RSS चीफ ने तीन बच्चों वाले परिवार को देशहित के लिए बताया उचित

दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मुद्दों पर अपने विचार रखे. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के द्वारा पूछे गए कई सवालों पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संघ और बीजेपी अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हैं.
मोहन भागवत ने अपने बयान में साफ और पारदर्शी नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया. तीन बच्चों वाले परिवार को देशहित में उचित बताया. शहरों के नाम आक्रमणकारियों पर न रखने की बात कही. जातिगत आरक्षण को संवैधानिक समर्थन बताया. संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं, संस्कृत का अध्ययन जरूरी है और तकनीक का बुद्धिमानी से उपयोग होना चाहिए. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि संघ कभी हिंसा नहीं करता. महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. इस्लाम भारत का हिस्सा है और घुसपैठ रोकना जरूरी है.
"ये हो ही नहीं सकता कि सब कुछ संघ तय करता है. मैं 50 साल से शाखा चला रहा हूं. वो कई साल से राज्य चला रहे हैं. मेरी विशेषज्ञता वो जानते हैं, उनकी मैं जानता हूं. इस मामले में सलाह तो दी जा सकती है, लेकिन फैसला उस फील्ड में उनका है और इस फील्ड में हमारा है. इसलिए हम तय नहीं करते हैं. हम तय करते तो इतना समय लगता क्या? हम तय नहीं करते हैं."पिछले दिनों संसद में पास हुए 'CM, PM के जेल में रहने पर पदमुक्त' किए जाने से जुड़े बिल से जुड़े सवाल पर मोहन भागवत ने कहा, "हमारा नेतृत्व साफ और पारदर्शी होना चाहिए. मैं समझता हूं इसमें सब सहमत हैं, संघ की भी वही सहमति है. कानून ऐसा होगा या नहीं इस पर बहस चल रही है, संसद जैसा तय करेगी, वैसा होगा. इसका परिणाम यह होना चाहिए कि सबके मन में यह विश्वास होना चाहिए कि हमारा नेतृत्व स्वच्छ और पारदर्शी है."





