हिमाचल प्रदेश

हिमालय की ऊंची चोटियों पर वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता

Ratna Netam
15 Oct 2026 7:30 PM IST
हिमालय की ऊंची चोटियों पर वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य के लाहौल-स्पीति जिले में समुद्र तल से लगभग 4,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गीपांग गथ ग्लेशियर क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का सफलतापूर्वक फील्ड कार्यान्वयन किया गया है। इस तकनीक का उद्देश्य ग्लेशियर से बनी झील में अचानक पानी निकलने के खतरे की निगरानी करना और संभावित बाढ़ की स्थिति में समय रहते चेतावनी उपलब्ध कराना है।हिमाचल प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने इस पहल को महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली की सहायता से दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में संभावित आपदाओं की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत किया जा सकेगा।
4100 मीटर की ऊंचाई पर तकनीकी उपलब्धि
गीपांग गथ ग्लेशियल झील हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित है। यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, कम तापमान और बदलता मौसम तकनीकी उपकरण स्थापित करने में बड़ी चुनौती पैदा करते हैंइसके बावजूद वैज्ञानिक संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को क्षेत्र में सफलतापूर्वक स्थापित करने की जानकारी दी गई है।इससे पहले भी राज्य सरकार ने इस झील को संभावित रूप से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की सूची में शामिल किया था। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों में इसकी ऊंचाई लगभग 4,098 मीटर दर्ज है।
विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया महत्वपूर्ण कदम
आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने इस पहल को हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम कम करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।उन्होंने कहा कि राज्य अब आपदा आने के बाद राहत और बचाव कार्य करने की व्यवस्था से आगे बढ़कर वैज्ञानिक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने की व्यवस्था को मजबूत कर रहा है।राणा ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई और कठिन मौसम में निगरानी उपकरणों की तैनाती वैज्ञानिक संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों, जिला प्रशासन, आपदा प्रतिक्रिया टीमों और फील्ड कर्मचारियों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।उन्होंने इस उपलब्धि को विभिन्न विभागों और विशेषज्ञों के बेहतर तालमेल का परिणाम बताया।
क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ ऐसी घटना है, जिसमें ग्लेशियर से बनी झील का पानी अचानक बड़ी मात्रा में बाहर निकल जाता है।ग्लेशियरों के पिघलने से कई स्थानों पर झीलें बन जाती हैं। इन झीलों में पानी प्राकृतिक बर्फ या चट्टानों और मलबे से बने अवरोधों के पीछे जमा रहता है।यदि किसी कारण से यह अवरोध टूट जाए, तो बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बह सकता है।ऐसी बाढ़ पहाड़ी गांवों, सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है।
कैसे काम करेगी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली?
ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए विकसित प्रारंभिक चेतावनी तकनीक में जलस्तर मापने वाले सेंसर, मौसम संबंधी उपकरण और दूरसंचार प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।इन उपकरणों के जरिए झील के जलस्तर और आसपास की परिस्थितियों में होने वाले बदलावों की निगरानी की जा सकती है।केंद्र सरकार के सी-डैक ने हिमाचल प्रदेश में जीएलओएफ निगरानी प्रणाली का एक प्रायोगिक मॉडल विकसित किया है। इसमें जलस्तर निगरानी स्टेशन, स्वचालित मौसम स्टेशन और उपग्रह संचार तकनीक शामिल हैं।इस तरह की प्रणालियां संभावित खतरे के संकेत मिलने पर अधिकारियों को तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, चेतावनी मिलने का समय और उसकी प्रभावशीलता वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
गीपांग गथ झील को लेकर पहले भी जताई गई चिंता
लाहौल-स्पीति की गीपांग गथ ग्लेशियल झील के बढ़ते आकार को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी।सितंबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1989 में झील का क्षेत्रफल लगभग 36.49 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2022 तक बढ़कर 101 हेक्टेयर से अधिक हो गया।झील के आकार में बढ़ोतरी के कारण निचले इलाकों में संभावित बाढ़ के खतरे की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से सिस्सू और आसपास के क्षेत्रों के लिए आपदा तैयारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन होगा मजबूत
हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियर से जुड़ी झीलों की निगरानी बढ़ाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सितंबर 2026 में हिमालयी राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की निगरानी, समय पर चेतावनी और लोगों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया था।गीपांग गथ ग्लेशियर क्षेत्र में चेतावनी प्रणाली का सफल फील्ड कार्यान्वयन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे संभावित बाढ़ के खतरे का समय रहते आकलन करने और स्थानीय प्रशासन की आपदा तैयारियों को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
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