नई दिल्ली। भारत के परमाणु हथियारों के जखीरे को लेकर अमेरिका के एक गैर-लाभकारी नीति शोध संस्थान ने नया अनुमान जारी किया है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स यानी FAS के न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत ने लगभग 190 परमाणु वॉरहेड तैयार किए होंगे। इनमें 160 से अधिक वॉरहेड मौजूदा परिचालन प्रणालियों के लिए और करीब 30 अतिरिक्त वॉरहेड निर्माणाधीन नई मिसाइल प्रणालियों के लिए माने गए हैं।

यह संख्या भारत सरकार द्वारा जारी कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। भारत अपने परमाणु हथियारों की कुल संख्या सार्वजनिक नहीं करता। इसलिए FAS का आकलन सरकारी बयानों, सार्वजनिक दस्तावेजों, बजट संबंधी सूचनाओं, सैन्य आयोजनों, मीडिया रिपोर्ट, उद्योग से जुड़े प्रकाशनों और व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण पर आधारित है। संस्था ने स्वयं स्वीकार किया है कि सीमित सार्वजनिक जानकारी के कारण इन अनुमानों में अनिश्चितता बनी रहती है।

‘इंडियन न्यूक्लियर वेपन्स 2026’ शीर्षक से प्रकाशित अध्ययन को हैंस एम. क्रिस्टेंसन, मैट कोर्डा, एलियाना जॉन्स और मैकेंजी नाइट-बॉयल ने तैयार किया है। यह अध्ययन बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के ‘न्यूक्लियर नोटबुक’ में प्रकाशित हुआ है। क्रिस्टेंसन FAS के न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हैं जबकि अन्य लेखक भी इसी परियोजना से जुड़े शोधकर्ता हैं।

मूल अध्ययन के अनुसार भारत अपनी परमाणु हथियार प्रणाली का लगातार आधुनिकीकरण कर रहा है। हाल के वर्षों में कुछ नई हथियार प्रणालियां शामिल की गई हैं जबकि कई अन्य विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। इनका उद्देश्य पुरानी परमाणु क्षमता वाली हवाई, जमीन और समुद्र आधारित प्रणालियों को बदलना अथवा उनके साथ नई क्षमताएं जोड़ना बताया गया है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत की मौजूदा परिचालन प्रणालियां 160 से अधिक परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम हो सकती हैं। निर्माणाधीन मिसाइलों के लिए बनाए गए अतिरिक्त हथियारों को जोड़ने पर कुल अनुमानित संख्या 190 तक पहुंचती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नई हथियार प्रणालियों के विकास के कारण भविष्य में इस भंडार में और वृद्धि हो सकती है।

FAS ने परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की उपलब्धता के आधार पर भी संभावित संख्या का आकलन किया है। संस्था के मुताबिक भारत ने इतनी सैन्य श्रेणी की प्लूटोनियम सामग्री तैयार की हो सकती है जो अलग-अलग अनुमानों के अनुसार लगभग 140 से 225 वॉरहेड बनाने के लिए पर्याप्त हो। इसका अर्थ यह नहीं है कि इस पूरी सामग्री को हथियारों में परिवर्तित कर लिया गया है। इसमें से कुछ सामग्री सुरक्षित भंडार में भी रखी जा सकती है।

रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुल संख्या का अनुमान लगाना इसलिए भी कठिन है क्योंकि भारत द्वारा विकसित वॉरहेड डिजाइन और प्रत्येक हथियार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मात्रा की पुष्टि नहीं की जा सकती। अलग-अलग डिजाइन में विखंडनीय सामग्री की आवश्यकता अलग होती है। इसलिए उपलब्ध सामग्री को सीधे वॉरहेड की सटीक संख्या में बदलकर देखना उचित नहीं होगा।

विश्लेषकों ने कहा कि भारत की परमाणु क्षमता का अनुमान उसके हथियार पहुंचाने वाले माध्यमों से भी लगाया जाता है। इनमें परमाणु भूमिका निभाने में सक्षम विमान और जमीन तथा समुद्र से छोड़ी जाने वाली मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं। अध्ययन का अनुमान है कि भारत वर्तमान में नौ प्रकार की परमाणु क्षमता वाली प्रणालियों का संचालन कर रहा है। कम से कम दो अन्य प्रणालियां विकास के उन्नत चरण में बताई गई हैं।

भारत अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों में विकसित कर रहा है। इसे परमाणु त्रिकोण या न्यूक्लियर ट्रायड कहा जाता है। समुद्र आधारित क्षमता को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह किसी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि भारत की वास्तविक तैनाती, तैयारियों और संचालन संबंधी अधिकांश जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

FAS की रिपोर्ट के अनुसार भारत की परमाणु रणनीति का ऐतिहासिक केंद्र पाकिस्तान रहा है लेकिन लंबी दूरी की नई मिसाइलों के विकास ने चीन से जुड़ी रणनीतिक आवश्यकताओं का महत्व बढ़ाया है। संस्था का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की नई प्रणालियां लंबी दूरी और अधिक सुरक्षित जवाबी क्षमता पर केंद्रित रह सकती हैं। यह विश्लेषण भी सार्वजनिक जानकारियों पर आधारित अनुमान है।

भारत लंबे समय से परमाणु हथियारों के ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ करने की नीति की बात करता रहा है। इस नीति का सामान्य अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का उपयोग पहले नहीं करेगा लेकिन परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई करेगा। परमाणु सिद्धांत में समय-समय पर दिए गए राजनीतिक बयानों के कारण चर्चा होती रही है लेकिन औपचारिक नीति में परिवर्तन की कोई नई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट में अपनाई गई कार्यप्रणाली के अनुसार प्रत्येक जानकारी को संभव होने पर कई अलग स्रोतों से मिलाया गया। सैन्य प्रतिष्ठानों में निर्माण गतिविधियों और संभावित प्रणालियों की पहचान करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लिया गया। इसके बावजूद लेखकों ने अपने निष्कर्षों को निश्चित संख्या के बजाय अनुमान के रूप में प्रस्तुत किया है।

यह सावधानी महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु हथियारों की संख्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। भारत की ओर से आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं होने के कारण FAS, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट और दूसरी संस्थाएं अलग कार्यप्रणालियों से अनुमान लगाती हैं। इनके आंकड़ों में समय और पद्धति के आधार पर अंतर हो सकता है।

FAS के नए अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष यह है कि भारत का परमाणु जखीरा केवल संख्या में बढ़ने की संभावना नहीं रखता बल्कि उसकी संरचना भी बदल रही है। नई मिसाइलों, समुद्र आधारित प्रणालियों और तकनीकी आधुनिकीकरण के कारण देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता अधिक विविध हो रही है। फिर भी 190 वॉरहेड का आंकड़ा स्वतंत्र शोधकर्ताओं का अनुमान है और इसे भारत की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

 

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