नई दिल्ली। धोखाधड़ी और स्पूफिंग के एक मामले में एक दशक से अधिक समय से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत वापस भेज दिया गया है। भारत पहुंचते ही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने गुरुवार को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी की वापसी के लिए इंटरपोल और अमेरिकी अधिकारियों के माध्यम से लंबे समय से समन्वय किया जा रहा था।

CBI के प्रवक्ता के अनुसार हरनेक सिंह बुधवार को अमेरिका से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। पहले से सतर्क जांच एजेंसी की टीम ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे एयरपोर्ट पर ही अपनी हिरासत में ले लिया। आरोपी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस के साथ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। इसी कारण उसके भारत पहुंचते ही उसकी पहचान कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।

हरनेक सिंह धोखाधड़ी और स्पूफिंग से जुड़े मामले में कथित रूप से वांछित था। आरोप है कि वह मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए लंबे समय से विदेश में रह रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी को पकड़ने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाई गईं। उसके अमेरिका में होने की जानकारी मिलने के बाद CBI ने इंटरपोल के माध्यम से वहां की संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया था।

अमेरिकी अधिकारियों के सहयोग से हरनेक सिंह को वापस भारत भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके बाद उसे बुधवार को भारत लाया गया। CBI ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग से फरार आरोपियों को वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना है। हालांकि एजेंसी की ओर से धोखाधड़ी की राशि, पीड़ितों की संख्या और स्पूफिंग के तरीके के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

CBI प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी को जल्द ही हरियाणा के पंचकूला स्थित स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत के समक्ष आरोपी की गिरफ्तारी और मामले से जुड़ी जानकारी रखी जाएगी। जांच एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए उसकी हिरासत मांग सकती है। हिरासत और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला अदालत करेगी।

आरोपी से पूछताछ के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि वह इतने वर्षों तक किन स्थानों पर रहा और विदेश में रहते हुए उसने अपनी पहचान तथा गतिविधियों को किस तरह छिपाया। इसके अलावा मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं इस पहलू को भी देखा जा सकता है। हालांकि जांच के इन बिंदुओं पर CBI की ओर से अभी कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है।

इंटरपोल रेड नोटिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित व्यक्ति का पता लगाने और संबंधित देश की कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी अस्थायी गिरफ्तारी में सहयोग के लिए जारी किया जाता है। यह अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला भारत की अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

इसी तरह लुकआउट सर्कुलर का इस्तेमाल देश में प्रवेश करने या देश से बाहर जाने वाले वांछित व्यक्ति की पहचान के लिए किया जाता है। इसके जारी होने पर हवाई अड्डों और दूसरे आव्रजन केंद्रों को सतर्क कर दिया जाता है। हरनेक सिंह के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर होने के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसके पहुंचने की जानकारी तत्काल संबंधित जांच एजेंसी तक पहुंची।

CBI भारत में इंटरपोल की राष्ट्रीय केंद्रीय इकाई के रूप में भी काम करती है। विदेश में छिपे किसी आरोपी का पता लगाने और उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए एजेंसी संबंधित राज्य या केंद्रीय जांच संस्था की मांग पर इंटरपोल के माध्यम से दूसरे देश से संपर्क करती है। इसके बाद उस देश के कानून और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नियमों के अनुरूप आरोपी की गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण या निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

हरनेक सिंह के मामले में अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद उसे भारत भेजा गया है। अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को निर्वासन बताया है। निर्वासन और प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं। निर्वासन में कोई देश अपने आव्रजन या स्थानीय कानून के आधार पर व्यक्ति को वापस भेजता है जबकि प्रत्यर्पण आमतौर पर न्यायिक और राजनयिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

आरोपी की गिरफ्तारी से अब करीब एक दशक से लंबित मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। जांच एजेंसी उससे पूछताछ कर पुराने मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन कर सकती है। इतने लंबे समय के बाद गिरफ्तारी होने के कारण पुराने दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

CBI यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि आरोपी ने भारत छोड़ने के बाद किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और वह अमेरिका तक कैसे पहुंचा। यदि पूछताछ या दस्तावेजों की जांच में किसी अन्य अपराध अथवा सहयोगी की भूमिका सामने आती है तो एजेंसी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जांच एजेंसी अब आरोपी को पंचकूला की विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है। अदालत में पेशी के बाद उसके रिमांड पर फैसला होगा। जांच पूरी होने और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखे जाने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता पर कानूनी निर्णय होगा। आरोपी को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने तक कानून की नजर में निर्दोष माना जाएगा।

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