Delhi दिल्ली: कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस मामले में AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान शोएब जमई ने कहा कि यह बेहद दुखद मामला है। उन्होंने दावा किया कि दंगों के दौरान ताहिर हुसैन की छत पर मौजूद एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वह पुलिस से फोन पर मदद की गुहार लगा रहे थे। उनके अनुसार, इस मामले में दंगा पीड़ितों को ही आरोपी बना दिया गया, जबकि असली दोषी अब भी खुले घूम रहे हैं। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया।
AIMIM नेता ने कहा कि निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाए जा सकते हैं और अंतिम निर्णय के लिए उच्च न्यायालय का रास्ता खुला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन के खिलाफ दो गवाहों की गवाही के आधार पर फैसला सुनाया गया, जबकि उनका दावा है कि दोनों गवाह घटना स्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर रहते थे।
शोएब जमई ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अधिकार है और यदि किसी पक्ष को फैसले पर आपत्ति है तो वह उच्च अदालत में अपील कर सकता है। गौरतलब है कि कड़कड़डूमा कोर्ट ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया उच्च न्यायालय में अपील के माध्यम से जारी रह सकती है।
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