- Home
- /
- लाइफ स्टाइल
- /
- युवाओं में क्यों बढ़...
लाइफ स्टाइल
युवाओं में क्यों बढ़ रही है Sleep की बीमारी? जानिए कारण और समाधान
Harrison
11 Oct 2025 7:14 PM IST

x
Lifestyle,लाइफस्टाइल : आज के युवा तेज़ी से आगे बढ़ते युग का हिस्सा हैं — तकनीक, प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के इस दौर में दिन-रात एक करके काम करना आम हो चला है। लेकिन इसी तेज़ रफ्तार जीवनशैली के बीच एक गंभीर समस्या धीरे-धीरे युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही है — नींद की बीमारी।
हाल के कुछ शोधों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, भारत समेत दुनिया भर में युवाओं में इंसोम्निया (अनिद्रा) और स्लीप डिसऑर्डर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नींद की कमी का असर केवल थकावट या सुस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करता है।
क्या है नींद की बीमारी?
नींद की बीमारी या स्लीप डिसऑर्डर कई रूपों में सामने आती है, जैसे:
इंसोम्निया (अनिद्रा): समय पर नींद न आना या बार-बार नींद टूटना।
हाइपरसोमनिया: दिनभर नींद आना और हमेशा थकान महसूस होना।
स्लीप एपनिया: नींद के दौरान सांस रुकना।
स्लीप पैरालिसिस: नींद में शरीर का लकवाग्रस्त हो जाना।
इनमें से इंसोम्निया सबसे आम है, जो युवाओं में तेजी से फैल रहा है।
क्यों बढ़ रही है ये समस्या युवाओं में?
1. स्क्रीन टाइम में बेतहाशा बढ़ोतरी
मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे शरीर के मेलाटोनिन हार्मोन (जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है) को दबा देती है। इससे दिमाग को यह संकेत नहीं मिलता कि अब सोने का समय है।
2. सोशल मीडिया और देर रात एक्टिविटी
सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, ओटीटी पर वेबसीरीज़ देखना या गेमिंग — ये सभी आदतें दिमाग को एक्टिव रखती हैं और नींद में रुकावट डालती हैं।
3. मानसिक तनाव और चिंता
कॉलेज, करियर, रिश्ते और फ्यूचर को लेकर बढ़ता तनाव युवाओं की नींद में सबसे बड़ी बाधा बनता जा रहा है। तनावग्रस्त मस्तिष्क को नींद नहीं आती या नींद गहरी नहीं हो पाती।
4. अनियमित दिनचर्या
देर रात सोना, सुबह देर तक सोना और कभी-कभी पूरी रात जागना — यह अनियमित रूटीन शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को गड़बड़ा देता है। नतीजा — नींद का समय आते ही नींद नहीं आती।
5. कैफीन और एनर्जी ड्रिंक का ज्यादा सेवन
कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी बूस्टर ड्रिंक्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित करता है। ये ड्रिंक्स नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करते हैं, जिससे नींद की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
इसके दुष्परिणाम क्या हैं?
नींद की बीमारी का असर सिर्फ नींद तक सीमित नहीं होता। इसके कारण:
मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है (चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, एंग्जायटी)
पढ़ाई और काम पर ध्यान नहीं लग पाता
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है
हार्मोनल असंतुलन और मोटापा बढ़ता है
लंबे समय में डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ जाता है
क्या हैं समाधान?
1. सोने और उठने का समय तय करें
हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, चाहे छुट्टी का दिन हो या काम का।
2. स्क्रीन टाइम सीमित करें
सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप बंद कर दें। इसकी जगह किताब पढ़ें या हल्का संगीत सुनें।
3. डाइट पर ध्यान दें
कैफीन, चीनी और ऑयली फूड को रात में खाने से बचें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें।
4. मेडिटेशन और योग का सहारा लें
सोने से पहले ध्यान (मेडिटेशन), प्राणायाम या हल्की स्ट्रेचिंग से नींद में सुधार आता है।
5. स्लीप फ्रेंडली माहौल बनाएं
कमरे में अंधेरा, कम शोर और आरामदायक बिस्तर नींद के लिए जरूरी हैं।
युवाओं में बढ़ती नींद की बीमारी एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह केवल एक आदत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा एक अहम पहलू है। अगर समय रहते इससे जुड़ी आदतों और कारणों को समझकर सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह महामारी का रूप भी ले सकती है।
Tagsयुवाओंनींदबीमारीकारणसमाधानyouthsleepdiseasecausesolutionजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newsSamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





