
नई दिल्ली: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कंपनी के डीमर्जर के बाद भविष्य की रणनीति का खुलासा किया है। वेदांता की 61वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में उन्होंने बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि समूह से अलग होने वाली हर कंपनी को 100 बिलियन डॉलर की वैश्विक कंपनी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि एक साल पहले तक वेदांता के पास एक बड़ी कंपनी थी, लेकिन डीमर्जर के बाद अब समूह के पास कई बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अलग-अलग कंपनियां अपनी क्षमता के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना सकती हैं।
AGM में अनिल अग्रवाल ने ‘वेदांता अनलिमिटेड’ विजन पेश किया। उन्होंने बताया कि कंपनी की भविष्य की रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगी, जिन्हें उन्होंने ‘3P’ का नाम दिया है। इसमें पहला है ‘Produce More’ यानी अधिक उत्पादन करना, दूसरा ‘Partner Better’ यानी बेहतर साझेदारियां करना और तीसरा ‘Purpose Beyond Profit’ यानी केवल मुनाफे से आगे बढ़कर समाज और देश के विकास में योगदान देना।
उन्होंने कहा कि डीमर्जर का उद्देश्य कंपनी को ज्यादा तेज, स्वतंत्र और मजबूत बनाना है। अलग-अलग कंपनियां अपने क्षेत्र में ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेंगी और इससे विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
वेदांता समूह धातु, खनन, ऊर्जा और अन्य कई क्षेत्रों में काम करता है। कंपनी का मानना है कि अलग-अलग इकाइयों के स्वतंत्र रूप से काम करने से निवेशकों को भी बेहतर अवसर मिलेंगे और प्रत्येक कंपनी अपनी क्षमता के अनुसार विस्तार कर सकेगी।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत में प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। वेदांता इन अवसरों का उपयोग करते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
उन्होंने अपनी रणनीति में साझेदारी को भी अहम स्थान दिया। उनके अनुसार, बेहतर तकनीक, विशेषज्ञता और वैश्विक सहयोग के जरिए कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही कंपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी अपनी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।
AGM के दौरान उन्होंने कहा कि वेदांता का लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना भी है। कंपनी रोजगार बढ़ाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने और नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करेगी।
डीमर्जर के बाद वेदांता समूह की अलग-अलग कंपनियों को अपने-अपने क्षेत्र में विस्तार करने का मौका मिलेगा। इससे प्रबंधन को बेहतर फैसले लेने और बाजार की जरूरतों के अनुसार तेजी से कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अनिल अग्रवाल के इस ऐलान के बाद उद्योग जगत में वेदांता की भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने 100 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह की योजनाओं को आगे बढ़ाती है।





