नई दिल्ली: देश के दूर-दराज और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय और कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक नई पहल शुरू की जा रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत शुक्रवार को 26 मोबाइल ई-सेवा वैन को हरी झंडी दिखाएंगे। इन वैन के जरिए लोगों को ई-कोर्ट सेवाएं, कानूनी सहायता और विवाद समाधान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और न्याय विभाग के सहयोग से शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य उन इलाकों तक न्याय व्यवस्था की पहुंच बढ़ाना है, जहां लोगों को अदालतों और कानूनी सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मोबाइल ई-सेवा वैन को एक चलते-फिरते डिजिटल कानूनी सहायता केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। इसमें नागरिकों को ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट, ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं और कानूनी सलाह जैसी सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा छोटे विवादों के समाधान और लोक अदालत से जुड़ी सेवाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा फायदा
देश के कई ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में लोगों को कानूनी जानकारी की कमी और संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मोबाइल ई-सेवा वैन ऐसे क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करेंगी। इन वैन के माध्यम से जरूरतमंद नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता, केस से पहले सलाह, दस्तावेजी सहायता और न्यायिक प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे आम लोगों और न्याय व्यवस्था के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है।
डिजिटल न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
मोबाइल ई-सेवा वैन को ई-कोर्ट परियोजना के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल माध्यम से न्याय सेवाओं को आसान बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी या इंटरनेट सुविधा की कमी के कारण ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता, उन्हें इन वैन के जरिए सहायता मिलेगी।
चरणबद्ध तरीके से होगी तैनाती
पहले चरण में 26 मोबाइल ई-सेवा वैन शुरू की जा रही हैं। इन्हें देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों के अधिकार क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से तैनात किया जाएगा। आगे चलकर इस अभियान का विस्तार किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कानूनी सुविधाएं पहुंचाई जा सकें। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न्याय को आम नागरिकों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। खासकर गरीब, ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लोगों को इससे सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
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