छत्तीसगढ़
Raipur Breaking: जूक क्लब में मारपीट मामले करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
12 Oct 2025 7:45 PM IST

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सटोरिया विकास अग्रवाल पर भी गिर सकती है अपहरण काण्ड मामलें की गाज
सटोरिया विकास अग्रवाल कम समय में बना करोड़ों का मालिक, ये जांच का विषय
विक्की अग्रवाल वही शख्स है जिसने हाइपर क्लब में रोहित तोमर के मिलकर की थी फायरिंग
विक्की अग्रवाल 5 मार्च 2025 में डीडी थाने में महादेव ऑनलाइन सट्टे मामलें में हुआ था गिरफ्तार
गुढ़ियारी थाना इलाके में भी सटोरिया विकास अग्रवाल के खिलाफ दर्ज किया गया है अपराध
साल 2023 में नाडा पैजामाछाप सफ़ेद पोश नेताओं के सट्टे के पैसों से विक्की अग्रवाल घूम रहा था दुबई
सटोरिया विकास अग्रवाल के पास लग्जरी कारों का कलेक्शन है
बिलासपुर में भी विकास अग्रवाल एक बड़े हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर करता है पैसों की वसूली
विकास अग्रवाल के महादेव ऑनलाइन सट्टा आईडी का नाम- Gold 365 है
विकास अग्रवाल के खिलाफ रायपुर शहर के अलग-अलग थाने में दर्ज है कई मामलें
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित जूक क्लब रविवार रात एक बार फिर अपराध और सट्टा विवाद का केंद्र बन गया। देर रात यहां हुई हिंसक झड़प और मारपीट ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में महादेव सट्टा ऐप संचालक सौरभ चंद्राकर के भांजे पुलकित चंद्राकर और उसके रिश्तेदार प्रखर चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। दोनों को महासमुंद से गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया है, जहां क्राइम ब्रांच की टीम उनसे गहन पूछताछ कर रही है। वहीं, मुकुल सोना और अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरी वारदात सट्टे के पैसों की लेन-देन से जुड़ी पुरानी रंजिश का परिणाम है, जिसमें रायपुर का सबसे बड़ा सटोरिया विकास अग्रवाल और ट्रांसपोर्ट कारोबारी अजय शंकर पांडे उर्फ अज्जू पांडे के नाम भी सामने आए हैं।
छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सटोरिया है विकास अग्रवाल
छत्तीसगढ़ के सटोरिया विकास अग्रवाल का नाम पिछले कुछ वर्षों से अंडरवर्ल्ड और सट्टा कारोबार में लगातार सुर्खियों में रहा है। कम समय में करोड़ों का मालिक बनने वाले विकास, जिन्हें आमतौर पर विक्की अग्रवाल के नाम से जाना जाता है, के खिलाफ राज्य भर में कई थानों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके अंडरवर्ल्ड और सट्टा कनेक्शन की जांच अब पुलिस की प्राथमिकता बन गई है। सूत्रों के अनुसार, विकास अग्रवाल का कद केवल अंडरवर्ल्ड तक सीमित नहीं है। उनके नाम पर महादेव ऑनलाइन सट्टा आईडी – Gold 365 भी सक्रिय है, जिसके जरिए उन्होंने बड़े पैमाने पर लेन-देन और सट्टे के कारोबार में शामिल लोगों से पैसे वसूले। वहीं, रायपुर और बिलासपुर में उनके खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामले, जिसमें हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी शामिल हैं, लगातार जांच के दायरे में हैं।
विक्की अग्रवाल का सबसे चर्चित मामला हाइपर क्लब फायरिंग से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने रोहित तोमर के साथ मिलकर फायरिंग की थी। यह मामला पूरे रायपुर शहर में हलचल मचाने वाला रहा और तब से उनके खिलाफ पुलिस सतर्क है। इसके अलावा, 5 मार्च 2025 को विकास अग्रवाल को डीडी थाना में महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनके नेटवर्क और लेन-देन की जांच शुरू हुई थी। सूत्रों का कहना है कि उनके खिलाफ गुढ़ियारी थाना इलाके में भी अपराध दर्ज किया गया है। विकास अग्रवाल का अंडरवर्ल्ड नेटवर्क केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। वह बिलासपुर में एक बड़े हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर पैसों की वसूली करता रहा है। इसके अलावा, उनके पास लग्जरी कारों का बड़ा कलेक्शन भी है, जो उनकी कम उम्र में हासिल की गई संपत्ति की प्रमाणिकता को दर्शाता है।
