छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग का ऐतिहासिक फैसला

Shantanu Roy
6 Nov 2026 4:43 PM IST
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग का ऐतिहासिक फैसला
x
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत और शासकीय शिक्षकों के सेवा नियमों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) द्वारा शिक्षकों की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता को लेकर पारित किए गए ऐतिहासिक निर्णय के परिपालन में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), छत्तीसगढ़ शासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (कक्षा 1 से 8वीं तक) विद्यालयों में कार्यरत ऐसे समस्त नियमित शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष या उससे अधिक का समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने और भविष्य में पदोन्नति (Promotion) प्राप्त करने के लिए उचित स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET - Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण करना पूर्णतः अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की मुहर
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 (आदेश दिनांक 1 सितंबर 2025) और उसके बाद पुनर्विचार याचिका पर 29 मई 2026 को दिए गए कड़े निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए इन-सर्विस शिक्षकों को भी तय समय सीमा (संभावित रूप से अगस्त 2028 तक) के भीतर टीईटी पास करना ही होगा। अदालत के इसी रुख को देखते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने गैर-टीईटी उत्तीर्ण कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए विशेष अवसर देने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जो शिक्षक इसे उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे, उनकी सेवा सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।



साल में न्यूनतम दो बार होगी विशेष कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, सेवारत गैर-टीईटी शासकीय शिक्षकों की सुविधा के लिए अब विशेष परीक्षा का खाका तैयार किया गया है। इस परीक्षा का आयोजन दो प्रमुख माध्यमों से किया जाएगा:
1. छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) द्वारा आयोजन: यह परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) के माध्यम से आयोजित होने वाली नियमित परीक्षाओं के अतिरिक्त होगी।
2. निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से CBT: परीक्षा को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए एक अधिकृत निजी तकनीकी एजेंसी की मदद ली जाएगी, जो कंप्यूटर आधारित टेस्ट (Computer Based Test - CBT) मोड में ऑनलाइन परीक्षा का संचालन करेगी।
चूंकि राज्य में ऐसे शिक्षकों की संख्या हजारों में है, इसलिए परीक्षा का आयोजन एक से अधिक पालियों (Multiple Shifts) में किया जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि सभी पालियों के लिए तैयार किए जाने वाले प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर पूरी तरह से एक समान (Normalized) रखा जाएगा, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ असमानता न हो। यह विशेष परीक्षा प्रतिवर्ष न्यूनतम दो बार आयोजित की जाएगी, जिससे शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
5 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों को सशर्त छूट
नियमों के मुताबिक, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की अवधि 5 वर्ष से कम बची है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने से छूट मिल सकती है, परंतु यदि वे उच्च पदों पर पदोन्नति (Promotion) के आकांक्षी हैं, तो उन्हें भी यह परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी। सफल शिक्षकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। हालांकि, इस बड़े फैसले के बाद 1998 और उसके बाद के वरिष्ठ शिक्षक संघों में खलबली मच गई है और कई शिक्षक संघों ने इस अनिवार्यता से राहत पाने के लिए दोबारा सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन भी दायर किए हैं। बहरहाल, शासन के इस कड़े रुख से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ की प्राथमिक शिक्षा में अब गुणवत्ता और योग्यता ही सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
Next Story