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पत्रकारों को नहीं मिली राहत दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से किया इनकार
Ratna Netam
27 Oct 2026 2:17 PM IST

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नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकारों से जुड़े एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज एससी/एसटी एक्ट के मामले की जांच पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने दोनों पत्रकारों की याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच पर रोक लगाने की मांग को अंतिम रूप से खारिज नहीं किया गया है। इस मामले में आगे सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस मिनी पुष्करना की अदालत में हुई सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना ने महिला पत्रकार रोजी और उनके सहयोगी पत्रकार गजेंद्र सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई की। दोनों पत्रकारों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस की स्थिति रिपोर्ट और संबंधित पक्षों का जवाब प्राप्त किए बिना जांच रोकने का आदेश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल नोटिस जारी किया जा रहा है और मामले की जांच जारी रह सकती है।न्यायमूर्ति पुष्करना ने यह भी कहा कि याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है।
3 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद 3 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास आयोजित एक विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार रोजी और उनके सहयोगी वहां समाचार कवरेज कर रहे थे।महिला पत्रकार का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया और उन्हें धक्का दिया। महिला पत्रकार ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की थी।वहीं, एसीपी विवेक भगत ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां की गईं और सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित किया गया। साथ ही सरकारी कार्य में बाधा डालने का भी आरोप लगाया गया।इन आरोपों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
SC/ST एक्ट के साथ बीएनएस की धाराओं में दर्ज एफआईआर
एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।इसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) भी लगाई गई हैं।इन धाराओं का संबंध सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालने, मानहानि और साझा आपराधिक दायित्व से है।पत्रकारों की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने दलील दी कि एसीपी की शिकायत पर दर्ज मामला महिला पत्रकार की पूर्व शिकायत के जवाब में की गई बदले की कार्रवाई है।उन्होंने सवाल उठाया कि कथित घटना के लगभग दस दिन बाद पुलिस अधिकारी की शिकायत पर तत्काल एफआईआर क्यों दर्ज की गई। बचाव पक्ष ने इसे जांच का विषय बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट से महिला पत्रकार को पहले मिल चुकी है राहत
इस मामले में महिला पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही अंतरिम संरक्षण मिल चुका है। सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को पुलिस को महिला पत्रकार के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्रकारों के वकील ने इसी आदेश का हवाला देते हुए गजेंद्र सिंह को भी समान संरक्षण देने का अनुरोध किया।हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस संबंध में तत्काल कोई नया संरक्षण आदेश पारित नहीं किया। अदालत ने पुलिस का पक्ष सुनने के बाद मामले पर आगे विचार करने की बात कही।
महिला पत्रकार की शिकायत की भी जांच जारी
महिला पत्रकार की ओर से एसीपी विवेक भगत के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न संबंधी आरोपों की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है।इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में अदालत के सामने एफआईआर की वैधता और जांच पर रोक लगाने के सवाल हैं।फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। जांच जारी रहने का अर्थ पत्रकारों का दोषी साबित होना नहीं है।
अगली सुनवाई में पुलिस के जवाब पर होगी चर्चा
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तथा स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने दोनों पक्षों को अपने लिखित तर्क और संबंधित न्यायिक फैसले पेश करने की भी अनुमति दी है।अगली सुनवाई की तारीख को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर है। पीटीआई और हिंदुस्तान टाइम्स ने 16 नवंबर, जबकि लाइव लॉ ने 17 नवंबर 2026 बताया है।इस मामले में अब अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजरें रहेंगी। जांच के परिणाम और दोनों पक्षों के तर्क आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।SEO कीवर्ड्स: दिल्ली हाई कोर्ट, ACP विवेक भगत, SC/ST एक्ट मामला, पत्रकार रोजी केस, दिल्ली पुलिस जांच, जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन, Delhi High Court News 2026
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