झारखंड

Jharkhand : गर्भवती महिला को कंधे पर उठाकर नदी पार कराई, ग्रामीणों ने बचाई जान

Kavita2
14 July 2026 11:54 AM IST
Jharkhand : गर्भवती महिला को कंधे पर उठाकर नदी पार कराई, ग्रामीणों ने बचाई जान
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खूंटी : झारखंड के ग्रामीण इलाकों में खराब बुनियादी ढांचे की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। अर्की प्रखंड के सावमरंगबेड़ा गांव में सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए उसे कंधे पर उठाकर उफनती करकरी नदी पार करानी पड़ी। इसके बाद महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसने सुरक्षित रूप से एक बच्चे को जन्म दिया।

यह घटना उस समय सामने आई जब भारी बारिश के बाद करकरी नदी का जलस्तर बढ़ गया था। नदी में तेज बहाव के कारण गांव की मुख्य सड़क का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। हालात ऐसे बन गए कि एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच सकी। प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

जानकारी के मुताबिक, सावमरंगबेड़ा गांव निवासी सोमवारी देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय इलाके में लगातार बारिश हो रही थी और करकरी नदी पूरे उफान पर थी। नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि सामान्य तरीके से उसे पार करना संभव नहीं था।

परिजनों ने अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद मांगी, लेकिन सड़क संपर्क बाधित होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाया। इसके बाद महिला के पति मंगुचट नाग और गांव के अन्य लोगों ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने महिला को कंधे पर उठाया और जोखिम भरे हालात के बीच नदी पार करने का फैसला लिया।

ग्रामीणों ने तेज बहाव के बीच सावधानी से महिला को लेकर नदी पार की। इसके बाद उसे वाहन की मदद से अर्की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत महिला का इलाज शुरू किया।

ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों की निगरानी में सोमवारी देवी ने सुरक्षित रूप से बच्चे को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार, प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सका।

इस घटना ने एक बार फिर झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं और गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है। ऐसे में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सावमरंगबेड़ा समेत आसपास के कई गांवों में लंबे समय से बेहतर सड़क और पुल की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी पर पुल या पक्की सड़क होती तो गर्भवती महिला को इस तरह जोखिम उठाकर नदी पार नहीं करनी पड़ती।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द सड़क निर्माण और पुल की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या जरूरतमंद व्यक्ति को ऐसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

यह घटना ग्रामीणों की एकजुटता और साहस की भी मिसाल बन गई है। जहां एक ओर बुनियादी सुविधाओं की कमी ने परेशानी खड़ी की, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने समय पर मदद कर एक महिला और उसके नवजात की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

झारखंड के कई दूरदराज इलाकों में मानसून के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। बारिश के समय खराब सड़कें, पुलों की कमी और नदी-नालों में बढ़ता पानी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कई इलाकों में अभी भी बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत बनी हुई है।

सावमरंगबेड़ा की यह घटना प्रशासन के लिए भी एक संकेत है कि आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।

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