नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली में दिव्यांगजनों के लिए पुलिस थानों को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब जिले के सभी पुलिस थानों में दिव्यांग लोगों की सहायता के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक थाने में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो दिव्यांग शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को सुनने और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभालेगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों
को थाने में शिकायत दर्ज कराने या पुलिस से मदद लेने के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करना है। कई बार शारीरिक अक्षमता के कारण दिव्यांग लोगों को पुलिस स्टेशन में आवाजाही, अधिकारियों तक पहुंचने और अपनी शिकायत दर्ज कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत नोडल अधिकारी ऐसे लोगों के लिए संपर्क अधिकारी के रूप में काम करेंगे। पुलिस की योजना है कि दिव्यांग शिकायतकर्ता के थाने पहुंचने पर उसे जरूरी सहायता दी जाए और उसकी शिकायत को प्राथमिकता के साथ सुना जाए। नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि दिव्यांग व्यक्ति को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग अधिकारियों के पास न जाना पड़े। आवश्यकता के मुताबिक शिकायत दर्ज कराने और संबंधित पुलिस अधिकारी तक मामला पहुंचाने में भी मदद की जाएगी।
यह पहल पुलिस थानों को अधिक दिव्यांग-अनुकूल बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। दिल्ली पुलिस पहले से भी थानों में नागरिकों के लिए सहायता डेस्क, बैठने की व्यवस्था और बेहतर जनसुनवाई व्यवस्था पर काम कर रही है। राजधानी के सभी थानों में प्रत्येक शनिवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 'थाना दिवस-जन सुनवाई' आयोजित करने की व्यवस्था भी लागू की गई है। पूर्वी दिल्ली में नई व्यवस्था लागू होने के बाद नोडल अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्हें दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े मामलों और उनकी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि पुलिस सहायता लेने पहुंचे किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को उसकी शारीरिक स्थिति के कारण अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।
दिल्ली पुलिस की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पूर्वी जिले के डीसीपी कार्यालय का संचालन मंडावली फजलपुर पुलिस स्टेशन परिसर से होता है। दिल्ली पुलिस ने आपात स्थिति के लिए 112 हेल्पलाइन भी उपलब्ध करा रखी है। इस व्यवस्था से दिव्यांगजनों और पुलिस के बीच संवाद बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही शिकायतों के निस्तारण में जवाबदेही भी बढ़ेगी। यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो दिव्यांग लोगों के लिए थानों तक पहुंच और पुलिस सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो सकेगी।
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