नागालैंड
Nagaland की वोटर लिस्ट पर सियासी बवाल कांग्रेस ने की बड़े पैमाने पर जांच की मांग
Ratna Netam
27 Oct 2026 2:26 PM IST

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कोहिमा : 27 अक्टूबर 2026। नागालैंड में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया है कि राज्य के पांच जिलों में 38,000 से अधिक ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनका पता नहीं चल पा रहा है। कांग्रेस ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए चुनाव आयोग से मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा और संदिग्ध प्रविष्टियों का सत्यापन कराने की मांग की है। हालांकि, पार्टी के इस विशिष्ट आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना बेहद जरूरी है। पार्टी ने मांग की है कि सूची में दर्ज ऐसे मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट की जाए, जिनकी पहचान या वर्तमान निवास का सत्यापन नहीं हो पाया है।
पांच जिलों में 38 हजार से अधिक मतदाताओं पर सवाल
कांग्रेस के दावे के अनुसार, पांच जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है, जिनका संबंधित पते पर पता नहीं चल पा रहा है। पार्टी ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए चुनाव अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है।हालांकि, किसी मतदाता के पते पर नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसका नाम फर्जी है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के दूसरे स्थान पर चले जाने, अस्थायी रूप से अनुपस्थित रहने या सत्यापन फॉर्म जमा नहीं करने जैसी संभावनाएं भी हो सकती हैं।कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची से जुड़ी विसंगतियों को दूर किया जाए, ताकि वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान हो सके।
नागालैंड में पहले भी सामने आई थीं बड़ी विसंगतियां
नागालैंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के दौरान पहले भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड को लेकर सवाल सामने आए थे।राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले नागालैंड में कुल 13,57,208 मतदाता दर्ज थे। इनमें से 11,99,456 मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा किए थे।इस दौरान 28,944 मृत मतदाताओं, 1,23,749 अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित व्यक्तियों तथा 5,059 दोहरी प्रविष्टियों की पहचान की गई थी। इन आंकड़ों में वे लोग भी शामिल थे, जिनके फॉर्म प्राप्त नहीं हुए थे।
मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बाद मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड की सटीक जांच जरूरी है।चुनाव अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर न हो। साथ ही मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टियों और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े मामलों का नियमों के अनुसार निपटारा किया जाए।
20 सितंबर को प्रकाशित हुई थी प्रारूप मतदाता सूची
नागालैंड में एसआईआर के तहत 20 सितंबर 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। मतदाताओं को 20 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया था।निर्वाचन विभाग के कार्यक्रम के अनुसार, दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 18 नवंबर तक जारी रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 22 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।निर्वाचन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए नोटिस, जांच और अपील की व्यवस्था उपलब्ध है।
चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर नजर
मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस के नए दावे ने चुनावी पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा तेज कर दी है। अब यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित चुनाव अधिकारी पांच जिलों में बताए गए 38 हजार से अधिक मामलों की स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मतदाता सूची की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें पात्र नागरिकों का समावेश सुनिश्चित हो और गलत या दोहरी प्रविष्टियों को उचित प्रक्रिया के तहत हटाया जाए।फिलहाल कांग्रेस ने मतदाता सूची की समीक्षा की मांग उठाई है। इस मांग पर निर्वाचन विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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