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लाइफ स्टाइल
भारत के हर राज्य में अलग नवरात्रि, जानें कहां कैसी है परंपरा
Kanchan Paikara
4 Oct 2026 6:47 PM IST

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नई दिल्ली। भारत में नवरात्रि केवल देवी दुर्गा की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता की खूबसूरत तस्वीर भी है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर पश्चिम बंगाल तक नवरात्रि मनाने की परंपराएं बदल जाती हैं। कहीं गरबा और डांडिया की धूम दिखाई देती है तो कहीं भव्य दुर्गा पूजा पंडाल सजते हैं। कहीं कन्या पूजन का विशेष महत्व है तो दक्षिण भारत में गुड़ियों की आकर्षक सजावट इस पर्व की पहचान बन जाती है।
नवरात्रि के नौ दिनों को शक्ति की उपासना से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और कई लोग पूरे नौ दिन व्रत भी रखते हैं। अलग-अलग दिनों में विशेष रंग के कपड़े पहनने की परंपरा भी लोकप्रिय है। हालांकि नवरात्रि के नौ रंगों का क्रम हर वर्ष वार और तिथि के अनुसार बदल सकता है। सोशल मीडिया के दौर में नौ दिनों के अलग-अलग रंगों का चलन युवाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हो गया है।
कश्मीर में माता खीर भवानी और वैष्णो देवी की आस्था
जम्मू-कश्मीर में नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। कश्मीरी पंडित समुदाय में भी देवी उपासना की पुरानी परंपरा रही है। कई परिवार व्रत रखते हैं और अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ व्रत पूरा करते हैं।
उत्तर भारत के दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई देती है। घरों में कलश स्थापना और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने की परंपरा है। अष्टमी और नवमी पर छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है। उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद देने के साथ उपहार भी दिए जाते हैं।
गुजरात में गरबा और डांडिया की धूम
गुजरात की नवरात्रि दुनियाभर में अपने गरबा और डांडिया के लिए प्रसिद्ध है। शाम होते ही मैदान और आयोजन स्थल रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठते हैं। पारंपरिक चनिया-चोली और केडिया पहनकर लोग गरबा करते हैं। मां अम्बा की आरती के बाद देर रात तक गरबा और डांडिया का दौर चलता है।
समय के साथ गरबा का स्वरूप आधुनिक हुआ है, लेकिन इसकी धार्मिक जड़ें आज भी शक्ति उपासना से जुड़ी हुई हैं। बड़े शहरों में विशाल गरबा कार्यक्रम आयोजित होते हैं, वहीं गांवों और कस्बों में आज भी पारंपरिक तरीके से देवी की आराधना के बाद सामूहिक गरबा किया जाता है।
बंगाल में दुर्गा पूजा बन जाती है महोत्सव
पश्चिम बंगाल में शारदीय नवरात्रि का सबसे बड़ा आकर्षण दुर्गा पूजा है। यहां षष्ठी से दशमी तक उत्सव अपने चरम पर रहता है। कोलकाता सहित विभिन्न शहरों में विशाल और कलात्मक पूजा पंडाल बनाए जाते हैं। मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं।
ढाक की आवाज, धुनुची नृत्य, सिंदूर खेला और पंडाल दर्शन दुर्गा पूजा की खास पहचान हैं। दशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक रूप से सिंदूर खेला में हिस्सा लेती हैं और मां को विदाई देती हैं।
महाराष्ट्र में घटस्थापना से दशहरा तक उत्साह
महाराष्ट्र में नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घरों और मंदिरों में देवी की पूजा की जाती है। मुंबई और अन्य बड़े शहरों में गुजरात की तरह गरबा और डांडिया कार्यक्रम भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। नवरात्रि के बाद विजयादशमी पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और कई क्षेत्रों में शमी के पत्तों को प्रतीकात्मक रूप से 'सोना' मानकर बांटने की परंपरा देखने को मिलती है।
दक्षिण भारत में ‘गोलू’ की अनोखी परंपरा
तमिलनाडु में नवरात्रि का स्वरूप बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता है। यहां घरों में सीढ़ीनुमा मंच बनाकर देवी-देवताओं और विभिन्न पात्रों की गुड़ियां सजाई जाती हैं। इसे ‘गोलू’ या ‘कोलू’ कहा जाता है। परिवार एक-दूसरे के घर जाकर गोलू देखते हैं और भक्ति गीत गाए जाते हैं।
कर्नाटक में मैसूर दशहरा नवरात्रि और विजयादशमी के सबसे भव्य आयोजनों में शामिल है। मैसूर पैलेस को हजारों रोशनियों से सजाया जाता है और विजयादशमी पर भव्य जुलूस आकर्षण का केंद्र बनता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी देवी की पूजा के साथ स्थानीय परंपराएं उत्सव को विशेष बनाती हैं।
कन्याकुमारी तक शक्ति आराधना का उत्सव
भारत के दक्षिणी छोर कन्याकुमारी में भी देवी उपासना की मजबूत परंपरा है। कन्याकुमारी अम्मन मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। केरल में नवरात्रि के अंतिम दिनों का संबंध विद्या और ज्ञान की आराधना से भी जुड़ा है। सरस्वती पूजा और विद्यारंभ की परंपरा के तहत छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान की शुरुआत कराई जाती है।
इस तरह भारत के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि का रंग और तरीका भले ही बदल जाता हो, लेकिन मूल भावना एक ही रहती है—शक्ति, श्रद्धा और सकारात्मकता की आराधना। कश्मीर के मंदिरों से गुजरात के गरबा मैदानों, बंगाल के दुर्गा पूजा पंडालों और दक्षिण भारत के गोलू तक यह पर्व भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोता है। यही वजह है कि नौ दिनों का यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण बन जाता है।
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