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Delhi University Campus Placement : दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए नौकरी और इंटर्नशिप की तलाश अब आसान होने वाली है। विश्वविद्यालय का सेंट्रल प्लेसमेंट सेल यानी CPC 7 और 8 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय इंटर-कॉलेज जॉब एवं इंटर्नशिप मेला आयोजित करने जा रहा है। इस आयोजन का मकसद छात्रों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कंपनियों, रिक्रूटर्स और करियर से जुड़े अवसरों से जोड़ना है।
यह जॉब और इंटर्नशिप मेला खास तौर पर उन छात्रों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जो पढ़ाई के साथ-साथ इंटर्नशिप करना चाहते हैं या फिर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की तलाश में हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े अलग-अलग कॉलेजों के छात्र इस मेले में हिस्सा लेकर अपने लिए रोजगार के अवसर तलाश सकेंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय का सेंट्रल प्लेसमेंट सेल समय-समय पर छात्रों के लिए प्लेसमेंट और करियर से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इस बार दो दिनों तक चलने वाला इंटर-कॉलेज जॉब एवं इंटर्नशिप मेला बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें विभिन्न सेक्टरों से जुड़ी कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस तरह के जॉब फेयर का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि छात्रों को अलग-अलग कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर बार-बार आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही जगह पर कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलने, अपनी प्रोफाइल साझा करने और नौकरी या इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने का मौका मिल सकता है।
जो छात्र अभी कॉलेज के शुरुआती वर्षों में हैं, उनके लिए इंटर्नशिप एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। इंटर्नशिप के जरिए छात्र पढ़ाई के दौरान ही कॉरपोरेट दुनिया, कार्य संस्कृति और प्रोफेशनल स्किल्स को समझ सकते हैं। वहीं अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए जॉब फेयर सीधे प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध करा सकता है।
रिज्यूमे तैयार रखना होगा जरूरी
जॉब और इंटर्नशिप मेले में हिस्सा लेने वाले छात्रों को अपना अपडेटेड रिज्यूमे तैयार रखना चाहिए। रिज्यूमे में शैक्षणिक योग्यता, स्किल्स, इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट, सर्टिफिकेशन और अन्य उपलब्धियों की जानकारी साफ और संक्षिप्त रूप से शामिल होनी चाहिए।
छात्रों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने रिज्यूमे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी न दें। कंपनियां इंटरव्यू या आगे की प्रक्रिया में उम्मीदवार से रिज्यूमे में दी गई जानकारी के बारे में सवाल पूछ सकती हैं।
इसके अलावा छात्रों को अपने कॉलेज आईडी कार्ड और जरूरी दस्तावेज भी साथ रखने चाहिए। अगर किसी कंपनी की तरफ से तत्काल आवेदन प्रक्रिया या दस्तावेज सत्यापन किया जाता है तो इससे छात्रों को सुविधा होगी।
इंटरव्यू की तैयारी भी जरूरी
सिर्फ रिज्यूमे लेकर पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को बेसिक इंटरव्यू सवालों की तैयारी भी करके जानी चाहिए। आमतौर पर रिक्रूटर्स उम्मीदवारों से उनके परिचय, स्किल्स, कॉलेज प्रोजेक्ट, करियर गोल और संबंधित पद में रुचि के बारे में सवाल पूछ सकते हैं।
फ्रेशर्स से अक्सर यह पूछा जाता है कि वे कंपनी के साथ क्यों काम करना चाहते हैं और उनके पास ऐसी कौन-सी स्किल्स हैं जो उस पद के लिए उपयोगी हो सकती हैं। ऐसे सवालों के जवाब पहले से सोचकर रखने से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
कई सेक्टरों में मिल सकते हैं अवसर
