नई दिल्ली : कर्मचारी पेंशन योजना 1995 यानी EPS-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ने की उम्मीद लगाए लाखों पेंशनर्स को फिलहाल राहत नहीं मिली है। पेंशनर्स लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने और इसके साथ महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा 10 अगस्त को लोकसभा में भी उठाया गया, लेकिन सरकार ने पेंशन बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की। मौजूदा व्यवस्था के तहत न्यूनतम पेंशन अभी 1,000 रुपये प्रति माह ही रहेगी।
महंगाई और दवा, भोजन, किराया तथा दूसरी आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते खर्च को देखते हुए पेंशनर्स का कहना है कि 1,000 रुपये की राशि में दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि किसी फैसले से पहले पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति और भविष्य की देनदारियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
 लोकसभा में पूछा गया था सवाल
लोकसभा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सरकार से पूछा था कि क्या EPS-1995 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की योजना है। उन्होंने योजना के तहत पेंशन पाने वाले लोगों और उच्च वेतन पर पेंशन के पात्र लाभार्थियों की जानकारी भी मांगी थी।
जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि सरकार फिलहाल EPS पेंशनर्स को 1,000 रुपये की न्यूनतम मासिक पेंशन उपलब्ध करा रही है। इसे सुनिश्चित करने के लिए केंद्र की ओर से बजटीय सहायता भी दी जाती है। हालांकि, सरकार के जवाब में पेंशन को 7,500 रुपये करने या बढ़ोतरी की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई।
 ₹7,500 अभी केवल पेंशनर्स की मांग
EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति लगातार न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग उठा रही है। समिति से जुड़े पेंशनर्स ने पांच अगस्त को नई दिल्ली में प्रदर्शन भी किया था। उनकी प्रमुख मांग न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये प्रति माह करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की है।
सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि 7,500 रुपये अभी केवल पेंशनर्स की मांग है। इसे नई न्यूनतम पेंशन के रूप में मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले ऐसे दावों को आधिकारिक घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
 कैसे तैयार होता है पेंशन फंड
EPS के पेंशन फंड में नियोक्ता की ओर से कर्मचारी के वेतन का 8.33 प्रतिशत योगदान किया जाता है। केंद्र सरकार की ओर से भी 1.16 प्रतिशत योगदान दिया जाता है। इन दोनों योगदान पर 15,000 रुपये की मासिक वेतन सीमा लागू है।
सरकार के मुताबिक, योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ पेंशन फंड में उपलब्ध राशि से दिए जाते हैं। EPS-1995 के प्रावधानों के अनुसार फंड का वार्षिक मूल्यांकन भी किया जाता है। न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये बनाए रखने के लिए केंद्र अपनी नियमित हिस्सेदारी के अतिरिक्त बजटीय सहायता देता है।
85 लाख से ज्यादा पेंशनर्स
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक EPS के तहत 85,84,604 पेंशनर्स को हर महीने पेंशन मिल रही थी। इसी अवधि तक योजना के अंतर्गत कुल 15,819.28 करोड़ रुपये की पेंशन राशि वितरित की गई थी।
लाभार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए न्यूनतम पेंशन में छह हजार रुपये से अधिक की वृद्धि करने पर सरकार का वित्तीय बोझ काफी बढ़ सकता है। सरकार के सामने पेंशनर्स को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा देने और फंड को लंबे समय तक वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने की चुनौती है।
 उच्च वेतन पर पेंशन की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने चार नवंबर 2022 के फैसले में पात्र कर्मचारियों को निर्धारित वेतन सीमा से अधिक वास्तविक बेसिक सैलरी पर पेंशन का विकल्प चुनने की अनुमति दी थी। इसके बाद EPFO ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं को संयुक्त विकल्प जमा करने का अवसर दिया।
सरकार के अनुसार, फैसले के बाद सेवानिवृत्त पात्र आवेदकों के लिए उच्च वेतन पर पेंशन से संबंधित 1,49,806 पेंशन भुगतान आदेश जारी किए जा चुके हैं। फिलहाल EPS-95 की न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये ही प्रभावी है। इसमें किसी बदलाव के लिए पेंशनर्स को सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
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