उत्तर प्रदेश

हनुमंतधाम में घुटनों तक पानी, शुकतीर्थ में जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

Ratna Netam
6 Aug 2026 7:59 PM IST
हनुमंतधाम में घुटनों तक पानी, शुकतीर्थ में जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
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शुकतीर्थ (मुजफ्फरनगर) : गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पौराणिक एवं धार्मिक तीर्थ शुकतीर्थ (शुकताल) में विकास और जल निकासी व्यवस्था के दावों की हकीकत सामने ला दी। कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद पूरी तीर्थ नगरी जलमग्न हो गई। मुख्य सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और जगह-जगह जलभराव के कारण श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों तथा साधु-संतों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक प्रभावित विश्व प्रसिद्ध हनुमंतधाम आश्रम रहा, जहां परिसर, मंदिर और श्रद्धालुओं के ठहरने वाले कमरों तक में बारिश का पानी भर गया। इससे दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए।
श्रावण मास के दौरान शुकतीर्थ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे समय में हुई तेज बारिश ने पूरे क्षेत्र की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ ही समय में सड़कों पर इतना पानी भर गया कि वाहन और पैदल चलने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई। कई स्थानों पर जलभराव इतना अधिक था कि लोगों को घुटनों तक पानी में चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
हनुमंतधाम आश्रम की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक रही। बारिश का पानी आश्रम परिसर से होते हुए मंदिर के आसपास और आवासीय कमरों तक पहुंच गया। श्रद्धालुओं को जलभराव के बीच होकर मंदिर तक पहुंचना पड़ा। कई जगहों पर फिसलन की स्थिति बनने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी हुई। आश्रम में ठहरे श्रद्धालुओं को भी अपने कमरों में पानी घुसने के कारण असुविधा का सामना करना पड़ा। मंदिर परिसर में भरे पानी को निकालने के लिए आश्रम प्रबंधन और स्थानीय लोग अपने स्तर पर प्रयास करते नजर आए।
भारी जलभराव के बाद स्थानीय साधु-संतों और धर्मगुरुओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। मां पूर्णागिरी आश्रम के महंत महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज ने कहा कि शुकतीर्थ के विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश के समय यहां की वास्तविक स्थिति कुछ और ही दिखाई देती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी जल निकासी व्यवस्था बनाई गई होती तो इतनी बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होती।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति दोहराई जाती है। जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण आश्रमों, मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी भर जाता है। इसका सबसे अधिक असर श्रद्धालुओं और यहां रहने वाले संतों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक महत्व रखने वाले इस ऐतिहासिक तीर्थ की ऐसी स्थिति चिंता का विषय है और इसे प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासनिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। उनका कहना है कि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यदि समय रहते जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाता तो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इस प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
श्रद्धालुओं ने बताया कि कई लोग दूर-दराज के राज्यों से भगवान के दर्शन के लिए शुकतीर्थ पहुंचे थे, लेकिन मंदिर परिसर और मार्गों में भरे पानी के कारण उन्हें काफी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। कुछ श्रद्धालुओं को लंबे समय तक जलभराव कम होने का इंतजार करना पड़ा, जबकि कई लोगों को पानी के बीच से होकर मंदिर तक जाना पड़ा। इससे धार्मिक आयोजन और दर्शन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
साधु-संतों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शुकतीर्थ में आधुनिक और स्थायी जल निकासी प्रणाली विकसित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो। उनका कहना है कि श्रावण मास और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी मार्गों का विस्तार और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए तो बरसात के दौरान होने वाले जलभराव से काफी हद तक राहत मिल सकती है। फिलहाल मूसलाधार बारिश के बाद शुकतीर्थ में सामने आए हालात ने विकास कार्यों और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कब और क्या कदम उठाता है।
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