अनुभवी पायलटों के बड़ी संख्या में जाने से एयर इंडिया की उड़ान सुरक्षा पर खतरा? ALPA इंडिया ने नोएल टाटा को लिखा पत्र
Delhi दिल्ली। एयर इंडिया ग्रुप से अनुभवी पायलटों के बड़ी संख्या में बाहर जाने को लेकर चिंता बढ़ गई है। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA इंडिया) ने इस मामले में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र लिखकर एयरलाइन की उड़ान सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पायलट संगठन ने कहा है कि अनुभवी कमांडरों और वरिष्ठ पायलटों के लगातार नौकरी छोड़ने से कॉकपिट में अनुभव का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिसका असर लंबे समय में उड़ान सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है। ALPA इंडिया ने अपने पत्र में पायलटों के बढ़ते इस्तीफे, थकान, बार-बार फ्लीट बदलने और कॉकपिट में घटते ‘एक्सपीरियंस ग्रेडिएंट’ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संगठन का कहना है कि अनुभवी पायलट किसी एयरलाइन के लिए केवल कर्मचारियों की संख्या का हिस्सा नहीं होते, बल्कि उनके पास वर्षों का ऑपरेशनल अनुभव और आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता होती है। ऐसे पायलटों का जाना एयरलाइन के सुरक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय हो सकता है।
अनुभवी कमांडरों के जाने पर चिंता
ALPA इंडिया के प्रेसिडेंट कैप्टन सैम थॉमस ने पत्र में कहा कि अनुभवी कमांडर और वरिष्ठ पायलट एयर इंडिया एक्सप्रेस से बाहर जा रहे हैं और ग्रुप की कुछ अन्य एयरलाइनों में भी इस तरह का रुझान देखने को मिल रहा है। संगठन ने कहा कि अनुभवी पायलटों के पास वर्षों का ऑपरेशनल ज्ञान होता है, जिसे किसी नए कर्मचारी की नियुक्ति के जरिए तुरंत पूरा नहीं किया जा सकता।
पायलट संगठन के अनुसार, वरिष्ठ पायलटों की भूमिका केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं होती। उनके अनुभव से कॉकपिट में निर्णय लेने की क्षमता, जोखिम का आकलन, असामान्य परिस्थितियों से निपटना और अपेक्षाकृत कम अनुभवी पायलटों को मार्गदर्शन देने में मदद मिलती है। कैप्टन सैम थॉमस ने इस बात पर जोर दिया कि वर्षों का ऑपरेशनल अनुभव रखने वाले पायलट महज मैनपावर शीट पर दर्ज संख्या नहीं हैं। संगठन ने उन्हें एयरलाइन की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा संपत्तियों में से एक बताया है।
‘एक्सपीरियंस ग्रेडिएंट’ को लेकर चिंता
ALPA इंडिया ने कॉकपिट में ‘एक्सपीरियंस ग्रेडिएंट’ के घटने को भी गंभीर मुद्दा बताया है। इसका मतलब कॉकपिट में मौजूद पायलटों के अनुभव के स्तर और उनके बीच वरिष्ठता के संतुलन से है। संगठन का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में अनुभवी कमांडर और वरिष्ठ पायलट एयरलाइन छोड़ते हैं और उनकी जगह अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले पायलट लेते हैं, तो कॉकपिट के सामूहिक अनुभव का स्तर प्रभावित हो सकता है। पायलट संगठन ने कहा कि इस स्थिति का आकलन केवल कर्मचारियों की कुल संख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। यह देखना भी जरूरी है कि कॉकपिट में किस स्तर का अनुभव मौजूद है और अलग-अलग फ्लीट में वरिष्ठ तथा कनिष्ठ पायलटों का अनुपात क्या है।
थकान और रोस्टरिंग पर भी सवाल
पत्र में पायलटों की थकान और रोस्टर बनाने के तरीकों को लेकर भी चिंता जताई गई है। ALPA इंडिया ने कहा है कि उड़ान संचालन में पायलटों की पर्याप्त आराम अवधि और वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया रोस्टर सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संगठन ने एयर इंडिया ग्रुप की एयरलाइनों में पायलटों की थकान से जुड़े डेटा की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। इसके साथ ही रोस्टरिंग प्रक्रिया का भी मूल्यांकन करने को कहा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पायलटों के काम के घंटे, आराम और लगातार ड्यूटी के बीच उचित संतुलन बनाया जा रहा है या नहीं।
बार-बार फ्लीट बदलने का मुद्दा
ALPA इंडिया ने पायलटों के बार-बार फ्लीट बदलने की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, पायलटों को अलग-अलग विमान फ्लीट में स्थानांतरित करने से उनके प्रशिक्षण, अनुभव और परिचालन दक्षता पर असर पड़ सकता है। पायलट संगठन चाहता है कि फ्लीट ट्रांजिशन की नीतियों और उनसे जुड़े प्रशिक्षण मानकों की भी स्वतंत्र समीक्षा की जाए। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि किसी भी बदलाव के दौरान सुरक्षा मानकों से समझौता न हो।
स्वतंत्र समीक्षा की मांग
ALPA इंडिया ने टाटा नेतृत्व से एयर इंडिया ग्रुप की एयरलाइनों में एक स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, यह समीक्षा केवल पायलटों की संख्या या इस्तीफों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि एयरलाइन के पूरे सुरक्षा और संचालन ढांचे को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। संगठन ने समीक्षा के दायरे में पायलटों के नौकरी छोड़ने की दर, वेतन और सुविधाएं, रोस्टरिंग के तरीके, थकान से जुड़े आंकड़े, ग्रेड-लेवल की निष्पक्षता, कॉकपिट में अनुभव का स्तर और फ्लीट बदलने की नीतियों को शामिल करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा प्रशिक्षण के मानकों और एयर इंडिया ग्रुप के सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम की प्रभावशीलता का भी स्वतंत्र मूल्यांकन करने की मांग की गई है।
सुरक्षा को लेकर व्यापक आकलन जरूरी
पायलट संगठन का कहना है कि एयरलाइन के विस्तार और संचालन में बदलाव के साथ सुरक्षा व्यवस्था का लगातार मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। विशेष रूप से तब, जब अनुभवी पायलटों के एयरलाइन छोड़ने का मुद्दा सामने आ रहा हो। ALPA इंडिया ने टाटा नेतृत्व से आग्रह किया है कि वह पायलटों की चिंताओं को गंभीरता से ले और स्वतंत्र समीक्षा के जरिए वास्तविक स्थिति का आकलन करे। संगठन का मानना है कि इससे न केवल पायलटों से जुड़े मुद्दों की पहचान हो सकेगी, बल्कि एयरलाइन के सुरक्षा प्रबंधन में संभावित कमजोरियों को भी समय रहते दूर किया जा सकेगा। अब निगाह इस बात पर है कि एयर इंडिया ग्रुप का नेतृत्व ALPA इंडिया की चिंताओं और स्वतंत्र समीक्षा की मांग पर क्या कदम उठाता है। पायलटों के अनुसार, अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखना और कॉकपिट में पर्याप्त अनुभव का संतुलन कायम रखना एयरलाइन की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए अहम है।