साल 2023 के दौरान यह जानकारी सामने आई कि विकास अग्रवाल नाडा पैजामाछाप सफ़ेदपोश नेताओं के सट्टे के पैसों से दुबई में घूम रहा था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके कारोबार का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ था। इस पूरे मामले को लेकर अब पुलिस और खुफिया विभाग की निगाहें सतर्क हैं। विकास अग्रवाल का सट्टा कारोबार और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क कई शहरों में फैला हुआ है। रायपुर में उनके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या के प्रयास, अपहरण, मारपीट और सट्टा से जुड़े घोटाले शामिल हैं। बिलासपुर और गुढ़ियारी में उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में वसूली, धमकी और अराजकता फैलाने की धाराओं में कार्रवाई जारी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विकास अग्रवाल का कम समय में करोड़ों का मालिक बनना और उसके अंडरवर्ल्ड कनेक्शन का विस्तार जांच का मुख्य विषय है। इसके साथ ही, उनके नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। जांच यह भी सामने ला रही है कि उनके द्वारा संचालित महादेव ऑनलाइन सट्टा में शामिल लोग कितने बड़े पैमाने पर राज्य और देश के बाहर भी सक्रिय थे।
🔹 सट्टे के पैसों से शुरू हुआ था विवाद, 28 लाख का लेन-देन बना कारण
सूत्रों के अनुसार, इस पूरी घटना की जड़ें 2 जुलाई 2025 की रात से जुड़ी हैं। उस रात विकास अग्रवाल ने अपने कुछ गुर्गों के साथ मिलकर भिलाई निवासी पुलकित चंद्राकर और उसकी महिला मित्र का अपहरण किया था। विकास अग्रवाल और पुलकित के बीच 28 लाख रुपये के सट्टा लेन-देन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि विकास ने पुलकित को भिलाई थाना क्षेत्र से अगवा कर रायपुर लाया और आमानाका, डीडी नगर, पुरानी बस्ती और तेलीबांधा थाना क्षेत्रों में उसे घुमाते हुए बेरहमी से पीटा। एक चरण पर विकास ने पिस्टल के बट से पुलकित के चेहरे पर हमला किया और इंडियन ढाबा लाइन के पास उसके कपड़े उतरवाकर बेल्टों से पीटा। इस घटना ने पूरे रायपुर-अंडरवर्ल्ड जगत में सनसनी फैला दी थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उस समय विकास अग्रवाल ही इस अपहरणकांड का मास्टरमाइंड था। वही विकास अब जूक क्लब हिंसा के तारों में भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
🔹 रविवार रात जूक क्लब में हिंसा – पुरानी रंजिश का बदला
रविवार की रात वीआईपी रोड स्थित जूक क्लब में भिलाई और रायपुर के कुछ युवक पार्टी करने पहुंचे थे। इनमें पुलकित चंद्राकर, प्रखर चंद्राकर, मुकुल सोना और प्रेम वर्मा शामिल थे। उसी दौरान वहां अजय शंकर पांडे उर्फ अज्जू पांडे भी क्लब में पहुंचा। सूत्र बताते हैं कि पुलकित और अज्जू के बीच पुरानी दुश्मनी थी, जो सट्टे के पैसों और एक पुराने विवाद से जुड़ी थी। जैसे ही अज्जू पांडे को पुलकित ने देखा, उसने अपने साथियों के साथ गाली-गलौज करते हुए हमला शुरू कर दिया। क्लब के अंदर पहले झगड़ा शुरू हुआ, जो कुछ ही मिनटों में बाहर सड़क तक फैल गया। दोनों गुटों के बीच लाठी, बेल्ट और पिस्टल के बट से मारपीट हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि फायरिंग जैसी आवाजें भी सुनाई दीं, हालांकि पुलिस ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। मारपीट में अजय उर्फ अज्जू पांडे गंभीर रूप से घायल हुआ और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। क्लब के अंदर कई टेबल, कुर्सियां और शीशे टूट गए।
🔹 सट्टा नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की गूंज
पुलकित और प्रखर चंद्राकर दोनों ही महादेव सट्टा ऐप नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। पुलकित सौरभ चंद्राकर का भांजा है, जो दुबई से संचालित होने वाले महादेव नेटवर्क का मुख्य चेहरा है। प्रखर चंद्राकर भी भिलाई का हिस्ट्रीशीटर माना जाता है। वह अमित जोश नामक अपराधी से जुड़ा रहा है, जिसकी पहले पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रखर और पुलकित दोनों लंबे समय से सट्टे और वसूली के कारोबार से जुड़े रहे हैं। दूसरी ओर, विकास अग्रवाल को रायपुर का “सट्टा किंग” कहा जाता है। वह हाइपर क्लब फायरिंग कांड में भी आरोपी है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में उस पर पहले से कई गंभीर अपराध दर्ज हैं, और वह बीते महीनों से फरार चल रहा है।
