मध्य प्रदेश

वाणिज्य कर अधिकारी पर शिकंजा, करोड़ों की संपत्ति की जांच

Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 2:32 PM IST
वाणिज्य कर अधिकारी पर शिकंजा, करोड़ों की संपत्ति की जांच
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दमोह। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने दमोह में पदस्थ वाणिज्य कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की संपत्ति का खुलासा होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में अधिकारी की ज्ञात आय की तुलना में करीब 264.64 प्रतिशत अधिक संपत्ति और खर्च का मामला सामने आया है। लोकायुक्त को जबलपुर, भोपाल और सागर सहित कई स्थानों पर मकान, जमीन, प्लॉट, फ्लैट, वाहन और बीमा पॉलिसियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
सुबह 6 बजे लोकायुक्त टीम ने दी दबिश
जानकारी के मुताबिक, जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने मंगलवार सुबह करीब छह बजे वाणिज्य कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के जबलपुर स्थित रिलाएबल डेवलपर कॉलोनी के आवास पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान जांच अधिकारियों ने संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों, बैंक निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की। अधिकारी तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी एकत्र की गई।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है। संबंधित संपत्तियों की वास्तविक कीमत और उनके लिए धन के स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले को वाणिज्य कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत प्राप्त हुई थी।शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त निरीक्षक बृज मोहन सिंह नरवरिया को मामले का सत्यापन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।सत्यापन के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया। जांच एजेंसी अब अधिकारी की सेवा अवधि के दौरान अर्जित आय और संपत्तियों की तुलना कर रही है।
1.03 करोड़ की आय, 3.78 करोड़ के खर्च और संपत्ति का अनुमान
प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मनीष कुमार जैन की जांच अवधि में ज्ञात स्रोतों से कुल आय लगभग 1.03 करोड़ रुपये आंकी गई है।वहीं, संपत्ति अर्जित करने और अन्य खर्चों पर लगभग 3.78 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान सामने आया है।इस तरह ज्ञात आय और खर्च के बीच करीब 2.74 करोड़ रुपये का अंतर बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह अंतर ज्ञात आय से करीब 264.64 प्रतिशत अधिक है।हालांकि, यह आंकड़ा प्रारंभिक मूल्यांकन पर आधारित है। अंतिम संपत्ति मूल्यांकन, दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
जबलपुर, भोपाल और सागर में मिली संपत्तियों की जानकारी
लोकायुक्त की जांच में अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग शहरों में संपत्तियां होने की जानकारी मिली है।जबलपुर में मनीष कुमार जैन के नाम 278.74 वर्गमीटर जमीन सामने आई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है।उनकी पत्नी निधि जैन के नाम भी जमीन और भूखंड होने की जानकारी मिली है। भोपाल में उनके नाम करीब 180 वर्गमीटर भूमि पर बने बंगले और 83.18 वर्गमीटर के फ्लैट का विवरण सामने आया है।
इसके अलावा सागर जिले के बंडा क्षेत्र में अधिकारी के माता-पिता के नाम पर भूखंड और मकान मिले हैं। लोकायुक्त इन संपत्तियों की खरीद, भुगतान और स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।
पत्नी के नाम वाहन, बीमा पॉलिसियों में भी लाखों का निवेश
छापेमारी के दौरान अचल संपत्तियों के अलावा वाहनों और बीमा पॉलिसियों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।जांच में अधिकारी की पत्नी निधि जैन के नाम मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस दोपहिया वाहन होने की जानकारी मिली है। इनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 5.10 लाख रुपये बताई गई है।इसके अतिरिक्त अधिकारी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों में करीब 33.94 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम और अन्य निवेश के लिए धन किन स्रोतों से आया था।
तीन टीमों को सौंपी गई कार्रवाई की जिम्मेदारी
लोकायुक्त ने जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। इनमें पुलिस उपाधीक्षक नीतू त्रिपाठी, रेखा प्रजापति और निरीक्षक रजनी तिवारी सहित अन्य अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।टीमों को संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संबंधित स्थानों पर सत्यापन का काम सौंपा गया है।जांच अधिकारियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अधिकारी की ज्ञात आय और सामने आए खर्च के बीच इतना बड़ा अंतर किस कारण है।
आगे की जांच में हो सकते हैं नए खुलासे
लोकायुक्त अब संपत्तियों की खरीद की तारीख, वास्तविक बाजार मूल्य, भुगतान के तरीके और वैध आय के स्रोतों का मिलान करेगी।जांच में यह भी देखा जाएगा कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों का अधिकारी की आय से कोई संबंध है या नहीं। परिवार के नाम संपत्ति होना अपने आप में अपराध नहीं है।फिलहाल मनीष कुमार जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच जारी है। आरोप साबित होने या न होने का अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और उनकी घोषित आय के बीच पारदर्शिता के सवाल को चर्चा में ला दिया है।
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