टाटा स्टील के 20 पुराने शेयर मिलने पर फिनफ्लुएंसर का सवाल कैसे करें डीमैट
पुराने कागजी शेयर मिले फिनफ्लुएंसर ने पूछा इन्हें डीमैट में कैसे बदलें
सोशल मीडिया पर एक फिनफ्लुएंसर की पोस्ट ने निवेशकों का ध्यान खींचा, जिसमें उन्होंने 1992 में खरीदे गए टाटा स्टील के 20 शेयर मिलने की जानकारी साझा की। दशकों पुराने इन शेयरों के कागजी प्रमाणपत्र मिलने के बाद उन्होंने पूछा कि इन्हें अब डीमैट अकाउंट में कैसे ट्रांसफर या डीमैटेरियलाइज़ कराया जा सकता है।
पुराने शेयर सर्टिफिकेट आज भी कई निवेशकों के पास मौजूद हैं। खासकर 1990 के दशक में खरीदे गए शेयरों के मामले में निवेशकों को अक्सर कागजी प्रमाणपत्र, पुराने पते, नाम में बदलाव या कंपनी के कॉरपोरेट एक्शन से जुड़े रिकॉर्ड संभालने पड़ते हैं। ऐसे शेयरों को मौजूदा डिजिटल सिस्टम में लाने के लिए Dematerialisation यानी डीमैटेरियलाइज़ेशन की प्रक्रिया अपनानी होती है।
डीमैटेरियलाइज़ेशन का मतलब कागजी शेयर प्रमाणपत्र को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलना है। इसके लिए निवेशक को आम तौर पर अपने Depository Participant (DP) के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होती है। DP बैंक या स्टॉकब्रोकर जैसी संस्था हो सकती है, जो NSDL या CDSL जैसे डिपॉजिटरी सिस्टम से जुड़ी होती है।
पुराने शेयरों के मामले में सबसे पहले यह जांचना जरूरी होता है कि शेयर प्रमाणपत्र पर दर्ज नाम और निवेशक के मौजूदा दस्तावेजों में जानकारी समान है या नहीं। यदि नाम, पता या अन्य विवरण में अंतर है, तो पहले संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।
इसके अलावा, अगर कंपनी ने वर्षों के दौरान बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट, मर्जर या अन्य कॉरपोरेट एक्शन किए हैं, तो पुराने शेयरों की मौजूदा संख्या और पात्रता की भी जांच करनी पड़ सकती है। इसी वजह से 1992 जैसे पुराने निवेश की मौजूदा स्थिति केवल मूल शेयरों की संख्या देखकर तय नहीं की जा सकती।
फिनफ्लुएंसर का सवाल इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि पुराने कागजी शेयर आज के डिजिटल निवेश दौर की तुलना में एक अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। कई निवेशकों के पास वर्षों पुराने प्रमाणपत्र हैं, लेकिन उन्हें डीमैट में बदलने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती।
निवेशकों के लिए संदेश: पुराने शेयर सर्टिफिकेट मिलने पर उन्हें फेंकने या बिना जांचे किसी को सौंपने के बजाय पहले प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता, शेयरधारक का नाम और संबंधित कंपनी/रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। इसके बाद अपने DP के माध्यम से डीमैट प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।