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SIR विवाद के बीच 17 राज्यों की वोटर लिस्ट में होगा बड़ा बदलाव
Rajeshwari Nishad
15 Oct 2026 7:43 PM IST

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नई दिल्ली। देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा समेत 17 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराने की घोषणा की है। इसके लिए संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को पात्रता की मुख्य तारीख निर्धारित किया गया है। यानी इस तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। चुनाव आयोग का उद्देश्य नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलत प्रविष्टियों को सुधारना और मतदाता सूची को अद्यतन बनाना है।
17 राज्यों में विशेष सारांश पुनरीक्षण का ऐलान
चुनाव आयोग ने गुरुवार को मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण की घोषणा करते हुए संबंधित राज्यों को तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों में नए नाम जोड़े जाएंगे। इसके अलावा मौजूदा मतदाताओं की जानकारी में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।जिन मतदाताओं के नाम पहले पुनरीक्षण के दौरान सूची से हट गए थे, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे।चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी आवश्यकता है।
इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SSR
चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, विशेष सारांश पुनरीक्षण की प्रक्रिया इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कराई जाएगी।उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम शामिल हैं।इसके अलावा पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी विशेष सारांश पुनरीक्षण कराया जाएगा।इस प्रकार कुल 14 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया चलेगी।
1 जनवरी 2027 होगी मुख्य पात्रता तारीख
चुनाव आयोग ने विशेष सारांश पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को मुख्य पात्रता तारीख निर्धारित किया है।इसका मतलब है कि इस दिन तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।इसके अतिरिक्त आयोग ने 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 की आगामी पात्रता तारीखों के लिए अग्रिम आवेदन लेने का भी प्रावधान किया है।
इस व्यवस्था से उन युवाओं को लाभ मिलेगा, जो वर्ष 2027 के दौरान अलग-अलग समय पर 18 वर्ष की आयु पूरी करेंगे।हालांकि, मतदान के लिए नाम का संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम लागू मतदाता सूची में दर्ज होना आवश्यक होगा।
12 नवंबर को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची
निर्वाचन आयोग ने विशेष सारांश पुनरीक्षण का कार्यक्रम भी निर्धारित किया है।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।इसके बाद मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने का अवसर मिलेगा।
12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां स्वीकार किए जाएंगे।इस अवधि में पात्र नागरिक नाम जोड़ने, गलत जानकारी सुधारने और अन्य आवश्यक संशोधनों के लिए आवेदन कर सकेंगे।दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
SIR और SSR में क्या है अंतर?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी SSR दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन बनाना है, लेकिन इनके तरीके अलग हैं।SIR एक व्यापक पुनरीक्षण प्रक्रिया होती है, जिसमें मतदाताओं के रिकॉर्ड का अधिक विस्तृत सत्यापन किया जाता है।
वहीं SSR में मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलतियां सुधारने और नियमानुसार अपात्र प्रविष्टियां हटाने पर जोर दिया जाता है।SSR में नागरिकों को प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है।चुनाव आयोग आमतौर पर वार्षिक आधार पर सारांश पुनरीक्षण कराता रहा है।
SIR विवाद के बीच आया आयोग का फैसला
देश के विभिन्न हिस्सों में SIR प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक विवाद चल रहा है।कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं।विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण के दौरान गरीब, प्रवासी और अन्य पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हुए हैं।वहीं चुनाव आयोग का कहना रहा है कि मृत, स्थानांतरित, दोहराए गए और अन्य अपात्र मतदाताओं की प्रविष्टियों की पहचान करना आवश्यक है।
इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।हालांकि, विपक्ष के आरोपों और वास्तविक प्रशासनिक अनियमितताओं के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी विशेष गड़बड़ी की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही हो सकती है।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल चुनाव
विशेष सारांश पुनरीक्षण का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा।वहीं उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होना निर्धारित है।ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करना निर्वाचन आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।इन राज्यों में राजनीतिक दल भी मतदाता सूची से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर नए निर्देश
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।आयोग के अनुसार, समान जनसांख्यिकीय विवरण या तस्वीरों के आधार पर संभावित दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान की जा सकती है।लेकिन केवल सॉफ्टवेयर द्वारा किसी नाम को चिह्नित कर दिए जाने से उसे स्वतः हटाया नहीं जाएगा।
पुष्टि किए गए दोहराव, स्थायी रूप से स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के मामलों में निर्धारित फॉर्म-7 और प्रक्रिया का पालन करना होगा।इससे मतदाता सूची में सुधार के दौरान प्रक्रियागत सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
ऑनलाइन भी कर सकेंगे मतदाता आवेदन
विशेष सारांश पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिक चुनाव आयोग की ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे।नए मतदाता नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग कर सकते हैं।मौजूदा मतदाता अपने नाम, पता या अन्य विवरण में आवश्यक संशोधन के लिए निर्धारित फॉर्म-8 का इस्तेमाल कर सकते हैं।
संबंधित मतदाता सूची में नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 का प्रावधान है।आवेदन चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल या संबंधित निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से किए जा सकते हैं।
कुछ राज्यों में बाद में घोषित होगा कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है या हाल में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, हरियाणा, झारखंड और अन्य राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम तथा पुनरीक्षण की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से कार्यक्रम तय किया जाएगा।आयोग ने बताया है कि इन क्षेत्रों की मतदाता सूची के पुनरीक्षण की तारीखें उचित समय पर जारी होंगी।
मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
चुनाव आयोग के इस फैसले से लाखों पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने और मौजूदा विवरण की जांच करने का अवसर मिलेगा।विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा ऐसे नागरिक जिनके नाम किसी कारण से सूची में नहीं हैं, वे भी निर्धारित प्रक्रिया से आवेदन कर सकेंगे।मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि प्रारूप सूची जारी होने के बाद वे अपना नाम और अन्य विवरण अवश्य जांच लें।
चुनावी तैयारियों में आएगी तेजी
17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR कराने के फैसले से मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन तैयारियों की गतिविधियां तेज होंगी।आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न रहे और अपात्र प्रविष्टियों को नियमानुसार सुधारा जाए।
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