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Health: इन योगासनों का नियमित अभ्यास आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद कर सकता है

Sarita
3 July 2025 12:30 PM IST
Health: इन योगासनों का नियमित अभ्यास आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद कर सकता है
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Health: अगर आप या आपके कोई परिचित धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें प्रोत्साहित करें। धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए सबसे जरूरी है आत्मसंकल्प। उसके बाद कुछ घरेलू तरीके अपनाकर धूम्रपान से छुटकारा पाया जा सकता है। योग भी धूम्रपान की आदत से दूरी बनाने का एक प्रभावी उपाय है। धूम्रपान की लत एक दिन में नहीं जाती, लेकिन योग के सहारे इसे धीरे-धीरे छोड़ा जा सकता है। कुछ विशेष योगासन और प्राणायाम मन को शांत करते हैं, तनाव को कम करते हैं और निकोटीन की तलब पर नियंत्रण पाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं धूम्रपान छोड़ने में सहायक योगासनों के बारे में।
भस्त्रिका प्राणायाम:
यह प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और निकोटिन की वजह से जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। ऊर्जा देने वाले इस श्वास अभ्यास के लिए रीढ़ सीधी करके बैठें। गहरी सांस लेते हुए जोर से सांस बाहर निकालें। यह प्रक्रिया तेजी से करें, लेकिन बहुत अधिक बल न लगाएं। इसे 2-5 मिनट तक करें।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम:
अनुलोम-विलोम का अभ्यास मानसिक संतुलन बनाए रखता है और तंबाकू की तलब को कम करता है। इसे नाड़ी शुद्धि प्राणायाम भी कहा जा सकता है। इसे श्वसन अभ्यास के लिए एक शांत स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठकर दाएं हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद करें और बाईं नासिका से श्वास लें। अब अनामिका और छोटी उंगली से बाईं नासिका बंद करें और दाहिनी नासिका से श्वास छोड़ें। यही प्रक्रिया उलटी दिशा में दोहराएं। इस प्रक्रिया को 5-10 मिनट तक करें।
यह प्राणायाम शरीर को डिटॉक्स करता है और फेफड़ों की सफाई में मदद करता है। कपालभाति प्राणायाम को शरीर को डीटॉक्स करने वाला अभ्यास कहा जा सकता है। इसके अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठकर कमर सीधी रखें। फिर गहरी सांस लें और फिर पेट को अंदर खींचते हुए तेज़ी से सांस बाहर छोड़ें। यह प्रक्रिया लगातार करते रहें। इसे 5-10 मिनट तक करें।
सेतुबंधासन :
सेतुबंधासन के नियमित अभ्यास से तनाव दूर होता है और मन को शांत मिलती है जिससे क्रेविंग कम होती हैं। सेतुबंधासन का अभ्यास करने के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े। पैरों को हिप्स के पास रखते हुए धीरे-धीरे कूल्हे को ऊपर उठाएं और हाथों को जमीन पर टिकाकर शरीर का सहारा दें।
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