भी नजर रहेगी। उनकी पहचान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और अल्पसंख्यक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय नेता के रूप में रही है। ऐसे में कांग्रेस उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका का इस्तेमाल राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कर सकती है।
वहीं AIMIM के लिए राष्ट्रीय प्रवक्ता का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक स्तर पर नुकसान माना जा सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से वकार के आरोपों और उनके कांग्रेस में शामिल होने को लेकर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और AIMIM समेत कई दल इस मतदाता वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में प्रमुख मुस्लिम चेहरे का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ा सकता है।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद वकार ने जिस तरह AIMIM की BJP विरोधी राजनीति पर सवाल उठाए हैं, उससे आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज होने की संभावना है। उनके आरोप का केंद्र यही है कि BJP को सत्ता से हटाने के लिए केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है बल्कि चुनावी रणनीति भी उसी दिशा में होनी चाहिए।
फिलहाल सैयद आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस इसे अपने संगठन के विस्तार के रूप में पेश कर सकती है, जबकि AIMIM के सामने अपने पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने की चुनौती होगी। आने वाले चुनावों में इस दल-बदल का कितना राजनीतिक प्रभाव पड़ता है, यह चुनावी समीकरण स्पष्ट होने के साथ सामने आएगा।