दिल्ली में 30% तक महंगे हुए सेब, हिमाचल से आधी रह गई सप्लाई, जानें कब मिलेगी राहत
दिल्ली में 30% तक बढ़ी कीमत; हिमाचल से कम हुई आवक
Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सेब की कीमतों में पिछले कुछ दिनों के दौरान करीब 30% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कारोबारियों के अनुसार, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह हिमाचल प्रदेश से सेब की आवक लगभग आधी रह जाना है। लगातार बारिश, भूस्खलन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से मंडियों तक पर्याप्त मात्रा में सेब नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं।
फल व्यापारियों का कहना है कि आपूर्ति कम होने और मांग बरकरार रहने के कारण आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, मौसम सामान्य होने और नई फसल की आवक बढ़ने पर राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
30% तक महंगे हुए सेब
दिल्ली की प्रमुख फल मंडियों में पिछले सप्ताह की तुलना में सेब के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है, जबकि मध्यम गुणवत्ता वाले सेब भी पहले के मुकाबले महंगे बिक रहे हैं।
खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि थोक बाजार में ही कीमतें बढ़ने से इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ा है।
हिमाचल से आधी रह गई सप्लाई
व्यापारियों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है। इससे बागानों से मंडियों तक सेब पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं।
आमतौर पर इस समय जितनी मात्रा में सेब दिल्ली पहुंचता है, फिलहाल उसकी तुलना में लगभग आधी आवक हो रही है। आपूर्ति कम होने के कारण बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी
लगातार हो रही बारिश का असर केवल परिवहन पर ही नहीं, बल्कि फलों की तुड़ाई और पैकिंग पर भी पड़ा है। कई इलाकों में बागवानों को फसल निकालने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
फल व्यापारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति सामान्य होने तक सप्लाई पूरी तरह पटरी पर लौटना मुश्किल हो सकता है।
कब मिल सकती है राहत?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौसम में सुधार होता है और सड़कें सामान्य रूप से चालू हो जाती हैं, तो अगले एक से दो सप्ताह में हिमाचल से सेब की आवक बढ़ सकती है। इसके अलावा कश्मीर और अन्य उत्पादक क्षेत्रों से नई खेप आने पर बाजार में आपूर्ति बेहतर होगी, जिससे कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना है।
हालांकि, यदि बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनी रहती है, तो महंगे सेब से उपभोक्ताओं को कुछ समय और जूझना पड़ सकता है।
बागवानों और व्यापारियों पर भी असर
आपूर्ति बाधित होने से जहां उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं, वहीं बागवान और व्यापारी भी परिवहन लागत और देरी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई ट्रकों के समय पर मंडियों तक नहीं पहुंचने से कारोबार प्रभावित हुआ है।