धर्म-अध्यात्म

Surya Namaskar: सुबह सूर्य नमस्कार के 12 आसन देंगे 10 गुना फायदा

Sarita
12 Dec 2025 8:42 AM IST
Surya Namaskar: सुबह सूर्य नमस्कार के 12 आसन देंगे 10 गुना फायदा
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Surya Namaskar: सूर्य नमस्कार शरीर, मन और प्राण को संतुलित करने वाली प्राचीन विद्या है। 12 आसनों की यह श्रृंखला सुबह की धूप की तरह है जो धीरे-धीरे फैलती है, भीतर तक गर्माहट भरती है और हर हिस्से को नई ऊर्जा से जगाती है। जो लोग योग की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए सूर्य नमस्कार सबसे संपूर्ण, सबसे सरल और सबसे कारगर अभ्यास माना गया है सूर्य नमस्कार के 12 पारंपरिक आसनों के बारे में, उनके फायदे और अभ्यास के तरीके पर संपूर्ण जानकारी दी गई है। इस एक आसन के नियमित अभ्यास की आदत बना ली तो आपको किसी और योग या व्यायाम की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर मानसिक सेहत तक पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
सूर्य नमस्कार के 12 आसन
1 स्टेप- प्रणामासन
2 स्टेप- हस्त उत्तानासन
3 स्टेप- हस्तपादासन
4 स्टेप- अश्व संचालनासन
5 स्टेप- दंडासन
6 स्टेप- अष्टांग नमस्कार
7 स्टेप- भुजंगासन
8 स्टेप- पर्वतासन
9 स्टेप- अधोमुख श्वानासन
10 स्टेप- अश्व संचालनासन
11 स्टेप- पदहस्तासन
12 स्टेप- ताड़ासन
प्रणामासन :
इस आसन में शरीर प्रणाम की मुद्रा में होता है। इसके लिए सीधा खड़े होकर अपने पैरों को पास रखते हुए हाथों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ना चाहिए। प्रणामासन के अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और शांति बढ़ती है। शरीर को अभ्यास के लिए तैयार करता है और संतुलन व स्थिरता बढ़ाता है। प्रणामासन के अभ्यास के लिए दोनों पंजे जोड़कर सीधे खड़े होकर छाती को फुलाएं और कंधे ढीले रखें। फिर श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएं। अब श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ें और छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएं
हस्त उत्तानासन:
यह आसन पीठ और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, रीढ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर में खिंचाव से रक्त संचार तेज होता है। इसके अभ्यास के लिए हाथों को ऊपर उठाते हुए पीछे की ओर झुकें और कमर को भी पीछे की ओर मोड़ें। इस आसन के अभ्यास के लिए श्वास लेते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं। ऊपरी धड़ और सिर के पीछे की तरफ हल्का कर्व बनाएं। अब हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को पीछे की ओर मोड़ें। इस मुद्रा में 20 सेकंड रहे और वापस प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
हस्त पादासन :
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और हैमस्ट्रिंग्स को खींचता है। इस आसन से पाचन मजबूत, कमर व जांघ की जकड़न दूर और दिमाग पर ठंडा प्रभाव डालता है, जिसे तनाव कम होता है। सूर्य नमस्कार के तीसरे अभ्यास के लिए सांस भीतर खींचते हुए कमर को मोड़कर आगे की ओर झुकें। फिर हिप्स को ऊपर उठाते हुए हाथों को पंजे के बगल में जमीन पर रखें। सीना पैर को छूता रहे और सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए टांगों के बीच से झांकते रहें। 10-30 सेकेंड इसी अवस्था में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
अश्व संचालनासन:
इस आसन का अभ्यास कूल्हों की जकड़न कम करता है। पैरों और रीढ़ को स्थिरता देता है, एकाग्रता बढ़ाता है और हिप्स व पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। अश्व संचालनासन के अभ्यास के लिए घुटनों के बल खड़े होकर दाएं पैर को आगे लाकर जमीन पर रखें। दाएं पैर को जितना हो सके आगे रखें और घुटने से 90 डिग्री का कोण बनाएं। अब बाएं पैर के घुटनों और पंजों को जमीन पर रखें और थोड़ा आगे झुकें। थोड़ा-थोड़ा आगे झुकते हुए दोनों हाथों को दाएं पैर के पास रखें और सामने देखें।
दंडासन:
दंडासन के अभ्यास का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह संपूर्ण शरीर को मजबूत बनाता है। इससे पूरे शरीर की मांसपेशियाँ सक्रिय, बांहों और कंधों में ताकत व शरीर की संपूर्ण प्रणाली सक्रिय होती है। अभ्यास के लिए सीधे बैठकर दोनों पैरों को आगे की ओर फैलाते हुए आपस में चिपकाएं। पैरों की उंगलियों को शरीर की ओर खींचते हुए हाथों को सीधा और हथेलियों को फर्श पर रखें। गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए छाती को उठाएं। कंधों पर खिंचाव लाते हुए सामने की ओर देखें और गहरी सांस लें।
अष्टांग नमस्कार:
कंधों, भुजाओं और छाती को मजबूत बनाने के लिए अष्टांग नमस्कार का नियमित अभ्यास कर सकते हैं। इससे छाती, कंधे और ट्राइसेप्स मजबूत होते हैं। यह पीठ लचीली बनाता है और हृदय क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर दोनों हाथों को पसलियों के पास लाएं और गहरी सांस बाहर की तरफ छोड़ें। हथेलियों के बल ऊपर उठने की कोशिश करते हुए पैर, घुटने, ठोड़ी से जमीन को छूते रहें। अन्य सभी अंग हवा में उठाएं, हिप्स और पेट को हल्का ऊपर उठाएं। अभ्यास के दौरान श्वास रोककर रखें और सांस खींचते हुए सामान्य हो जाएं।