🔹 पुलिस की बड़ी कार्रवाई – दो गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
घटना के बाद तेलीबांधा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों — पुलकित और प्रखर चंद्राकर — को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को महासमुंद जिले से ट्रेस कर रायपुर लाया गया, जहां क्राइम ब्रांच की टीम उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में हत्या का प्रयास (धारा 307), अपहरण, धमकी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस फरार आरोपियों मुकुल सोना और अन्य सहयोगियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। तेलीबांधा थाना प्रभारी ने कहा- “यह मामला पूरी तरह आपराधिक नेटवर्क और अवैध सट्टे से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। किसी भी दबाव या राजनीतिक प्रभाव में आए बिना हम सभी आरोपियों पर कार्रवाई करेंगे।”
🔹 पुलिस के सामने चुनौतियां: क्लब संस्कृति और अपराधियों की बढ़ती दखल
रायपुर और भिलाई में पिछले कुछ समय से क्लब, पब और बारों में बढ़ती आपराधिक घटनाएं प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। पुलिस पहले ही लेट नाइट पार्टियों और शराब के खुले सेवन पर सख्त निर्देश जारी कर चुकी थी, लेकिन जूक क्लब की यह घटना बताती है कि इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि रायपुर की नाइटलाइफ अब सटोरियों, हिस्ट्रीशीटरों और अपराधियों के अड्डे में तब्दील होती जा रही है। पुलिस अब ऐसे क्लबों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब शहर के सभी बड़े क्लबों में सीसीटीवी फुटेज की नियमित जांच, रात 11 बजे के बाद शराब पर नियंत्रण और एंट्री पर पहचान सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया जाएगा।
🔹 विकास अग्रवाल का नाम फिर सुर्खियों में
विकास अग्रवाल का नाम इस मामले में सबसे बड़ा कड़ी के रूप में उभर रहा है। सूत्रों का कहना है कि जूक क्लब की हिंसा दरअसल विकास अग्रवाल और पुलकित चंद्राकर के बीच पुराने पैसों के विवाद का परिणाम है। 2 जुलाई की रात हुए अपहरण प्रकरण में पुलकित को बेरहमी से पीटने के बाद भी यह विवाद शांत नहीं हुआ था। विकास अग्रवाल के करीबी लोगों ने बताया कि पुलकित ने सट्टे के पैसे लौटाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह प्रतिशोध की हिंसा में बदल गया। विकास अग्रवाल इस समय फरार है, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसके दुर्ग और रायपुर में कई ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
🔹 पुलकित और प्रखर का अपराध रिकॉर्ड
पुलकित चंद्राकर और प्रखर चंद्राकर दोनों का क्रिमिनल रिकॉर्ड पुराना और व्यापक है। पुलकित के खिलाफ भिलाई में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है और वह उस मामले में फरार चल रहा था। प्रखर चंद्राकर भी भिलाई के हिस्ट्रीशीटर अमित जोश के गिरोह से जुड़ा रहा है और उस पर पहले भी मारपीट, वसूली और धमकी के मामले दर्ज हैं। दोनों आरोपी सौरभ चंद्राकर के नजदीकी रिश्तेदार होने के कारण पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को महादेव सट्टा सिंडिकेट से जोड़कर जांच कर रही है।
🔹 क्लब हिंसा पर प्रशासन सख्त, जांच में जुटी टीमें
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा समीक्षा की और पुलिस आयुक्त ने क्लब संचालकों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने कानून व्यवस्था के नियमों का पालन नहीं किया, तो उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
पुलिस की तीन टीमें इस मामले की जांच में लगी हैं —
क्राइम ब्रांच – गिरफ्तारी और पूछताछ की जिम्मेदारी
स्पेशल इंटेलिजेंस यूनिट (SIU) – सट्टा नेटवर्क की जांच
स्थानीय थाना पुलिस – क्लब से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज की जांच
🔹 जनता से रिश्ता का खुलासा
