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पहाड़ी लुक में छाईं कंगना, बताया अपना फेवरेट गाना

Kanchan Paikara
7 Oct 2026 9:43 PM IST
पहाड़ी लुक में छाईं कंगना, बताया अपना फेवरेट गाना
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Entertainment : बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने पहाड़ी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। कंगना ने सोशल मीडिया पर पारंपरिक पहाड़ी आउटफिट में अपनी कुछ खूबसूरत तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने अपने बचपन के पसंदीदा हिमाचली लोकगीत का भी जिक्र किया और उसके अर्थ को बेहद भावुक अंदाज में समझाया। कंगना का यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उनके फैंस ने उनके पारंपरिक लुक की जमकर तारीफ की।
कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश से आती हैं और वह अक्सर अपनी पहाड़ी संस्कृति, लोकगीतों, पारंपरिक कपड़ों और स्थानीय परंपराओं के प्रति अपना लगाव जाहिर करती रहती हैं। इस बार भी उन्होंने फोटोशूट के जरिए अपनी जड़ों से जुड़ाव दिखाया।
पहाड़ी लुक में नजर आईं कंगना
कंगना ने जो तस्वीरें शेयर कीं, उनमें वह पारंपरिक पहाड़ी अंदाज में दिखाई दीं। उन्होंने अपने पोस्ट में इन तस्वीरों को ‘Pahadi girl poses’ कहा और फैंस से पूछा कि उन्हें उनका यह अंदाज कैसा लगा। खास बात यह है कि कंगना ने अपने लुक की स्टाइलिंग खुद की थी। पोस्ट में उन्होंने स्टाइलिस्ट के तौर पर अपना ही नाम लिखा।उनका यह लुक सादगी के साथ पारंपरिक हिमाचली सौंदर्य को दिखाता है। कंगना पहले भी कई मौकों पर हिमाचली टोपी, शॉल, पारंपरिक आभूषण और लोकल ड्रेसेज में नजर आ चुकी हैं।
बचपन से पसंद है ‘अम्मा पुछदी’
कंगना ने अपने फोटोशूट के साथ हिमाचल के एक लोकप्रिय लोकगीत ‘अम्मा पुछदी’ का जिक्र किया। उन्होंने इसे अपने बचपन से पसंदीदा गानों में से एक बताया।कंगना ने लिखा कि हिमाचल का लोक संगीत काफी कम आंका जाता है, जबकि उसमें बेहद गहरी भावनाएं और सरलता छिपी होती है। उनके मुताबिक ‘अम्मा पुछदी’ उन्हें बचपन से बेहद पसंद है।इस गाने का जिक्र करते हुए कंगना ने केवल इसकी धुन की तारीफ नहीं की, बल्कि इसका भावार्थ भी अपने फैंस के साथ शेयर किया।
क्या है ‘अम्मा पुछदी’ का मतलब?
कंगना ने गाने की कहानी समझाते हुए बताया कि इसमें एक चिंतित मां अपनी बेटी से पूछती है कि उसने खाना क्यों छोड़ दिया है और उसकी भूख क्यों गायब हो गई है।बेटी अपनी प्रेम-वेदना सीधे मां से नहीं कह पाती। इसलिए वह अपनी भावनाओं को खुले शब्दों में जाहिर करने के बजाय प्रतीकों और रूपकों का सहारा लेती है।
कंगना के मुताबिक बेटी अपने प्रेमी को लेकर अपनी तकलीफ एक मोर के रूपक के जरिए व्यक्त करती है। वह सीधे अपने प्रेमी की शिकायत नहीं करती, बल्कि मोर को माध्यम बनाकर अपनी नाराजगी और प्रेम की पीड़ा जाहिर करती है।यही भाव इस लोकगीत को कंगना के लिए खास बनाता है।
पहाड़ के लोगों जैसा बताया गाने का स्वभाव
कंगना ने गाने की खूबसूरती को पहाड़ी लोगों के स्वभाव से भी जोड़ा। उन्होंने इसे सौम्य, शांत और भावनाओं को सीधे न कहकर इशारों में व्यक्त करने वाली रचना बताया।उनका कहना था कि यह गीत पहाड़ के लोगों की तरह ही खूबसूरत है—जहां भावनाएं बहुत गहरी होती हैं लेकिन उन्हें दिखाने का तरीका शांत और संयमित होता है।कंगना की इस बात ने उनके पोस्ट को केवल फैशन फोटोशूट तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें हिमाचली लोक संस्कृति का रंग भी जोड़ दिया।
