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Surya Namaskar: सुबह सूर्य नमस्कार के 12 आसन देंगे 10 गुना फायदा

भुजंगासन :
इस आसन से वजन कम होता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत और थकान कम करके शरीर को लचीला बनाता है। इसके अभ्यास से पीठ दर्द में राहत मिलती है। फेफड़ों और हृदय का विस्तार होता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल सीधा लेटकर पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। हाथों को छाती के पास ले जाते हुए हथेलियों को नीचे टिकाएं। फिर गहरी सांस लेते हुए नाभि को ऊपर उठाएं और आसमान की तरफ देखें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहने के बाद पुरानी स्थिति में आ जाएं।
पर्वतासन:
यह आसन शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। फेफड़ों और ब्लड सर्कुलेशन के लिए अच्छा है। हैमस्ट्रिंग और काफ मसल्स मजबूत बनाता है। इसके अभ्यास से शरीर से थकान बाहर निकलती है और रक्तसंचार सिर की ओर होता है, जिससे मस्तिष्क शांत और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अभ्यास के लिए पैरों को सामने फैलाकर हाथों को शरीर के बगल में रखते हुए दाहिने पैर को बाईं जांघ पर रखें। बायां पैर दाईं जांघ पर रखते हुए कुछ सेकेंड गहरी सांस लें और नमस्कार की मुद्रा में हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाएं। हिप्स को जमीन पर और हाथों को ऊपर की ओर खींचे। कुछ सेकेंड इसी मुद्रा में रहते हुए धीरे धीरे प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।
अधोमुख श्वानासन:
यह आसन शरीर को तनावमुक्त करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। इससे शरीर मजबूत और लचीला बनता है। साथ ही तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। पेट के बल लेटकर सांस खींचते हुए पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं। कोहनी और घुटनों को सख्त रखते हुए हिप्स को ऊपर उठाएं और शरीर को उल्टे V का आकार दें। हाथों से जमीन पर दबाव देते हुए दृष्टि को नाभि पर केंद्रित करें। कुछ सेकेंड रुकने के बाद घुटने जमीन पर टिका दें और मेज जैसी स्थिति में फिर से वापस आ जाएं।
अश्व संचालासन दूसरी ओर:
पहले सेट की तरह ही अश्व संचालासन को भी दोहराया जाएगा लेकिन पहली बार में आपने दाएं पैर को आगे करके बाएं घुटने को मोड़ा था। इस बार बाएं पैर को आगे लाना है और दाएं पैर को पीछे रखते हुए, हाथों को फर्श पर टिकाना है। अभ्यास के लिए घुटनों के बल खड़े होकर दाएं पैर को आगे लाकर जमीन पर रखें। फिर दाएं पैर को जितना हो सके आगे रखें और घुटने से 90 डिग्री का कोण बनाएं। बाएं पैर के घुटनों और पंजों को जमीन पर रखें और थोड़ा आगे झुकें। थोड़ा-थोड़ा आगे झुकते हुए दोनों हाथों को दाएं पैर के पास रखें और सामने देखें।
हस्तपादासन:
सूर्य नमस्कार के दौरान हस्तपादासन को दोहराना होता लेकिन दूसरी ओर से। इसमें श्वास को छोड़ते हुए बाएं पैर को आगे लाकर अपने हाथों को पैरों के पास फर्श पर रखा जाता है। हस्तपादासन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली और हैमस्ट्रिंग्स को खिंचाव मिलता है। इस आसन के अभ्यास के लिए सांस भीतर खींचते हुए कमर को मोड़कर आगे की ओर झुकें। हिप्स को ऊपर उठाते हुए हाथों को पंजे के बगल में जमीन पर रखें। सीना पैर को छूता रहे और सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए टांगों के बीच से झांकते रहें। 10-30 सेकेंड इसी अवस्था में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए शरीर को सीधा रखकर हाथों को नीचे लाना होता है। इस दौरान श्वास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस आसन का अभ्यास से मानसिक शांति और संतुलन को बढ़ाने में सहायक है। हाथ को शरीर के बगल में रखकर सीधे खड़े हो जाएं। अब हाथों को सिर के ऊपर रखते हुए एड़ियों को ऊपर उठाएं। जितना हो सके शरीर को स्ट्रेच करें। कुछ देर इसी स्थिति में रुके, फिर सांस छोड़ते हुए पुरानी स्थिति में आ जाएं।