जॉब और इंटर्नशिप मेले में अलग-अलग क्षेत्रों से अवसर मिलने की संभावना रहती है। इनमें सेल्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, मानव संसाधन, कंटेंट, डेटा एनालिटिक्स, बिजनेस डेवलपमेंट, ऑपरेशंस, आईटी और कस्टमर सपोर्ट जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।
हालांकि किस कंपनी में कौन-सा पद उपलब्ध होगा, यह संबंधित कंपनी की जरूरत पर निर्भर करेगा। इसलिए छात्रों को अपनी पढ़ाई और स्किल्स के अनुसार सही अवसर चुनना चाहिए।
अगर कोई छात्र किसी खास सेक्टर में काम करना चाहता है तो उसे उस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और पदों के बारे में पहले से जानकारी जुटा लेनी चाहिए। इससे जॉब फेयर में समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इंटर्नशिप से बढ़ेगा अनुभव
जो छात्र अभी नौकरी के लिए तैयार नहीं हैं, वे इंटर्नशिप के अवसरों पर खास ध्यान दे सकते हैं। इंटर्नशिप से छात्रों को प्रोफेशनल अनुभव मिलता है और भविष्य में नौकरी के लिए आवेदन करते समय उनका रिज्यूमे मजबूत बनता है।
कई कंपनियां इंटर्नशिप के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को आगे प्री-प्लेसमेंट ऑफर भी दे सकती हैं। हालांकि यह पूरी तरह कंपनी की नीति और उम्मीदवार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
इंटर्नशिप चुनते समय छात्रों को काम की प्रकृति, अवधि, सीखने के अवसर और स्टाइपेंड जैसी बातों को ध्यान से समझना चाहिए। सिर्फ कंपनी का नाम देखकर इंटर्नशिप चुनने के बजाय यह देखना जरूरी है कि वहां से उन्हें कौन-सी स्किल सीखने को मिलेगी।
कम्युनिकेशन स्किल्स भी होंगी अहम
जॉब फेयर में छात्रों की कम्युनिकेशन स्किल्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसी कंपनी के प्रतिनिधि से बातचीत करते समय छात्रों को आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
बहुत ज्यादा घबराने या जल्दबाजी में जवाब देने से बचना चाहिए। अगर किसी सवाल का जवाब नहीं पता है तो गलत जानकारी देने के बजाय साफ तौर पर स्वीकार करना बेहतर माना जाता है।
फॉर्मल या सेमी-फॉर्मल कपड़े पहनकर जाना भी अच्छा प्रभाव डाल सकता है। पहली मुलाकात में उम्मीदवार का व्यवहार, बॉडी लैंग्वेज और बातचीत का तरीका काफी मायने रखता है।
कॉलेज से कॉरपोरेट तक का मौका
दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्र हर साल पढ़ाई पूरी करके नौकरी बाजार में उतरते हैं। ऐसे में इस तरह के प्लेसमेंट कार्यक्रम कॉलेज और कॉरपोरेट सेक्टर के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं।
कई छात्रों के लिए जॉब फेयर उनका पहला प्रोफेशनल इंटरव्यू भी हो सकता है। भले ही उन्हें तुरंत नौकरी न मिले, लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों से इंटरव्यू प्रक्रिया को समझने और रिक्रूटर्स की अपेक्षाओं को जानने का मौका मिलता है।
जिन छात्रों का चयन नहीं होता, वे भी अपने अनुभव से यह समझ सकते हैं कि उन्हें किन स्किल्स पर आगे काम करने की जरूरत है। यही अनुभव भविष्य के इंटरव्यू में मददगार साबित हो सकता है।
दो दिनों तक रहेगा मौका
7 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह इंटर-कॉलेज जॉब एवं इंटर्नशिप मेला 8 अक्टूबर तक चलेगा। ऐसे में छात्रों के पास दो दिनों तक अलग-अलग अवसरों को समझने और आवेदन करने का मौका रहेगा।
छात्रों को सलाह है कि वे आयोजन से जुड़ी पात्रता, रजिस्ट्रेशन और प्रवेश संबंधी जानकारी अपने कॉलेज या दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट्रल प्लेसमेंट सेल से जरूर जांच लें। अलग-अलग कंपनियों के लिए योग्यता और चयन प्रक्रिया अलग हो सकती है।
कुल मिलाकर, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यह दो दिवसीय जॉब एवं इंटर्नशिप मेला करियर की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। जो छात्र नौकरी या इंटर्नशिप की तलाश में हैं, उनके लिए यह कंपनियों तक सीधे पहुंचने, अपना रिज्यूमे साझा करने और इंटरव्यू का अनुभव हासिल करने का अच्छा मौका है।
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