नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में HDFC बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स के रूप में चल संपत्ति को अटैच किया। आज की तारीख में इनकी बाजार कीमत 3.31 करोड़ रुपये है।

ED के बेंगलुरु ज़ोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जारी अटैचमेंट ऑर्डर के बाद ये संपत्तियां अटैच कीं।

ED ने कहा कि उसकी जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI), बेंगलुरु द्वारा अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों पर दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी।

ED ने एक बयान में कहा, "जांच से पता चला कि आयरन ओर (लौह अयस्क) के व्यापार और निर्यात में लगी अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड ने छह संपत्तियों को इक्विटेबल मॉर्गेज (बंधक) रखकर बैंक ऑफ़ इंडिया से लगभग 6 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा ली थी। बेंगलुरु के जयामहल में स्थित एक संपत्ति के बारे में गलत जानकारी दी गई थी कि वह स्वर्गीय लक्ष्मम्मा की है। मॉर्गेज बनाने के लिए बैंक को कथित तौर पर जाली खाता रिकॉर्ड, टैक्स-भुगतान रसीदें, बेटरमेंट चार्ज रसीदें और अन्य राजस्व दस्तावेज सौंपे गए थे।"

इसमें आगे कहा गया कि बैंक ऑफ़ इंडिया ने संपत्ति के बदले 3 करोड़ रुपये जारी किए। साथ ही यह भी बताया गया कि "अपराध से प्राप्त आय (Proceeds of Crime) का हिस्सा रही 1 करोड़ रुपये की राशि 13 फरवरी, 2010 को अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से कैथोलिक डायोसिस ऑफ़ बेल्लारी ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई थी।"

ED ने बताया कि बाद में इस राशि को विभिन्न HDFC म्यूचुअल फंड योजनाओं के माध्यम से निवेश और पुनर्निवेश किया गया।

एजेंसी ने कहा कि मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का पता लगाने) से यह साबित हुआ कि मूल अवैध राशि लगातार निवेश के बावजूद पहचानी जा सकती थी और अंततः HDFC बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स के रूप में सामने आई।

फेडरल एजेंसी ने कहा, "इन यूनिट्स की कीमत मूल 1 करोड़ रुपये से बढ़कर आज की तारीख में 3.31 करोड़ रुपये हो गई है; यह बढ़ोतरी अपराध से प्राप्त आय से हुई कमाई और वृद्धि का हिस्सा है।"

इससे पहले, ED ने इस साल 28 मार्च को बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) भी दायर की थी।

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