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दिल्ली में हर योग्य मतदाता का नाम जोड़ने की तैयारी

Ratna Netam
7 Oct 2026 8:32 PM IST
दिल्ली में हर योग्य मतदाता का नाम जोड़ने की तैयारी
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नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत झुग्गी-झोपड़ी यानी JJ क्लस्टर्स के इन-सीटू रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को उनके मौजूदा क्षेत्र के आसपास ही बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।
DDA की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मास्टर प्लान दिल्ली 2047 यानी MPD 2047 में राजधानी के 650 से अधिक JJ क्लस्टर्स में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के लिए इन-सीटू रिहैबिलिटेशन के जरिए आवास व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के विजन से प्रेरित बताई गई है।
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए DDA ने दिल्ली के 45 JJ क्लस्टर्स को कवर करने वाली 15 परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर्स नियुक्त किए जाएंगे। इन सलाहकारों की नियुक्ति के लिए DDA ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी RFP जारी किया है।
इन ट्रांजैक्शन एडवाइजर्स की जिम्मेदारी प्रस्तावित पुनर्वास परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय और व्यावहारिक संभावनाओं का अध्ययन करना होगा। वे यह आकलन करेंगे कि संबंधित क्षेत्रों में पुनर्वास परियोजनाओं को किस मॉडल पर विकसित किया जा सकता है, कितने परिवारों को लाभ मिलेगा और जमीन तथा अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।
इन-सीटू रिहैबिलिटेशन मॉडल का मुख्य उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को दूरस्थ इलाकों में स्थानांतरित करने के बजाय उनके मौजूदा निवास क्षेत्र के आसपास ही पुनर्वास देना है। इससे लोगों की रोजी-रोटी, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक संपर्क पर कम से कम असर पड़ने की उम्मीद की जाती है।
दिल्ली जैसे महानगर में बड़ी संख्या में लोग रोजगार और आजीविका के कारण अपने कार्यस्थल के आसपास JJ क्लस्टर्स में रहते हैं। यदि उन्हें शहर के दूसरे छोर पर स्थानांतरित किया जाता है तो रोजाना यात्रा, रोजगार और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इन-सीटू पुनर्वास को शहरी आवास नीति में एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है।
MPD 2047 के तहत DDA का फोकस केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा। पुनर्वास परियोजनाओं में बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पानी, सीवर, बिजली, सार्वजनिक स्थान और अन्य शहरी सुविधाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि प्रत्येक परियोजना का अंतिम स्वरूप व्यवहार्यता रिपोर्ट और आगे की मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
DDA की ओर से जारी RFP इस पूरी प्रक्रिया के शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण चरण का हिस्सा है। ट्रांजैक्शन एडवाइजर्स पहले संबंधित 45 क्लस्टर्स की स्थिति का अध्ययन करेंगे। इसमें जमीन की उपलब्धता, वहां रहने वाले परिवारों की संख्या, मौजूदा निर्माण, आसपास का बुनियादी ढांचा और परियोजना लागू करने में आने वाली संभावित चुनौतियों का विश्लेषण शामिल हो सकता है।
इसके बाद प्रत्येक परियोजना के लिए एक व्यवहारिक मॉडल तैयार किया जाएगा। इस मॉडल के आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि पुनर्वास किस तरीके से किया जाए और निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से कैसे पूरा किया जाए।
15 परियोजनाओं में शामिल 45 JJ क्लस्टर्स को एक साथ कवर करने से DDA बड़े स्तर पर पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। यदि इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट सकारात्मक रहती है तो आगे निर्माण और पुनर्वास के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा सकती है।
DDA का यह कदम दिल्ली के आवासीय ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच किफायती तथा व्यवस्थित आवास बड़ी चुनौती है। JJ क्लस्टर्स के पुनर्विकास के जरिए अनियोजित बस्तियों को बेहतर बुनियादी ढांचे से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है।
इन-सीटू रिहैबिलिटेशन का एक और उद्देश्य लोगों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। झुग्गी बस्तियों में कई बार आग, जलभराव, संकरी गलियां, कमजोर निर्माण और स्वच्छता जैसी समस्याएं सामने आती हैं। नियोजित आवास परियोजनाओं के जरिए इन समस्याओं को कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
हालांकि पुनर्वास परियोजनाओं में लाभार्थियों की पहचान भी महत्वपूर्ण चरण होता है। कौन से परिवार योजना के लिए पात्र होंगे, उनकी पात्रता किस आधार पर तय होगी और दस्तावेजी प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी, इस पर आगे संबंधित एजेंसियों की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
DDA के लिए चुनौती यह भी होगी कि परियोजनाओं के दौरान प्रभावित परिवारों को अस्थायी व्यवस्था कैसे दी जाए और निर्माण पूरा होने तक उनकी आजीविका तथा अन्य जरूरतों पर कम से कम असर पड़े। व्यवहार्यता रिपोर्ट में ऐसे पहलुओं का भी अध्ययन किए जाने की संभावना है।
मास्टर प्लान दिल्ली 2047 राजधानी के दीर्घकालिक शहरी विकास की रूपरेखा तैयार करता है। इसमें आवास, परिवहन, पर्यावरण, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है। JJ क्लस्टर्स का पुनर्वास इसी व्यापक शहरी विकास रणनीति का हिस्सा है।
DDA ने तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर्स की नियुक्ति के लिए RFP जारी कर यह संकेत दिया है कि अब योजना को अध्ययन और क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। सलाहकारों की रिपोर्ट मिलने के बाद परियोजनाओं की लागत, डिजाइन और कार्यान्वयन मॉडल को लेकर आगे निर्णय लिए जा सकेंगे।
यदि 45 JJ क्लस्टर्स से जुड़ी ये 15 परियोजनाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ती हैं तो इन्हें भविष्य में अन्य क्लस्टर्स के लिए भी मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। MPD 2047 में 650 से अधिक क्लस्टर्स और करीब 17 लाख लोगों को ध्यान में रखा गया है, इसलिए इस प्रक्रिया का दायरा काफी बड़ा है।
कुल मिलाकर, DDA का यह कदम दिल्ली में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास को नई दिशा देने की कोशिश है। 45 JJ क्लस्टर्स के लिए व्यवहार्यता अध्ययन शुरू होने के साथ अब यह देखा जाएगा कि इन परियोजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए कौन सा मॉडल सबसे प्रभावी और व्यावहारिक साबित होता है।
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