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लाइफ़स्टाइल ~अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण पर्याप्त नींद भी है। नींद के दौरान शरीर को आराम मिलता है और मस्तिष्क दिनभर की गतिविधियों से उबरता है। लगातार कम नींद लेने से दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और काम करने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है। लंबे समय तक नींद की कमी कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से भी जुड़ी मानी जाती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बड़ी संख्या में लोग देर रात तक जागने की आदत से परेशान हैं। कुछ लोग बिस्तर पर जाने के बाद घंटों करवटें बदलते रहते हैं, जबकि कुछ मोबाइल फोन या लैपटॉप चलाते-चलाते देर रात तक जागते हैं। समस्या तब बढ़ जाती है, जब सुबह ऑफिस, कॉलेज या दूसरे जरूरी कामों के लिए जल्दी उठना पड़ता है। इससे पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती और अगले दिन सुस्ती बनी रहती है।
वयस्कों के लिए आम तौर पर रोजाना लगभग 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। हालांकि नींद की जरूरत उम्र और व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। केवल सोने के घंटों पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। अगर व्यक्ति बार-बार रात में जाग रहा है या सुबह उठने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करता, तो उसकी नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अच्छी नींद पाने का पहला तरीका है सोने और जागने का समय तय करना। कोशिश करें कि रोजाना लगभग एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और सुबह एक निश्चित समय पर उठें। छुट्टी के दिनों में भी इस समय में बहुत ज्यादा बदलाव न करें। नियमित दिनचर्या से शरीर की आंतरिक घड़ी को सोने और जागने के समय के अनुसार ढलने में मदद मिलती है।
मोबाइल फोन, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल भी सोने से कुछ समय पहले कम करना फायदेमंद हो सकता है। देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या गेम खेलना दिमाग को सक्रिय रख सकता है। स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी भी प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सोने से करीब एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाने की कोशिश की जा सकती है।
कमरे का वातावरण भी नींद पर असर डालता है। सोने वाला कमरा शांत, आरामदायक और अपेक्षाकृत अंधेरा होना चाहिए। बहुत तेज रोशनी या आसपास लगातार शोर होने पर नींद आने में परेशानी हो सकती है। कमरे का तापमान भी आरामदायक रखें। अगर आसपास ज्यादा आवाज होती है तो जरूरत के अनुसार शोर कम करने के उपाय किए जा सकते हैं।
रात में चाय और कॉफी जैसी कैफीन वाली चीजों का अधिक सेवन करने से भी नींद प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों पर कैफीन का असर कई घंटों तक बना रहता है। इसलिए शाम या रात में कॉफी, स्ट्रॉन्ग चाय और अधिक कैफीन वाले पेय कम करना बेहतर हो सकता है। इसी तरह सोने से ठीक पहले बहुत भारी भोजन करने से भी बेचैनी या अपच हो सकता है।
दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहतर नींद में मदद कर सकती है। सुबह या शाम हल्की वॉक, योग या अपनी क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। हालांकि सोने से बिल्कुल पहले बहुत तेज व्यायाम कुछ लोगों को ज्यादा सक्रिय महसूस करा सकता है। इसलिए अपने शरीर के अनुसार व्यायाम का समय तय करना बेहतर है।
तनाव भी नींद खराब होने की एक बड़ी वजह हो सकता है। बिस्तर पर पहुंचते ही ऑफिस, परिवार, पैसे या अगले दिन के कामों के बारे में लगातार सोचते रहने से दिमाग शांत नहीं हो पाता। ऐसे में सोने से पहले कुछ मिनट गहरी सांस लेने, ध्यान करने या हल्का संगीत सुनने जैसी आरामदायक गतिविधियां मददगार हो सकती हैं। अगले दिन के जरूरी काम पहले ही लिख लेने से भी बार-बार उनके बारे में सोचने की आदत कम हो सकती है।
दिन में लंबी झपकी लेने वाले लोगों को रात में जल्दी नींद आने में परेशानी हो सकती है। अगर दिन में सोना जरूरी हो तो झपकी को सीमित रखने की कोशिश करें, खासकर शाम के समय लंबी नींद से बचें। सुबह प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताना भी शरीर की नींद-जागने की लय को व्यवस्थित रखने में मदद कर सकता है।
अगर आप बिस्तर पर जाने के बाद भी लंबे समय तक नहीं सो पा रहे हैं, तो नींद को जबरदस्ती लाने की कोशिश में तनाव न बढ़ाएं। शांत गतिविधि करें और नींद महसूस होने पर दोबारा बिस्तर पर जाएं। बिस्तर को मुख्य रूप से सोने के लिए इस्तेमाल करने की आदत भी उपयोगी मानी जाती है।
इन उपायों के बावजूद अगर कई हफ्तों तक नींद आने में लगातार परेशानी हो रही है, रात में बार-बार नींद खुलती है, बहुत तेज खर्राटे आते हैं, नींद में सांस रुकने जैसा महसूस होता है या दिन में अत्यधिक नींद और थकान रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के नींद की गोलियां लेना सही नहीं है।
बेहतर नींद के लिए किसी एक चमत्कारी उपाय के बजाय नियमित दिनचर्या ज्यादा महत्वपूर्ण है। तय समय पर सोना-जागना, रात में स्क्रीन और कैफीन कम करना, दिन में सक्रिय रहना और सोने के लिए शांत माहौल बनाना धीरे-धीरे स्लीप क्वालिटी सुधारने में मदद कर सकता है।
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