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सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव की माफी पर गृह मंत्रालय ने दी बड़ी सफाई

Ratna Netam
15 Oct 2026 7:35 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव की माफी पर गृह मंत्रालय ने दी बड़ी सफाई
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने से संबंधित मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि सरकार और पुलिस द्वारा उठाए गए सभी कदम कानून के अनुरूप थे और इन कार्रवाइयों से अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में दाखिल हलफनामे में बिना शर्त माफी का उल्लेख अवमानना कार्यवाही की एक प्रक्रिया के तहत किया गया था।गृह मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में गृह सचिव की माफी को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे सरकारी कार्रवाई को गलत मानने का संदेश जा सकता है। मंत्रालय ने इस व्याख्या पर आपत्ति जताते हुए अपना पक्ष सामने रखा।
गृह सचिव की माफी पर गृह मंत्रालय ने दी सफाई
गृह मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट दी है कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस का जवाब देते हुए बिना शर्त माफी मांगी है।मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसके अनुसार अवमानना नोटिस के जवाब में दाखिल हलफनामे की शुरुआत बिना शर्त माफी से करना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है।इसके बाद संबंधित पक्ष अपने तथ्य, तर्क और बचाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करता है।मंत्रालय का कहना है कि इस प्रक्रिया को सरकारी अधिकारियों द्वारा गलती स्वीकार किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अवमानना नोटिस के बाद दाखिल हुआ हलफनामा
यह मामला दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ा है।सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अधिकारियों को निर्देश दिया था कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाए।इसके बावजूद दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं और परिवहन संबंधी पाबंदियों को लेकर सवाल उठे। इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई।अदालत ने केंद्रीय गृह सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था।
सरकार बोली- कानून के अनुरूप उठाए गए कदम
गृह मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली में सरकार और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत थी।मंत्रालय के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना था।सरकार ने अपने जवाब में यह रुख अपनाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की।हालांकि, सरकारी कार्रवाई कानून के अनुरूप थी या नहीं और उससे अदालत के आदेश की अवमानना हुई या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सुप्रीम कोर्ट को करना है।
दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं पर लगी थी पाबंदी
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, दिल्ली में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक कुछ क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की गई थीं।यह प्रतिबंध रायसीना हिल्स के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में लागू किया गया था।सरकार ने दलील दी कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।गृह सचिव ने अदालत से आवश्यकता पड़ने पर कानून के तहत सीमित क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने की अनुमति देने के लिए पूर्व आदेश में संशोधन का अनुरोध भी किया।
दिल्ली पुलिस ने भी अदालत में रखा अपना पक्ष
अवमानना मामले में दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।पुलिस ने कहा कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा संबंधी सूचनाएं मिली थीं। इन सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए।पुलिस ने अपने हलफनामे में पिछले प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका का भी उल्लेख किया।दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने और कुछ स्थानों पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय सुरक्षा परिस्थितियों के आधार पर लिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब अवमानना मामले में अदालत के अगले निर्णय का इंतजार है।सरकार का कहना है कि अधिकारियों ने कानून के तहत अपने कर्तव्यों का पालन किया और किसी न्यायिक आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया।वहीं, याचिका में प्रशासनिक प्रतिबंधों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत बताया गया है।फिलहाल दोनों पक्षों के तर्क न्यायालय के समक्ष हैं। अदालत की आगे की सुनवाई और आदेश से ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित प्रशासनिक कदमों को अवमानना माना जाएगा या नहीं।
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