भुजंगासन :

इस आसन से वजन कम होता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत और थकान कम करके शरीर को लचीला बनाता है। इसके अभ्यास से पीठ दर्द में राहत मिलती है। फेफड़ों और हृदय का विस्तार होता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल सीधा लेटकर पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। हाथों को छाती के पास ले जाते हुए हथेलियों को नीचे टिकाएं। फिर गहरी सांस लेते हुए नाभि को ऊपर उठाएं और आसमान की तरफ देखें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहने के बाद पुरानी स्थिति में आ जाएं।

पर्वतासन:

यह आसन शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। फेफड़ों और ब्लड सर्कुलेशन के लिए अच्छा है। हैमस्ट्रिंग और काफ मसल्स मजबूत बनाता है। इसके अभ्यास से शरीर से थकान बाहर निकलती है और रक्तसंचार सिर की ओर होता है, जिससे मस्तिष्क शांत और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अभ्यास के लिए पैरों को सामने फैलाकर हाथों को शरीर के बगल में रखते हुए दाहिने पैर को बाईं जांघ पर रखें। बायां पैर दाईं जांघ पर रखते हुए कुछ सेकेंड गहरी सांस लें और नमस्कार की मुद्रा में हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाएं। हिप्स को जमीन पर और हाथों को ऊपर की ओर खींचे। कुछ सेकेंड इसी मुद्रा में रहते हुए धीरे धीरे प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।

अधोमुख श्वानासन:

यह आसन शरीर को तनावमुक्त करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। इससे शरीर मजबूत और लचीला बनता है। साथ ही तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। पेट के बल लेटकर सांस खींचते हुए पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं। कोहनी और घुटनों को सख्त रखते हुए हिप्स को ऊपर उठाएं और शरीर को उल्टे V का आकार दें। हाथों से जमीन पर दबाव देते हुए दृष्टि को नाभि पर केंद्रित करें। कुछ सेकेंड रुकने के बाद घुटने जमीन पर टिका दें और मेज जैसी स्थिति में फिर से वापस आ जाएं।

अश्व संचालासन दूसरी ओर:

पहले सेट की तरह ही अश्व संचालासन को भी दोहराया जाएगा लेकिन पहली बार में आपने दाएं पैर को आगे करके बाएं घुटने को मोड़ा था। इस बार बाएं पैर को आगे लाना है और दाएं पैर को पीछे रखते हुए, हाथों को फर्श पर टिकाना है। अभ्यास के लिए घुटनों के बल खड़े होकर दाएं पैर को आगे लाकर जमीन पर रखें। फिर दाएं पैर को जितना हो सके आगे रखें और घुटने से 90 डिग्री का कोण बनाएं। बाएं पैर के घुटनों और पंजों को जमीन पर रखें और थोड़ा आगे झुकें। थोड़ा-थोड़ा आगे झुकते हुए दोनों हाथों को दाएं पैर के पास रखें और सामने देखें।

हस्तपादासन:

सूर्य नमस्कार के दौरान हस्तपादासन को दोहराना होता लेकिन दूसरी ओर से। इसमें श्वास को छोड़ते हुए बाएं पैर को आगे लाकर अपने हाथों को पैरों के पास फर्श पर रखा जाता है। हस्तपादासन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली और हैमस्ट्रिंग्स को खिंचाव मिलता है। इस आसन के अभ्यास के लिए सांस भीतर खींचते हुए कमर को मोड़कर आगे की ओर झुकें। हिप्स को ऊपर उठाते हुए हाथों को पंजे के बगल में जमीन पर रखें। सीना पैर को छूता रहे और सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए टांगों के बीच से झांकते रहें। 10-30 सेकेंड इसी अवस्था में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

ताड़ासन:

ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए शरीर को सीधा रखकर हाथों को नीचे लाना होता है। इस दौरान श्वास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस आसन का अभ्यास से मानसिक शांति और संतुलन को बढ़ाने में सहायक है। हाथ को शरीर के बगल में रखकर सीधे खड़े हो जाएं। अब हाथों को सिर के ऊपर रखते हुए एड़ियों को ऊपर उठाएं। जितना हो सके शरीर को स्ट्रेच करें। कुछ देर इसी स्थिति में रुके, फिर सांस छोड़ते हुए पुरानी स्थिति में आ जाएं।

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