नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी यानी ITLA के गठन को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था होगी, जो केंद्र और राज्य सरकारों को ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की योजना के एक साझा ढांचे के तहत जोड़ने का काम करेगी।अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ITLA बनाने का फैसला लिया गया है। देश में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और शहरी परिवहन जैसी अलग-अलग व्यवस्थाओं की योजनाओं को एक-दूसरे से जोड़ना जरूरी हो गया है। सरकार का मानना है कि नई अथॉरिटी इसी जरूरत को पूरा करेगी।
ITLA का मुख्य फोकस अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालयों और परिवहन क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा। वैष्णव ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय और सेक्टर अलग-अलग योजना बनाने के बजाय मिलकर व्यापक और समन्वित ट्रांसपोर्ट प्लान तैयार करें। इससे परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बन सकेगा और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी।सरकार के अनुसार ITLA एक स्पेशल पर्पस व्हीकल के रूप में काम करेगी। यह ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में रिसर्च, योजना, परियोजनाओं के मूल्यांकन, निगरानी, प्रभाव आकलन, नीति सहयोग और डेटा एनालिटिक्स की जिम्मेदारी संभालेगी। इसे इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था के तौर पर विकसित किया जाएगा।
नई अथॉरिटी की एक बड़ी जिम्मेदारी दीर्घकालिक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगी। यह योजना कम से कम 10 साल या उससे अधिक की समयावधि को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स को शामिल किया जाएगा।ITLA अलग-अलग परिवहन मंत्रालयों की पांच साल की सेक्टोरल योजनाओं और वार्षिक योजनाओं का भी मूल्यांकन करेगी। इसका मकसद यह देखना होगा कि अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाएं राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान के अनुरूप हैं या नहीं। इससे ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी, जो विभिन्न परिवहन साधनों को एक-दूसरे से जोड़ सकें।
इसके अलावा केंद्र सरकार की 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन भी ITLA करेगी। हालांकि इन परियोजनाओं का वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा। अथॉरिटी 500 करोड़ रुपये से अधिक की परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी करेगी।अगर किसी बड़ी परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान अलग-अलग मंत्रालयों या एजेंसियों के बीच कोई समस्या आती है, तो ITLA उसके समाधान के लिए समन्वित तंत्र उपलब्ध कराएगी। परियोजना पूरी होने के बाद उसके वास्तविक प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि उससे परिवहन क्षमता, लॉजिस्टिक्स, यात्रियों और आर्थिक गतिविधियों को कितना फायदा हुआ।
नई अथॉरिटी नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी भी तैयार करेगी। इसमें GSTN ई-वे बिल, FASTag, वाहन डेटाबेस, GPS आधारित प्रणालियों और शहरी यातायात प्रबंधन से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाएगा। इस डेटा का इस्तेमाल माल ढुलाई के प्रवाह, यात्रा के स्रोत और गंतव्य के विश्लेषण, परियोजना निगरानी और भविष्य की परिवहन जरूरतों के आकलन में किया जाएगा।अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि ITLA ट्रांसपोर्ट के नए तरीकों और भविष्य की तकनीकों पर रिसर्च को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधनों पर भी काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि देश का परिवहन नेटवर्क केवल तेज और प्रभावी ही न हो, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर हो।
सरकार का मानना है कि अलग-अलग परिवहन साधनों के बेहतर तालमेल से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी। सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई और जलमार्गों को एकीकृत तरीके से विकसित करने से माल की आवाजाही तेज हो सकती है और उद्योगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे भारत की वैश्विक लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।ITLA राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 की समीक्षा और उसे अपडेट करने में भी सहयोग करेगी। साथ ही ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी इस संस्था के पास होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतर प्रणालियों को अपनाने पर भी जोर रहेगा।
केंद्र सरकार के इस फैसले को भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे में एक बड़े संस्थागत सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। अभी विभिन्न मंत्रालय और राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर परियोजनाओं की योजना बनाती हैं। ITLA बनने के बाद इन योजनाओं को एक साझा राष्ट्रीय ढांचे के तहत लाने की कोशिश होगी।सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से परियोजनाओं के दोहराव को कम करने, समय पर काम पूरा करने, लागत नियंत्रित रखने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही परिवहन योजनाओं में डेटा आधारित निर्णय लेने और भविष्य की मांग के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की क्षमता भी मजबूत होगी।
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