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आईजीएमसी में पांच दिन से रूटीन जांच ठप, मरीज परेशान

Shantanu Roy
4 April 2026 4:24 PM IST
आईजीएमसी में पांच दिन से रूटीन जांच ठप, मरीज परेशान
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शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और अस्पताल में बीते पांच दिनों से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार, 30 मार्च से सरकारी लैब में बायोकेमिस्ट्री की रूटीन जांचें बंद हैं, जिससे मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित जांचों में लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, शुगर, यूरिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं।
हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए आईजीएमसी पहुंचते हैं, लेकिन बुनियादी जांच सुविधाओं के अभाव में उन्हें निजी क्रस्ना लैब या अन्य प्राइवेट लैब में परीक्षण कराना पड़ रहा है। इससे मरीजों को समय, पैसा और मेहनत की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है। कई मरीजों को दो बार ब्लड सैंपल देने की भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन ने कुछ राहत देने के लिए व्यवस्था की है कि अब मरीज क्रस्ना लैब में दिए जाने वाले सैंपल सरकारी लैब की समय सीमा में भी दे सकते हैं। पहले क्रस्ना लैब में सैंपल केवल दोपहर 1 बजे के बाद ही लिया जाता था। हालांकि, रिपोर्ट लेने में अभी भी देरी बनी हुई है। सरकारी लैब में जांच की रिपोर्ट दोपहर 3 बजे तक मिल जाती है, जबकि प्राइवेट लैब में भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट अगले दिन सुबह 10 बजे ही उपलब्ध होती है।
इस स्थिति से दूरदराज से आने वाले मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें इलाज के लिए अक्सर अगले दिन दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। इसके अलावा, एचबीए1सी (डायबिटीज मॉनिटरिंग), थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन बी12 और विटामिन डी जैसी जांचें भी फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सस्ती और समय पर जांच की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निजी लैब की ओर जाना पड़ रहा है। डॉक्टरों द्वारा लिखे गए रूटीन टेस्ट सरकारी लैब में नहीं हो रहे हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया बाधित हो रही है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि स्थिति जल्द सुधारी जाएगी और आवश्यक जांच सेवाओं को पुनः बहाल करने का प्रयास जारी है। हालांकि, फिलहाल मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
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