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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में छिपा PLA का वांटेड उग्रवादी गिरफ्तार, UAPA के दो मामलों में था फरार
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 4:44 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से कथित तौर पर जुड़े एक वांछित सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 35 वर्षीय आरके रेगन सिंह उर्फ गांधी के रूप में हुई है। वह मणिपुर में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज दो मामलों में वांछित था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपनी पहचान छिपाकर दिल्ली में रह रहा था। क्राइम ब्रांच ने खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उसे दक्षिण दिल्ली के यूसुफ सराय इलाके से पकड़ा।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच की टीम को 3 सितंबर 2026 को सूचना मिली थी कि मणिपुर के प्रतिबंधित संगठन PLA का एक वांछित सदस्य राष्ट्रीय राजधानी में छिपा हुआ है। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। संदिग्ध की पहचान और संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई गई। इसके बाद जांच टीम ने संबंधित सूचनाओं के आधार पर उसकी गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी मणिपुर के थौबल पुलिस थाने में दर्ज UAPA के दो मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ जबरन वसूली समेत अन्य आपराधिक गतिविधियों से संबंधित आरोप भी बताए गए हैं। जांच एजेंसियां अब उसके कथित संगठनात्मक संबंधों और दिल्ली में रहने के उद्देश्य की पड़ताल कर रही हैं।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि मणिपुर में वांछित व्यक्ति दिल्ली तक कैसे पहुंचा और यहां किन लोगों के संपर्क में था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने राजधानी में रहने के दौरान किन दस्तावेजों और पहचान संबंधी विवरणों का इस्तेमाल किया।रिपोर्ट के मुताबिक, रेगन सिंह ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाई हुई थी। पुलिस को यह भी संदेह है कि वह दिल्ली में धन के अवैध लेनदेन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। हालांकि इस संबंध में आरोपों की विस्तृत जांच और साक्ष्यों का परीक्षण अभी बाकी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी की गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच के लिए महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है, क्योंकि वह मणिपुर में दर्ज गंभीर मामलों में वांछित था। उसकी तलाश के लिए स्थानीय पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा इकाइयों की जानकारी भी महत्वपूर्ण रही है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई क्राइम ब्रांच की उस टीम ने की, जिसका नेतृत्व एसीपी राजकुमार कर रहे थे। टीम में इंस्पेक्टर प्रकाश भी शामिल थे। पुलिस उपायुक्त हर्ष इंदोरा ने मामले से जुड़े विवरण साझा किए हैं। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से उसके कथित संपर्कों, गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछताछ की जा रही है।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी मणिपुर से जुड़ा एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है। इसका नाम लंबे समय से पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों के संदर्भ में सामने आता रहा है। भारत सरकार ने इसे गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंधित संगठनों की सूची में रखा है।किसी प्रतिबंधित संगठन से संबंधित मामलों में जांच एजेंसियां आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका, संगठन से उसके संबंध, संभावित आर्थिक सहयोग और अन्य गतिविधियों की जांच करती हैं। ऐसे मामलों में UAPA के प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना या उसकी गिरफ्तारी होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होता है।
दिल्ली पुलिस के सामने अब आरोपी के संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाने की चुनौती है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि वह राजधानी में कितने समय से रह रहा था, यहां आने में किसने सहायता की और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।इसके अतिरिक्त पुलिस उसके मोबाइल फोन, संचार माध्यमों और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी कर सकती है। ऐसी पड़ताल से आरोपी की गतिविधियों तथा अन्य व्यक्तियों के साथ उसके संभावित संबंधों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसके पास से कौन-कौन से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
मणिपुर पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के कारण चर्चा में रहा है। राज्य में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी संगठनों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से अभियान चलाती रही हैं। प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े वांछित व्यक्तियों की तलाश में राज्यों के बीच पुलिस समन्वय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इस गिरफ्तारी के बाद मणिपुर पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी ध्यान रहेगा। चूंकि आरोपी के खिलाफ UAPA के मामले मणिपुर में दर्ज हैं, इसलिए संबंधित मामलों में उसकी पेशी, हिरासत या स्थानांतरण न्यायालय के आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगा।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी का दिल्ली में छिपकर रहने का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी से बचना था या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी थी। राजधानी अथवा आसपास के क्षेत्रों में किसी संभावित साजिश से उसके संबंध के बारे में भी जांच की बात सामने आई है। हालांकि अब तक किसी विशेष हमले की योजना की पुष्टि नहीं हुई है।सुरक्षा की दृष्टि से यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले पूर्वोत्तर राज्य से जुड़े हैं, जबकि उसकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय राजधानी में हुई है। इससे विभिन्न राज्यों में वांछित व्यक्तियों की तलाश के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय का महत्व सामने आता है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और संबंधित मामलों की जानकारी जुटाने में लगी है। आगे की जांच में उसके कथित वित्तीय लेनदेन और अन्य संपर्कों से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियों के लिए यह भी जरूरी होगा कि प्राप्त सूचनाओं की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाए।दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से मणिपुर में UAPA के दो मामलों में वांछित एक आरोपी की गिरफ्तारी संभव हुई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पूछताछ और जांच में उसके कथित नेटवर्क तथा राजधानी में रहने के उद्देश्य को लेकर क्या जानकारी सामने आती है।
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