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India ही नहीं, दुनिया में बढ़ रहा एथेनॉल मिश्रण का चलन

Ratna Netam
14 July 2026 5:33 PM IST
India  ही नहीं, दुनिया में बढ़ रहा एथेनॉल मिश्रण का चलन
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New Delhi नई दिल्ली : पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई20 को लेकर भारत में पिछले कुछ समय से बहस तेज है। कई लोगों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाने वाला अकेला देश नहीं है। दुनिया के कई विकसित और बड़े देश पहले से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर स्वच्छ ईंधन, ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

एथेनॉल मिश्रण का मुख्य उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन के इस्तेमाल को कम करना, प्रदूषण घटाना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसके इस्तेमाल से पेट्रोल में मौजूद कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है।

भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया है। सरकार का कहना है कि इससे देश को कई फायदे होंगे। इसमें कच्चे तेल के आयात बिल में कमी, किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण जैसे लाभ शामिल हैं।

वहीं, दुनिया के कई देशों ने एथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत से भी पहले अपनाया है। अमेरिका में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण लंबे समय से किया जा रहा है। वहां कई जगहों पर ई10 और ई15 जैसे मिश्रण आम हैं, जबकि कुछ वाहनों में ई85 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधन का भी इस्तेमाल किया जाता है।

ब्राजील एथेनॉल ईंधन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। वहां गन्ने से तैयार एथेनॉल का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। ब्राजील में ई27 यानी 27 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के जरिए ज्यादा मात्रा में एथेनॉल इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी मौजूद है।

यूरोप के कई देश भी जैव ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाना है। कई देशों में पेट्रोल और डीजल में जैव ईंधन मिलाने की नीति लागू है।

कुछ देश तो ई30, ई85 और ई100 जैसे उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण पर भी काम कर रहे हैं। ई100 में लगभग पूरी तरह एथेनॉल आधारित ईंधन होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से ऐसे वाहनों में किया जाता है जो इसके लिए तैयार किए गए हों।

विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को सफल बनाने के लिए वाहन तकनीक, ईंधन गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का संतुलन जरूरी है। अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए इंजन की क्षमता और ईंधन वितरण प्रणाली को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

भारत में ई20 लागू करने का उद्देश्य भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में जैव ईंधन भारत के ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर लोगों के बीच जागरूकता और सही जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है। वैश्विक अनुभव बताते हैं कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर यह स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक लाभ दोनों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

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