AI से बनाया गया गौरव भाटिया का कथित बयान, CJP नेताओं की पोस्ट पर दिल्ली HC नाराज
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की ओर से दाखिल मानहानि याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। मामला सोशल मीडिया पर उनके नाम से कथित तौर पर ऐसे बयान प्रसारित किए जाने से जुड़ा है, जिन्हें भाटिया ने अपना बयान मानने से इनकार किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने CJP नेताओं की कुछ पोस्ट को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित पोस्ट हटाने का सुझाव दिया।
क्या है पूरा मामला..?
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ गौरव भाटिया की ओर से दायर मानहानि मामले से जुड़ा है।
भाटिया ने पांच सितंबर को सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई पोस्ट पर आपत्ति जताई है। यह पोस्ट CJP से जुड़े एक किशोर प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद की गई थी।
भाटिया की याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित पोस्ट AI की मदद से तैयार की गई थी। इसमें कथित तौर पर भाटिया के नाम से यह बात कही गई कि उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सली’ और ‘जातिवादी’ बताया था। भाटिया का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था।
भाटिया ने क्या आरोप लगाया?
याचिका में गौरव भाटिया ने कहा है कि दास और रांका ने उनके किसी वास्तविक बयान पर टिप्पणी या उसकी आलोचना नहीं की, बल्कि कथित रूप से जनता के सामने यह गलत धारणा पेश की कि उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उनका आरोप है कि किसी व्यक्ति के नाम से ऐसा बयान प्रसारित करना, जो उसने वास्तव में दिया ही नहीं, उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का रुख किया है।
सुनवाई में अभिजीत दिपके का नाम भी उठा
सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने मौखिक रूप से कहा कि अभिजीत दिपके के खिलाफ याचिका में कोई आरोप नहीं लगाया गया है। इसके बाद दिपके की ओर से पेश वकील नकुल गांधी ने अदालत से उनका नाम मामले में पक्षकारों की सूची से हटाने का अनुरोध किया।
वहीं सौरव दास की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित ट्वीट पहले ही हटा दिया गया है। इसके बाद अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इससे जुड़ी अन्य सामग्री भी पोस्ट की गई है।
अदालत ने क्या कहा..?
अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि संबंधित लोगों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन अपनी बात को स्पष्ट और बेहतर तरीके से रखना भी जरूरी है, ताकि उसका वास्तविक उद्देश्य ठीक से सामने आए।
अदालत ने गौरव भाटिया से भी कहा कि इस मामले को अदालत तक लाने के बजाय विवाद को संभालने के दूसरे तरीके मौजूद थे। कोर्ट ने सुझाव दिया कि भाटिया संबंधित लोगों से सीधे बातचीत कर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर सकते थे।
इस दौरान अदालत ने CJP नेताओं को संबंधित पोस्ट हटाने का सुझाव भी दिया। हालांकि, यह मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट हटाने तक सीमित नहीं है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि किसी व्यक्ति के नाम से ऐसा कथित बयान प्रसारित करना, जो उसने दिया ही नहीं, मानहानि के दायरे में आता है या नहीं।
आगे क्या होगा..?
फिलहाल मामले में अदालत की ओर से अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। सुनवाई के दौरान सामने आए बयानों और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह मामला सोशल मीडिया पर AI से तैयार सामग्री और किसी सार्वजनिक व्यक्ति के नाम से कथित तौर पर गलत बयान प्रसारित करने के सवाल को भी सामने लाता है। अदालत की आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि इस तरह की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कानूनी जिम्मेदारी किस तरह तय की जाती है।