ऑस्टिन। अमेरिका के टेक्सास राज्य में पब्लिक स्कूलों में H-1B वीजा प्रोग्राम के जरिए कर्मचारियों की भर्ती को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें राज्य के पब्लिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स को H-1B वीजा के माध्यम से कर्मचारियों को नियुक्त करने से रोकने की बात कही गई है।

यदि राज्य विधानसभा इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो टेक्सास अमेरिका का पहला ऐसा राज्य बन सकता है जो सरकारी स्कूलों में H-1B वीजा के जरिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाएगा। इस फैसले का असर राज्यभर में काम कर रहे सैकड़ों विदेशी शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

गवर्नर ग्रेग एबॉट ने यह प्रस्ताव ऑस्टिन में पेश किया। उन्होंने कहा कि यह कदम टेक्सास की शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की नीति का हिस्सा है। उनका तर्क है कि पब्लिक स्कूलों में उपलब्ध नौकरियों में पहले राज्य के योग्य नागरिकों और स्थानीय उम्मीदवारों को अवसर मिलना चाहिए।

प्रस्तावित कानून के अनुसार, टेक्सास के पब्लिक स्कूलों में किसी भी कर्मचारी को H-1B वीजा पर काम करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें वर्तमान में H-1B वीजा पर कार्यरत कर्मचारी और भविष्य में ऐसे वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोग भी शामिल होंगे।

H-1B वीजा अमेरिका का एक लोकप्रिय गैर-आप्रवासी वर्क वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत कंपनियां और संस्थाएं विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। तकनीकी क्षेत्र के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

टेक्सास के गवर्नर का कहना है कि सार्वजनिक शिक्षा क्षेत्र में नौकरियों के लिए राज्य के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने से राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था को फायदा मिलेगा।

एबॉट ने केवल H-1B वीजा तक ही प्रस्ताव सीमित नहीं रखा है। उन्होंने पब्लिक स्कूलों को विदेशी सरकारों या संस्थाओं से उपहार स्वीकार करने और कुछ विशेष प्रकार के वित्तीय समझौते करने पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है।

गवर्नर का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को बाहरी प्रभावों से मुक्त और अधिक पारदर्शी बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों में नीतियां बनाते समय राज्य के हितों और स्थानीय समुदाय की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि कई अमेरिकी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में H-1B वीजा के जरिए आने वाले योग्य शिक्षकों पर रोक लगाने से कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गणित, विज्ञान और विशेष शिक्षा जैसे विषयों में कई स्कूल विदेशी शिक्षकों पर निर्भर रहते हैं। यदि नए नियम लागू होते हैं तो स्कूलों को वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करनी पड़ सकती है।

समर्थकों का कहना है कि इस कदम से स्थानीय शिक्षकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय भागीदारी मजबूत होगी। वहीं, विरोध करने वालों का तर्क है कि शिक्षा जैसे क्षेत्र में गुणवत्ता और उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।

टेक्सास में यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों और वीजा कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। H-1B वीजा लंबे समय से अमेरिकी रोजगार नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और इसे लेकर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं।

अब इस प्रस्ताव पर राज्य विधानसभा में चर्चा होगी। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो टेक्सास की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और इसका प्रभाव अन्य राज्यों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षा क्षेत्र, प्रवासी समुदाय और राजनीतिक समूहों की प्रतिक्रियाओं पर नजर बनी हुई है।

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