हिमाचली लोक संगीत को बताया कम आंका गया
कंगना ने अपने पोस्ट में खास तौर पर लिखा कि हिमाचल के लोक संगीत को जितनी पहचान मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिलती।हिमाचली लोकगीतों में प्रेम, विरह, प्रकृति, पहाड़, परिवार और सामाजिक जीवन जैसे विषयों की झलक देखने को मिलती है। कई गीत पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के जरिए आगे बढ़ते रहे हैं।कंगना का मानना है कि ऐसे गीतों की खूबसूरती उनकी सरलता और भावनात्मक गहराई में है।
फैंस को पसंद आया देसी अंदाज
कंगना के फोटोशूट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी प्रतिक्रिया दी। कई फैंस ने उनके पहाड़ी लुक को खूबसूरत बताया और हिमाचली संस्कृति को प्रमोट करने के लिए उनकी तारीफ की। कुछ यूजर्स ने उनके पारंपरिक अंदाज को उनके ग्लैमरस बॉलीवुड लुक से अलग और ज्यादा प्राकृतिक बताया।उनके पोस्ट में फैशन और संगीत दोनों को एक साथ जोड़ा गया, जिससे यह फैंस के बीच और ज्यादा चर्चा में आ गया।
अक्सर पहाड़ी संस्कृति को करती हैं प्रमोट
कंगना रनौत कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पोस्ट में अपने हिमाचली
बैकग्राउंड
का जिक्र कर चुकी हैं। वह मनाली और मंडी क्षेत्र से अपने जुड़ाव को भी अक्सर सामने रखती हैं।पारंपरिक आउटफिट पहनना हो या स्थानीय खान-पान और लोक संस्कृति की बात करना, कंगना कई मौकों पर अपनी पहाड़ी पहचान को प्रमुखता देती रही हैं।इस नए फोटोशूट में भी उन्होंने केवल कपड़े नहीं दिखाए, बल्कि उस लुक के साथ पहाड़ी संगीत और संस्कृति की कहानी भी जोड़ दी।
लोकगीतों से जुड़ी होती हैं स्थानीय कहानियां
भारत के अलग-अलग राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश में भी लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहे हैं। इनमें स्थानीय समाज, रिश्ते, प्रेम, विवाह, त्योहार और प्रकृति की कहानियां छिपी होती हैं।‘अम्मा पुछदी’ में भी एक मां और बेटी के बीच संवाद के जरिए प्रेम और विरह की भावना सामने आती है। कंगना ने इसी संवेदनशील पहलू को अपने पोस्ट में रेखांकित किया।यही वजह है कि उनके लिए यह गाना केवल एक पुरानी धुन नहीं, बल्कि बचपन और पहाड़ी संस्कृति से जुड़ी याद भी है।
फोटोशूट से ज्यादा चर्चा गाने के अर्थ की
कंगना का पारंपरिक लुक तो लोगों का ध्यान खींच ही रहा है, लेकिन उनके पोस्ट की सबसे दिलचस्प बात गाने की व्याख्या रही। आमतौर पर सेलिब्रिटी फोटोशूट में कपड़ों, मेकअप और डिजाइनर की चर्चा होती है, लेकिन कंगना ने इसके साथ लोकगीत की भावनात्मक कहानी भी साझा की।इससे उनके पोस्ट में एक सांस्कृतिक पहलू जुड़ गया और हिमाचली लोक संगीत भी चर्चा में आ गया।
कुल मिलाकर कंगना रनौत का नया पहाड़ी फोटोशूट फैशन और लोक संस्कृति का मिश्रण बनकर सामने आया है। उन्होंने पारंपरिक आउटफिट के जरिए अपनी हिमाचली पहचान दिखाई, वहीं ‘अम्मा पुछदी’ को अपना बचपन का पसंदीदा गीत बताते हुए उसके पीछे छिपी प्रेम और विरह की कहानी भी साझा की। कंगना के मुताबिक इस गाने की खासियत उसकी सरलता, सौम्यता और भावनाओं को इशारों में व्यक्त करने का तरीका है—बिल्कुल पहाड़ के लोगों की तरह।
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