“जनता से रिश्ता” ने इस पूरे अपहरणकांड और जूक क्लब हिंसा को लेकर जो खुलासे किए हैं, उन्होंने मामले में कई छिपे हुए पहलुओं को सामने ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पुलकित और प्रखर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत और कॉल रिकॉर्ड्स मिले हैं, जिनसे सट्टे के पैसों और हिंसक वारदात के बीच गहरा संबंध साबित हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह घटना सट्टे के पैसों को लेकर हुई विवाद का परिणाम है। विकास अग्रवाल और पुलकित चंद्राकर के बीच 28 लाख रुपए की लेन-देन को लेकर पुराना विवाद था। आपको बता दें कि सूत्रों का कहना है कि आज से 2 महीने पहले 2 जुलाई 2025 की रात विकास अग्रवाल ने अपने कुछ गुंडों के साथ मिलकर पुलकित चंद्राकर और उसकी एक महिला मित्र को भिलाई थाना इलाके से अगवा करके रायपुर लेकर आए थे। फिर विकास अग्रवाल ने आमानाका थाना इलाके में पुलकित चंद्राकर को पीटा, फिर विकास अग्रवाल ने डीडी नगर थाना इलाके में गाडी रोककर उससे पैसे देने को कहे मगर पुलकित ने उसे पैसे ख़त्म होने की बात कही तभी विकास अग्रवाल ने उसे पिस्टल के बट्टे से उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। फिर भी बात नहीं बनी उसके बाद विकास अग्रवाल ने पुरानी बस्ती थाना इलाके के भाठागांव रिंग रोड नंबर 1 में कार रोककर अपने और गुंडों के साथ मिलकर पुलकित को अधमरा कर दिया। इसके बाद विकास अग्रवाल ने तेलीबांधा थाना इलाके के इंडियन ढाबा वाली लाइन के पास फिर पुलकित चंद्राकर के कपडे उतारकर उसके बेल्टों से पीटा। इस पुरे अपहरणकांड का मास्टर माइंड था विकास अग्रवाल जिसने पैसों के लिए इतने बड़े अपहरण की साजिश को रचा था। आपको बता दें कि विकास अग्रवाल वो शख्स है जो कि रायपुर शहर का सबसे बड़ा सटोरिया है, जिसने हाइपर क्लब में भी गोलियां चलाई थी। इसके खिलाफ तेलीबांधा थाना इलाके में कई अलग-अलग धाराओं में अपराध दर्ज है और कई दिनों से विकास अग्रवाल रायपुर शहर से फरार चल रहा था। इस अपहरणकांड की पूरी घटना के दौरान हिस्ट्रीशीटर प्रखर चंद्राकर जो कि महादेव सट्टा एप के मालिक सौरभ चंद्राकर का भांजा है वो उस वक़्त जेल के सलाखों के पीछे था। दरअसल सूत्रों के हवाले से इस पुरे मारपीट काण्ड का सबसे बड़ा खुलासा जनता से रिश्ता कर रहा है। मगर पुलिस ने भी इस अपहरण काण्ड की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आपको बता दें कि पुलकित चंद्राकर भी भिलाई और दुर्ग का फरार अपराधी है जिसके खिलाफ भिलाई में भी हत्या के प्रयास मामलें में अपराध दर्ज किए गए है वही केस लगते ही पुलकित चंद्राकर दुर्ग जिले से फरार हो गया था जिसको दुर्ग पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है। अब देखने वाली बात ये है कि क्या रायपुर पुलिस पुलकित चंद्राकर को हत्या के प्रयास मामलें में गिरफ्तार कर पाती है।
🔹 क्लब संस्कृति पर उठे सवाल
इस घटना के बाद रायपुर की नाइटलाइफ और क्लब कल्चर पर भी सवाल उठने लगे हैं। पिछले एक साल में रायपुर और दुर्ग में क्लबों के भीतर झगड़े, फायरिंग, और ड्रग्स पार्टियों जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अब क्लब मालिकों को सुरक्षा गार्ड की तैनाती, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और समयबद्ध समापन जैसे नियमों का पालन सख्ती से कराना होगा। रायपुर का जूक क्लब हिंसा कांड केवल एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि यह राजधानी के सट्टा नेटवर्क, अंडरवर्ल्ड और क्लब संस्कृति के खतरनाक गठजोड़ का पर्दाफाश करता है। पुलकित और प्रखर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब विकास अग्रवाल की तलाश तेज कर चुकी है, जबकि इस पूरे मामले की जांच महादेव सट्टा कनेक्शन की दिशा में भी की जा रही है। रायपुर पुलिस ने साफ किया है कि “कोई भी व्यक्ति कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।” अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल हिंसा कांड की जांच कहां तक पहुंचती है और क्या महादेव नेटवर्क की नई परतें खुलती हैं।
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