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अरुणाचल में चीनी घुसपैठ का वीडियो फर्जी, रिजिजू का कांग्रेस पर हमला

Kavita2
27 Oct 2026 2:29 PM IST
अरुणाचल में चीनी घुसपैठ का वीडियो फर्जी, रिजिजू का कांग्रेस पर हमला
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नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ और भारतीय इलाकों पर कब्जे के दावों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय सेना ने इन वीडियो में किए गए दावों को भ्रामक और फर्जी बताते हुए उनका खंडन किया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी सेना की छवि खराब करने और भारत के विरोधियों के एजेंडे को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से देश के सामने माफी मांगने की मांग भी की है।

यह विवाद बिहार कांग्रेस की प्रवक्ता रितु चौधरी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए दो वीडियो से शुरू हुआ। एक वीडियो में दावा किया गया था कि चीनी वाहन भारतीय क्षेत्र में घुस आए हैं, जबकि दूसरे वीडियो में अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर चीन के नियंत्रण और भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान की आपूर्ति नहीं होने का आरोप लगाया गया था।

भारतीय सेना की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने दोनों वीडियो की जांच कर इनके साथ किए जा रहे दावों को गलत बताया है।

कांग्रेस प्रवक्ता की पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

बिहार कांग्रेस की प्रवक्ता रितु चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो वीडियो साझा किए थे। पहले वीडियो में कुछ चीनी वाहनों को दिखाते हुए दावा किया गया कि ये वाहन भारतीय सीमा में बिना अनुमति प्रवेश कर रहे हैं।

दूसरे वीडियो में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित बयान के माध्यम से यह दर्शाने की कोशिश की गई कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों पर कब्जा कर लिया है।

वीडियो में यह आरोप भी लगाया गया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात भारतीय जवानों को जरूरी सामग्री की आपूर्ति नहीं की जा रही है।

इन दावों के सामने आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।

भारतीय सेना ने बताया वीडियो का सच

भारतीय सेना की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि चीनी वाहनों वाला वायरल वीडियो किसी सैन्य घुसपैठ का प्रमाण नहीं है।

सेना के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन वास्तव में सिक्किम के नाथू ला दर्रे पर संचालित चीनी व्यावसायिक वाहन हैं।

नाथू ला भारत और चीन के बीच निर्धारित सीमा व्यापार केंद्र है। इस मार्ग पर नियमानुसार व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं।

सेना ने बताया कि वीडियो में इसी अधिकृत व्यापारिक गतिविधि को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर चीनी घुसपैठ का दावा किया गया।

फैक्ट-चेक इकाई ने लोगों से अपील की कि वे सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े वीडियो साझा करने से पहले उनकी वास्तविक जगह और संदर्भ की जांच अवश्य करें।

एआई से तैयार किया गया था दूसरा वीडियो

दूसरे वायरल वीडियो को लेकर भारतीय सेना ने और भी गंभीर खुलासा किया।

इस वीडियो में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से कथित बयान प्रसारित किया गया था।

वीडियो में दावा किया गया कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लोंगजू और तक्षिंग सर्कल पर चीन के कब्जे की बात स्वीकार की है।

भारतीय सेना ने इसे डीपफेक वीडियो बताया। सेना के अनुसार, वास्तविक फुटेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से आवाज और होंठों की गतिविधियों में बदलाव किया गया था।

जांच में सामने आया कि मूल वीडियो 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग का था।

उस समय गिरीश कालिया ने नियंत्रण रेखा पर आतंकवादी घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा अभियानों के बारे में जानकारी दी थी। मूल बयान का अरुणाचल प्रदेश या चीन के कथित कब्जे से कोई संबंध नहीं था।

किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से मांगी माफी

भारतीय सेना के स्पष्टीकरण के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस की आलोचना की।

रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा इस प्रकार की भ्रामक सामग्री साझा करना भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर गलत सूचना फैलाना गंभीर मामला है।

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर भारत के विरोधियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए पार्टी से देश के सामने माफी मांगने की मांग की।

हालांकि, ये आरोप रिजिजू के राजनीतिक बयान हैं। किसी राजनीतिक दल द्वारा जानबूझकर विदेशी एजेंडे को बढ़ावा देने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

सेना ने 12 सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की

भारतीय सेना की फैक्ट-चेक इकाई ने बताया कि चीनी वाहनों से संबंधित भ्रामक वीडियो को कई सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया।

सेना के अनुसार, 26 अक्टूबर को सुबह 8:26 बजे से दोपहर 12:56 बजे के बीच 12 अकाउंट से समान सामग्री प्रसारित हुई थी।

इनमें रितु चौधरी से संबंधित बताए गए सोशल मीडिया अकाउंट का नाम भी शामिल था।

सेना ने इस गतिविधि को समन्वित तरीके से भ्रामक जानकारी फैलाने के संभावित उदाहरण के रूप में चिह्नित किया।

हालांकि, केवल समान सामग्री साझा करने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि सभी अकाउंट संचालकों ने आपसी सहमति से किसी अभियान में भाग लिया था।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर अलग राजनीतिक विवाद भी सामने आया

इसी बीच अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिराम ने राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में चीनी सैनिकों के कथित तौर पर 40 से 50 किलोमीटर अंदर आने का आरोप लगाया।

इस दावे को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने खारिज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि संबंधित क्षेत्र में ऐसी कोई घुसपैठ हो रही है।

कांग्रेस नेता ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हालांकि, यह मामला रितु चौधरी द्वारा साझा किए गए फर्जी वीडियो से अलग है। दोनों विवादों को एक ही घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में फर्जी वीडियो से बढ़ी चिंता

भारत-चीन सीमा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर गलत सूचना फैलने से आम नागरिकों के बीच भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तैयार डीपफेक वीडियो इस चुनौती को और गंभीर बना रहे हैं।

इन तकनीकों के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरे और होंठों की गतिविधियों में बदलाव करके ऐसा वीडियो तैयार किया जा सकता है, जो पहली नजर में वास्तविक प्रतीत हो।

विशेष रूप से सैन्य अधिकारियों के कथित बयान वाले वीडियो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गलत धारणाएं पैदा कर सकते हैं।

इसी वजह से भारतीय सेना ने लोगों से केवल सत्यापित स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।

सेना के स्पष्टीकरण के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

चीनी घुसपैठ से संबंधित वायरल वीडियो का खंडन होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है, जबकि विवाद का मूल विषय भारत-चीन सीमा की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की विश्वसनीयता है।

इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि वायरल दोनों वीडियो में किए गए दावे वास्तविक घटनाओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करते।

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इन वीडियो के आधार पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे या नाथू ला के रास्ते अवैध सैन्य घुसपैठ का दावा प्रमाणित नहीं होता।

इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सूचनाओं की सत्यता जांचने और सोशल मीडिया पर एआई आधारित फर्जी सामग्री से सावधान रहने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।

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