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Virabhadrasana: वीरभद्रासन योग का अभ्यास करने का सही तरीका, जानें लाभ और सावधानियां
Sarita
1 Aug 2025 12:45 PM IST

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Virabhadrasana: वीरभद्रासन का अभ्यास कठिन है और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। ऐसे में विशेषज्ञ से प्रशिक्षण के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए। आगे की स्लाइड्स में आपको वीरभद्रासन योग के प्रकार, इससे सेहत को होने वाले स्वास्थ्य लाभ और अभ्यास के सही तरीके के बारे में बताया जा रहा है।
वीरभद्रासन के प्रकार:
वीरभद्रासन में पांच तरह के आसन होते हैं। पहला वीरभद्रासन 1, इसमें सामने का टखना मोड़कर कूल्हे को ऊपर की ओर उठाना होता है।
दूसरा वीरभद्रासन 2, इसमें आगे का टखना या घुटना मोड़कर कूल्हे को बगल की ओर मोड़ते हुए भुजाएं समानांतर रखनी होती हैं।
तीसरा वीरभद्रासन 3, इस योग मुद्रा में एक पैर पर संतुलन बनाते हुए सीधा खड़े होकर हाथों को आगे की ओर रखते हुए दूसरे पैर को ऊपर उठाया जाता है।
बद्ध वीरभद्रासन, इसमें वीरभद्रासन 2 की तरह पैर करते हुए धड़ आगे की ओर झुका और भुजाएं पीछे होनी चाहिए।
विपरीत वीरभद्रासन, इसमें भी पैर की स्थिति वीरभद्रासन 2 की तरह और हाथ व धड़ पीछे सीधे पैर की तरफ पहुंचाएं।
वीरभद्रासन के अभ्यास के फायदे:
वीरभद्रासन योग के अभ्यास से शारीरिक,मानसिक और भावनात्मक तौर पर फायदे मिलते हैं।
वीरभद्रासन मसल्स को मजबूत बनाने में मददगार है
यह योग कंधे, हाथ, पैर, टखनों और पीठ को मजबूत करना है।
कूल्हों, छाती और फेफड़ों को खोलने में सहायक है।
शरीर में संतुलन, स्थिरता और मन की एकाग्रता में सुधार करता है।
पेट के अंगों को उत्तेजित करके पाचन की समस्या को ठीक रखने में सहायक है।
रक्त संचार को बढ़ाने में वीरभद्रासन असरदार है।
आत्मविश्वास और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए नियमित वीरभद्रासन का अभ्यास कर सकते हैं।
वीरभद्रासन के अभ्यास का सही तरीका:
वीरभद्रासन 1 के अभ्यास से के लिए ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं। पैरों को कूल्हों की चौड़ाई पर रखकर खड़े होना और हाथों को साइड में रखें।
विचारों को व्यवस्थित करते हुए गहरी और समान रूप से श्वास लें और बाईं ओर मुड़ें।
सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों की बीच लगभग 4 से 5 फीट की दूरी बनाते हुए फैलाएं।
अब दाहिने पैर को 90 डिग्री पर मोड़ें और बाएं पैर को 45 डिग्री के कोण पर अंदर की ओर खींचें।
अगले पर की एड़ी के साथ पिछले पैर को अलाइन करें। बाईं एड़ी पर शरीर का वजन डालें फिर दाहिने टखने पर दाहिने घुटने को मोड़कर सांस छोड़ें।
अब बाजुओं को सिर के ऊपर ले जाते हुए आसमान की ओर फैलाएं। दोनों हथेलियों को आपस में मिलाकर प्रणाम की मुद्रा बनाएं।
सिर को ऊपर की ओर रखते हुए नजर आसमान में टिकाएं। इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रहें।
अब पहली वाली स्थिति में वापस आ जाएं और पूरी प्रक्रिया को दूसरे पैर के साथ दोहराएं।
वीरभद्रासन के अभ्यास के दौरान सावधानियां:
शुरुआत में यह आसन ट्रेनर की निगरानी में ही करना चाहिए।
जब तक शरीर को इस आसन के अभ्यास की आदत न हो जाए और फ्लेक्सिबिलटी उस लेवल तक न पहुंचे, तब तक इस आसन को अधिक दबाव के साथ न करें।
घुटनों से जुड़ी समस्या हो तो लंबे समय तक इस योग मुद्रा में रहने से बचें।
दिल की समस्या हो या दिल की कोई सर्जरी हुई है तो उन्हें किसी भी स्टैंडिंग पोज में लंबे समय तक खड़ा नहीं होना चाहिए।
इस आसन को सुबह के वक्त ही करना चाहिए। शाम में वीरभद्रासन का अभ्यास कर रहे हैं तो भोजन कम से कम 4-6 घंटे पहले कर लें।
कंधे, गर्दन में दर्द हो तो आसन को नहीं करना चाहिए।
घुटने में दर्द या आर्थराइटिस होने पर दीवार के सहारे ही अभ्यास करें।
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